छुरा में समर कैंप बना बच्चों की प्रतिभा संवारने का हॉटस्पॉट – शिक्षा अधिकारी मतावले की पहल रंग ला रही

 

छुरा (गंगा प्रकाश)। जब अधिकांश बच्चे गर्मी की छुट्टियों में मोबाइल और टीवी की दुनिया में उलझे रहते हैं, वहीं विकासखंड छुरा के स्कूली बच्चे इस समय खुद को संवारने और अपनी प्रतिभा को निखारने में जुटे हुए हैं। कारण है — समर कैंप! विकासखंड शिक्षा अधिकारी के.एल. मतावले के कुशल निर्देशन में संचालित यह समर कैंप बच्चों के लिए सिर्फ एक मनोरंजन केंद्र नहीं, बल्कि स्वावलंबन, रचनात्मकता और संस्कारों का केंद्र बन चुका है।

गर्मी की छुट्टी में भी बच्चों के चेहरों पर चमक

शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला पिपराही में आयोजित समर कैंप का औचक निरीक्षण करते हुए श्री मतावले ने बच्चों को घर-आंगन और जंगल के आस-पास मिलने वाले संसाधनों से नवाचार करने की प्रेरणा दी। उन्होंने महुआ, पलाश, तेंदू, खमार, छिंद के पत्तों से उपयोगी और सजावटी वस्तुएँ बनाने के टिप्स दिए। बच्चों को वेस्ट से बेस्ट का मंत्र देते हुए उन्होंने दिखाया कि कैसे कचरे को भी कारीगरी में बदला जा सकता है।

सिर्फ किताबें नहीं, लोक संस्कृति भी

संकुल समन्वयक रामलाल टांडे ने बच्चों को लोक संगीत की गहराइयों से परिचित कराया। गीतों की लय, छंद, लघु-गुरु के संयोजन और रचना की तकनीकें इतनी सरलता से समझाईं कि बच्चे खुद ही गाने रचने लगे। उन्होंने बताया कि अपने आसपास की घटनाओं को गीत और कविता में ढालना साहित्यिक विकास की पहली सीढ़ी है।

योग, ध्यान और मोबाइल से मुक्ति की ओर

दूसरे समन्वयक शंकर लाल यदु ने बच्चों को योग के माध्यम से मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य बनाए रखने की तकनीक सिखाई। बच्चों को मोबाइल की लत से दूर रहने की सलाह देते हुए उन्होंने ध्यान, प्राणायाम और प्रेरक पुस्तकों के वाचन का अभ्यास कराया। उन्होंने चिड़चिड़ेपन और तनाव को बच्चों की सबसे बड़ी चुनौती बताया, जिससे ध्यान के ज़रिए निपटा जा सकता है।

नवाचार से निखरती रचनात्मकता

पिपराही और भैंसामुड़ा के शिक्षक — रोहित नेताम, विभा चंद्राकर, संदीप चंद्राकर, पूनम चंद्राकर — ने शिक्षा को खेल से जोड़ते हुए विज्ञान नाटिका, चित्रकला, नृत्य, मिट्टी के खिलौने, पत्तलों और झालरों का निर्माण सिखाया। इन गतिविधियों से न केवल बच्चों का हाथों का हुनर निखर रहा है, बल्कि उनकी आत्मनिर्भरता की भावना भी पल्लवित हो रही है।

भरूवामुड़ा की रचनात्मक टीम भी पीछे नहीं

प्राथमिक शाला भरूवामुड़ा के प्रधानपाठक फलेंद्र ठाकुर और शिक्षिका योगेश्वरी सेवई भी अपने क्षेत्र के बच्चों को पुराने कागजों से फूल, कप-प्लेट जैसी सजावटी वस्तुएं और रस्सी से शिल्प निर्माण सीखा रहे हैं। इन गतिविधियों ने बच्चों को अपने हाथों से कुछ बनाने की ख़ुशी दी है — जो डिजिटल युग में लगभग खोती जा रही थी।

सामुदायिक सहभागिता से बढ़ा उत्साह

इस कैंप को सफल बनाने में शाला प्रबंधन एवं विकास समिति अध्यक्ष कृष्णा पटेल, वरिष्ठ नागरिक संतन सिंह ठाकुर, संतोष नेताम, केशरी कंवर समेत कई ग्रामीणजन अपनी उपस्थिति से बच्चों को प्रोत्साहित कर रहे हैं। शिक्षकों की टीम – रामसाय टांडे, अर्जुन सिन्हा और अन्य ने भी जीवनोपयोगी शिक्षाएँ दीं।

समर कैंप बना ग्रामीण शिक्षा की नई तस्वीर

इस समर कैंप ने साबित कर दिया है कि संसाधन की कमी दिशा और दृढ़ नीयत के सामने कोई मायने नहीं रखती। गर्मी की छुट्टियाँ अब सिर्फ आराम का समय नहीं, सीखने और बदलने का अवसर बन रही हैं। श्री मतावले और उनकी टीम की यह पहल छुरा विकासखंड को एक शैक्षणिक मॉडल के रूप में उभार रही है।

जहां बच्चे सीखते हैं जीवन जीना — वहीं है असली स्कूल। और छुरा का समर कैंप बन चुका है इसका जीवंत उदाहरण।

 


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