भारत को मिलने जा रहा है दूसरा दलित CJI : न्याय और सामाजिक समानता की नई दस्तक!…

 

नई दिल्ली (गंगा प्रकाश)। देश की न्यायपालिका एक ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ी है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) संजीव खन्ना ने अपने उत्तराधिकारी के रूप में जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई के नाम की आधिकारिक सिफारिश कर दी है। यह सिफारिश केंद्रीय कानून मंत्रालय को भेज दी गई है, जिससे साफ है कि जस्टिस गवई भारत के 52वें मुख्य न्यायाधीश बनने जा रहे हैं।

7 महीने का कार्यकाल, लेकिन ऐतिहासिक पहचान :

वरिष्ठता के आधार पर चुने गए जस्टिस गवई का कार्यकाल भले ही केवल 7 महीनों का होगा, लेकिन यह भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में कई मायनों में खास होगा। वे भारत के दूसरे दलित मुख्य न्यायाधीश होंगे। इससे पहले सिर्फ जस्टिस केजी बालाकृष्णन ने 2007 में यह मुकाम हासिल किया था। सामाजिक समरसता और प्रतिनिधित्व की दृष्टि से यह एक क्रांतिकारी क्षण है।

डिमॉनेटाइजेशन और चुनावी बॉन्ड – दो विरोधाभासी फैसलों में निभाई अहम भूमिका :

 जस्टिस गवई ने सुप्रीम कोर्ट में कई ऐतिहासिक मामलों में निर्णायक भूमिका निभाई है। वे उस संविधान पीठ का हिस्सा थे, जिसने 2016 में मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले को सही ठहराया था। वहीं हाल ही में चुनावी बॉन्ड योजना को असंवैधानिक घोषित करने वाले बहुचर्चित फैसले में भी वे शामिल रहे।

कठोरता और ईमानदारी के पैरोकार :

 19 अक्टूबर 2024 को अहमदाबाद में न्यायिक अधिकारियों के सम्मेलन में जस्टिस गवई ने जो कहा, वह उनके न्यायिक दृष्टिकोण को साफ करता है— “अगर न्यायपालिका में लोगों का विश्वास डगमगाया, तो समाज भीड़ के न्याय की ओर बढ़ेगा।”उनकी यह चेतावनी सिर्फ एक विचार नहीं, बल्कि एक गहरी सामाजिक सच्चाई है, जो उनके न्याय के प्रति दृष्टिकोण को दर्शाती है— निडर, निष्पक्ष और जनता के भरोसे की रक्षा करने वाला।

जड़ों से शीर्ष तक की प्रेरक यात्रा :

24 नवंबर 1960 को महाराष्ट्र के अमरावती में जन्मे जस्टिस गवई ने 1985 में वकालत शुरू की थी। बॉम्बे हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक का सफर उनकी मेहनत, विद्वता और प्रतिबद्धता का प्रमाण है। वे 2019 में सुप्रीम कोर्ट के जज बने और 23 नवंबर 2025 को रिटायर होंगे।

CJI खन्ना के बाद गवई और फिर सूर्यकांत – नेतृत्व की परंपरा आगे बढ़ती रहेगी :

जस्टिस खन्ना का कार्यकाल 13 मई 2025 को खत्म हो रहा है। उनके बाद वरिष्ठता सूची में जस्टिस गवई और फिर जस्टिस सूर्यकांत का नाम आता है, जिनके 53वें CJI बनने की संभावना है। यह स्पष्ट संकेत है कि सुप्रीम कोर्ट नेतृत्व की पारदर्शी और संस्थागत परंपरा को बनाए हुए है।

न्यायपालिका में सामाजिक न्याय की गूंज :

 जस्टिस गवई का CJI बनना सिर्फ एक नियुक्ति नहीं, बल्कि न्यायपालिका में सामाजिक समावेश और दलित समाज की बढ़ती भागीदारी का प्रतीक है। यह उन लाखों युवाओं और वकीलों के लिए प्रेरणा है, जो न्याय की दुनिया में बदलाव लाना चाहते हैं।

भारत का नया मुख्य न्यायाधीश वह चेहरा होगा, जिसने अंधेरे से उजाले तक का रास्ता खुद तय किया। जस्टिस गवई की नियुक्ति न सिर्फ एक संवैधानिक प्रक्रिया है, बल्कि यह एक ऐतिहासिक पल भी है, जो बताता है –“न्याय का मंदिर सबके लिए खुला है, और वहां तक पहुंचना अब सपना नहीं, सम्भव है।”

 


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