गरियाबंद (गंगा प्रकाश)। जिला प्रशासन बाल विवाह को रोकने के लिए सतर्क है। बाल विवाह की पूर्णतः रोकथाम के लिए कलेक्टर श्री प्रभात मलिक के निर्देश पर महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री अशोक पाण्डेय के मार्गदर्शन एवं जिला बाल संरक्षण अधिकारी श्री अनिल द्विवेदी के निगरानी में कार्य किया जा रहा है। इसके लिये विकासखण्ड स्तर एवं पंचायत स्तर पर बाल संरक्षण समिति का गठन किया गया है। विकासखण्ड स्तरीय बाल संरक्षण समिति के अध्यक्ष संबंधित क्षेत्र के अनुविभागीय दण्डाधिकारी राजस्व होंगे तथा जनपद पंचायत के अध्यक्ष एवं चयनित 03 जनपद पंचायत सदस्य जिसमें 01 महिला, मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत, तहसीलदार एवं नायब तहसीलदार, पुलिस थानों में पदस्थ बाल कल्याण अधिकारी एवं अन्य विभागों के अधिकारी/प्रतिनिधि- खण्ड चिकित्सा अधिकारी, आदिम जाति कल्याण विभाग के प्रतिनिधि, श्रम निरीक्षक, खण्ड शिक्षा अधिकारी, पंचायत एवं समाज शिक्षा संगठन, ग्रामीण विकास अधिकारी, पर्यवेक्षक आईसीडीएस एवं अन्य स्थानीय स्वैच्छिक संगठन के प्रतिनिधि सदस्य होंगे तथा बाल विकास परियोजना अधिकारी सचिव होंगे। इसी तरह ग्राम पंचायत स्तरीय बाल संरक्षण समिति के अध्यक्ष सरपंच होंगे तथा पंचायत सचिव को सचिव एवं पंचायत के कोई 03 पंच जिसमें 01 महिला, पंचायत क्षेत्र के सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, चयनित मितानीन एवं पंचायत क्षेत्र के चयनित शिक्षक, महिला स्व सहायता समूह के 02 सदस्य, पंचायत क्षेत्र मे निवासरत हाईस्कूल के 01 छात्र एवं 01 छात्रा सदस्य होंगे।
मिशन वात्सल्य योजना के अधिकारी ने बताया कि विकासखण्ड स्तरीय एवं पंचायत स्तरीय बाल संरक्षण समिति के माध्यम से बाल विवाह पर पूर्ण रुप से प्रतिबंध लगाने के लिये निर्देश दिये गये है। ग्राम पंचायतों में विवाह के संबंध में पंजी संधारण में होने वाले समस्त विवाहों का रिकार्ड रहेगा जिससे बाल विवाह की जानकारी समय पूर्व प्राप्त हो जाएगी।
बाल विवाह की रोकथाम एवं जागरूकता लाने के लिए मिशन वात्सल्य योजना महिला एवं बाल विकास विभाग तथा चाईल्ड लाईन की संयुक्त टीम का गठन कर 22 से 24 अप्रैल तक पांचों विकासखण्डों में फिंगेश्वर, छुरा, गरियाबंद, मैनपुर एवं देवभोग में सरपंच, पंच, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, एवं नागरिकजनों के माध्यम एवं 38 ग्रामों के विवाह स्थल में जाकर जानकारी लिया गया। जिसमें कोई भी बाल विवाह के प्रकरण प्राप्त नहीं हुये। ज्ञात हो कि जिले में वर्ष 2020 से 31 मार्च 2023 तक कुल 76 बाल विवाह रोके गये हैं।
बाल विवाह की रोकथाम हेतु महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा समय-समय पर पंचायत एवं विद्यालयों में जाकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। जिसमें बाल विवाह से होने वाले दुष्परिणाम जैसे बच्चों में कुपोषण, शिशु-मृत्यु दर, एवं मातृ मृत्यु दर के बारे में जानकारी दिया जाता है। विवाह के संबंध में निर्धारित आयु सीमा के पश्चात् ही विवाह करें। जिससे बालक-बालिका के शिक्षा, स्वास्थ्य, कुपोषण, परिवार नियोजन आदि में बेहतर सुधार हो सके। जिससे वर्ष 2020 की तुलना में 31 मार्च 2023 तक हुये बाल विवाह के प्रकरण में कमी आयी है।
विवाह के लिये बालिका की आयु 18 वर्ष एवं लड़के की आयु 21 वर्ष होनी चाहिए। निर्धारित आयु से कम आयु में महिला/पुरूष का विवाह करने या करवाने की स्थिति में सम्मिलित व सहयोगी सभी लोग अपराध की श्रेणी में आयेंगे। इस नियम का कोई भी उल्लंघन करता है तो उसे दो वर्ष तक करावास अथवा 01 लाख रूपये तक का जुर्माना हो सकता है। बाल विवाह होने की सूचना ग्रामीण स्तर में पंचायत स्तरीय व नगरीय निकाय/वार्ड स्तर पर बाल संरक्षण समिति एवं विकासखण्ड स्तर पर बाल संरक्षण समिति तथा पुलिस विभाग या चाईल्ड हेल्प लाईन 1098 में या श्री अनिल द्विवेदी, जिला बाल संरक्षण अधिकारी के मोबाईल नम्बर 88392-39688 में जानकारी दिया जा सकता है।
जिले में बाल विवाह के रोकथाम के लिए समिति गठित,जिले में वर्ष 2020 से 31 मार्च 2023 तक 76 बाल विवाह रोके गये
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