गरियाबंद/फिंगेश्वर (गंगा प्रकाश)। सरकार के निर्देशों के बाद भी अधिकारियों द्वारा पराली जलाने वाले किसानों पर कार्यवाही न होने के कारण इन दिनों अंचल के सभी गांवो में दिन रात 24 घंटे खेतों में पराली जलाते देखा जा सकता है। इससे आवागमन खतरनाक हो रहा है, प्रदूषण फैल रहा है, लोगों को इसके धुएं के कारण बहुत ज्यादा परेशानी हो रही है। पिछले 10-15 दिनों से लगातार मिडिया भी ग्रामीण क्षेत्र में पराली जलाने के समाचार सार्वजनिक कर रहा है। इसके बाद भी अधिकारियों को हाथ पे हाथ रखकर चुप रहना आम जनता के साथ ज्यादती ही है। रबी फसल की कटाई के बाद अधिकांश किसान पैरा को खेतों में ही जला रहे है, जिसका वातावरण पर विपरीत असर पड़ रहा है। धुएं के कारण लोगों को काफी परेशानी हो रही है। प्रशासन की लाख मनाही के बावजूद किसान खेतों में पराली जला ही रहे है। पराली जलाने से चारा भी नष्ट हो रहा है, इसके चलते पशुओं को चारा के रूप में पैरा नहीं मिल पा रहा है। अंचल के कई गांव में किसान रबी फसल की कटाई के बाद से पराली जला रहे है। इससे आगजनी का भी खतरा बना हुआ है। वातावरण गर्म रहने के कारण खेतों में लगाई आग तेजी से फैलती है। ग्रीष्मकालीन फसलों की कटाई पूर्णतः की ओर है। धान फसल कटाई के बाद खेत में बचे फसल अवशेष को जलाने की घटनाएं होती रहती है, जिससे वातावरण में जहरीली गैस जैसे-मिथेन, कार्बनमोनोअक्साई, नाइट्राक्साईड के फैलने से प्रदूषण फैलता है, जो मानव के साथ साथ पशुओं के लिए भी हानिकारक है। मुख्य सड़कों में कई कई एकड़ में पराली जलाने से आने जाने वाले ग्रामीण काफी परेशान है। जिला प्रशासन से पराली जलाने वाले कृषकों में तत्काल कार्यवाही अपेक्षित है।
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