गरियाबंद/फिंगेश्वर (गंगा प्रकाश)। मंदिर ट्रस्ट कमेटी फिंगेश्वर अंतर्गत बालाजी मंदिर ट्रस्ट, मॉ मौली माता मंदिर ट्रस्ट, पंच मंदिर ट्रस्ट, महादेव मंदिर ट्रस्ट एवं रानी श्यामकुमारी देवी धर्मशाला ट्रस्ट के नाम पर 500 एकड़ से ज्यादा कृषि जमीन है। जिस जमीन को प्रतिवर्ष रेगहा हेतु नीलाम कर कृषकों को खेती करने दिया जाता है। फिंगेश्वर के आसपास गांवो में उक्त कृषि जमीन को ग्राम सेंदर, चैतरा, रवेली, बिजली, पुरैना, बिनौरी, घोघरा, पतोरी आदि गांवो के कृषक रेगहा में लेते है। इन ग्रामों के कृषक रामाधार साहू, मोती निषाद, मनबोध निषाद, पुरानिक साहू, जगदीश साहू, तुलस वर्मा, जीवन सिन्हा, चंदूलाल नायक, केजऊ निषाद, मन्नू निषाद, ईश्वर साहू आदि ने बताया कि इस वर्ष हमें मंदिर ट्रस्ट समिति की कृषि भूमि का धान समर्थन मूल्य में बेचने का रजिस्ट्रेशन नहीं किया गया है। बैंक अधिकारी ने कहा है कि ट्रस्ट आदि की कृषि भूमि का धान खरीदने की अनुमति नहीं आई है। इन किसानों ने बताया कि गत वर्ष तक तो ट्रस्ट की कृषि भूमि का धान समर्थन मूल्य में खरीदा गया परंतु इन धानों में राजीव गांधी न्याय योजना की राशि जो प्रति एकड़ 9000 रू. होती है वह नहीं दी गई। इससे किसानों को ट्रस्ट की लगभग 500 एकड़ में कृषि कार्य करने से 45 लाख की राजीव गांधी न्याय योजना की राशि से वंचित होना पड़ा। जो कि मेहनतकश किसानों के हितों के साथ कुठाराघात है। किसानों ने कहा कि 500 एकड़ में अपनी मेहनत एवं खून पसीने से धान पैदा करने वाले हम लोग राजीव गांधी न्याय योजना की राशि के हकदार नहीं है। इन गांवो के साथ साथ आसपास ग्राम्यांचल के किसानों ने बताया कि उन्होंने काफी वर्षो से वन विभाग की भूमि में खेती करते है। उन्हें वन विभाग द्वारा इन कृषि भूमि का पट्टा भी दिया है। कृषकां ने बताया कि उनके पास जो स्वयं की 5 एकड़ लगानी भूमि है और अब आधा एकड़ वन भूमि का पट्टा मिला है तथा दोनों जमीन मिलाकर अगर हमारी जमीन 5.5 एकड़ हो जा रही है तो हमें राजीव गांधी न्याय योजना का लाभ पूरी कृषि भूमि में नहीं दिया गया है। इससे एक एकड़ से लेकर 10-12 एकड़ लगानी भूमि के सैकड़ो किसानों को लाखों रूपयों का नुकसान हो गया है जिन्हें पाव एकड़, आधा एकड़, एक एकड़, दो एकड़ तक वनभूमि का पट्टा मिला है। कृषकों ने कहा कि एक तरफ तो भूपेश बघेल कृषकों के हितैषी बनने का स्वांग करते है दूसरी तरफ नए नए अड़चन लगाकर मेहनतकश कृषकों के साथ अन्याय कर रहे है। चाहें ट्रस्ट की कृषि जमीन हो, मंदिर की जमीन हो, समितियों की जमीन हो उसे रेगहा में लेकर किसान मेहनत मजदूरी कर धान पैदा करते है तो उन गरीब एवं मेहनत कर जमीन का रेग पटाने वाले किसानों को क्यों उनकी मेहनत का लाभ देने में सरकार कोताही करती है। जबकि किसान तो जमीन से ही धान पैदा करती है। अंचल के ट्रस्ट भूमि में धान पैदा करने वाले, वनभूमि का पट्टा प्राप्त करने वाले सैकड़ों किसानों ने छत्तीसगढ़ सरकार से राजीव गांधी न्याय योजना का लाभ देने की मांग की है। इसी प्रकार ठाकुर दलगंजन सिंह उच्चतर माध्यमिक विद्यालय फिंगेश्वर, विद्या मंदिर सेंदर आदि अनेक संस्थाओं की कृषि भूमि पर कृषि करने वाले अनेकों कृषकों को धान बेचने पर राजीव गांधी न्याय योजना का लाभ नहीं मिलने से काफी रोष है। इस मामले में एक अनुमान है कि पूरे छत्तीसगढ़ राज्य में इस तरह के ट्रस्टों, मंदिरों, संस्थाओं आदि की 40 से 50 हजार एकड़ जमीनों को रेग में लेकर छोटे छोटे मेहनतकश मजदूर ग्रामीण, किसान कृषि कार्य कर धान का उत्पादन करते है परंतु उन्हें राजीव गांधी न्याय योजना के लाभ से वंचित रखा गया है।


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