रायपुर । अनुसूचित जाति जनजाति वर्ग के विभिन्न संगठनो के संयुक्त मोर्चा के द्वारा प्रेस वार्ता के माध्यम से छत्तीसगढ़ शासन से यह मांग किया गया कि माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर के दिनांक 16/04/2024 को पारित निर्णय में छत्तीसगढ़ शासन 3 माह के भीतर छत्तीसगढ़ लोक सेवा पदोन्नति नियम 2003 के नियम 5 को माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय एम नागराज बनाम यूनियन ऑफ इंडिया 2006, जरनैल सिंह बनाम लक्ष्मी नारायण गुप्ता 2018, बी के पवित्र द्वितीय 2019 एवं जरनैल सिंह द्वितीय 2022 ड मामले के अनुरूप नए नियम प्रतिस्थापित कृषि अनुसूचित किया जावे। सोशल जस्टिस लीगल फाउंडेशन को फाउंडर विनोद कुमार कोशले ने कहा कि आदिवासी बहुल छत्तीसगढ़ राज्य में अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्गों की 45% आबादी से संबंधित संवैधानिक हितों यथा पदोन्नति में आरक्षण का मामला है । छत्तीसगढ़ राज्य में वाद क्रमांक 9778/ 2019 के परिणाम स्वरुप दिसंबर 2019 से पदोन्नति आरक्षण स्थगित है।सुप्रीम कोर्ट ने एससी,एसटी वर्ग की कैडर वाइज डेटा के आधार पर पदोन्नति प्रदान करने अनुमति प्रदान की है। अभी हाल ही में सामान्य प्रशासन विभाग छत्तीसगढ़ शासन द्वारा जारी परिपत्र क्रमांक 14/06/ 2024 में समस्त विभागों को केवल माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर के आदेश के तहत पूर्ववर्ती परिपत्र का निरस्तीकरण कर संज्ञानार्थ प्रसारित किया गया है,लेकिन विभागों को पदोन्नति प्रक्रिया हेतु कोई निर्देशित नहीं किया गया है। लेकिन राज्य के विभिन्न अखबारों के माध्यम से यह खबर प्रसारित किया गया है कि सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा पदोन्नति में जारी आदेशानुसार कर्मचारियों अधिकारियों को पदोन्नति में आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा। आगे बताया गया कि पदोन्नति में आरक्षण को लेकर 77 वा एवम् 85 वा संविधान संशोधन की वैद्यता को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखी है।भारत के संविधान में परिणामी वरिष्ठता सहित पदोन्नति में आरक्षण का कानून आर्टिकल 16(4) क में जीवित है। हाईकोर्ट बिलासपुर द्वारा पारित निर्णय का परिपालन करने 16 जुलाई तक का समय है। राज्य में एससी, एसटी वर्ग के पदोन्नति के अभाव में पद रिक्त नहीं होंगे,जिससे इन वर्गों के बेरोजगार युवाओं को भी रोजगार से वंचित होना पड़ेगा। इस तरह के खबर से अनुसूचित जाति ,जनजाति समाज के अधिकारी कर्मचारी,स्थानीय मूल निवासियों व समाज में आक्रोश फैल रहा है। यदि शासन प्रशासन द्वारा तय समय में उचित निर्णय नही लिया जाता है तो मोर्चा के द्वारा बड़ी रणनीति तैयार की जायेगी।


छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल आरक्षित वर्ग अधिकारी कर्मचारी संघ से आर एल ध्रुव ने कहा कि विद्युत कंपनी में अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लिए 50% की सीलिंग लगाकर वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति नहीं देने के कारण अपूर्णनीय क्षति हुआ है, इस प्रकार के कार्रवाई से समस्त अनुसूचित जाति जनजाति वर्ग में आक्रोश व्याप्त है। प्रेस वार्ता श्री ध्रुव जी ने आगे कहा कि माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर के निर्णय एवं निर्देश के अनुसार शासन तत्काल कैडरवाइस मात्रात्मक डेटा एकजाई का विधिसम्मत छत्तीसगढ़ लोक सेवा(पदोन्नति) नियम 2003 के नियम 5 पुणे प्रतिस्थापित कर यथा शीघ्र अधिसूचित किया जाए एवं जब तक नए नियम 5 को प्रतिस्थापित कर अधिसूचित नहीं किया जाता है, तब तक सभी प्रकार के पदोन्नति को रोक लगाया जाए। साथ ही नए नियम को भूतलक्षी प्रभाव से लागू कर बैकलॉग सहित समस्त पदों पर पदोन्नति का लाभ देने की बातें कही।


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