गरियाबंद/फिंगेश्वर (गंगा प्रकाश)। वर्तमान समय में कथा सत्संग, आराधना, संकीर्तन सेवा का रस रहस्य वाणी में निरूपण करते हुए व्यासपीठ से भगवताचार्य पं. भागीरथी तिवारी ने कहा कि सत्संग के माध्यम से भागवत कथा का श्रवण करने से मन और चित्त शुद्धता में समहित हो जाता है अतः करण पवित्र होता है। मन की, बुद्धि की, चित्त की और अहंकार की पवित्रता के लिए भागवत कथा परम साधन है। आज नगर में तिवारी परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के 5वें दिन अपने प्रवचन में भगवताचार्य पं. भागीरथी तिवारी ने रामजन्म एवं कृष्णजन्म के प्रसंग को विस्तारित करते हुए कहा कि विकारों से रहित जीवन के लिए भगवान की कथा के साथ नामरूप लीला और धाम के साथ जुड़कर जीवन को सार्थक बनाने का प्रयास करना चाहिए। वर्तमान में नीती संस्कार और अध्यात्मविहीन शिक्षा पद्धति के दुष्प्रभाव से समाज में नैतिक मूल्यों का अभाव होते जा रहा है। चारों तरफ संस्कार तथा विकार ग्रस्त युवा पीढ़ी पाश्चत्य सभ्यता का अंधानुकरण कर विश्व प्रसिद्ध भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा से दूरी बढ़ाकर भ्रमित है। ऐसी दशा में राम की कथा, कृष्ण की कथा तथा भागवत कथा के माध्यम से आदर्श समाज, परिवार तथा राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरणा प्राप्त करने की आवश्यकता है। प्रवचन के दौरान रामजन्म एवं कृष्णजन्म का प्रसंग आते ही संगीतमय हर्षोल्लास के बीच श्रद्धालुजनों का उत्साह-उमंग एवं नाचते गाते भागवत प्रेमियों का नजारा देखते ही बन रहा था। पंडाल की साज सज्जा एवं व्यासपीठ की सुन्दरता श्रद्धालुओं के उत्साह में चार चांद लगा रही थी। रविवार होने से आज भागवत कथा का श्रवण करने काफी संख्या में श्रद्धालु बाहर यानी रायपुर, महासमुंद, राजिम आदि स्थानों से भी पहूंचे थे। भागवत पंडाल श्रद्धालुजनों से खचाखच भरा था। शुरू में भागवत कथा आयोजक बबली-दीपक तिवारी परिवार ने अपने आगन्तुक परिजनों, मित्रों एवं रिश्तेदारों के साथ भागवत भगवान व्यासपीठ की पूजा अर्चना करते हुए नमन किया। आज की कथा के बाद शाम में कथा समाप्ति पर उपस्थित सैकड़ों श्रद्धालुजनों ने पूरे मनोयोग एवं उत्साह-उमंग के साथ संगीतमय भागवत भगवान की आरती की। कथा के बाद उपस्थित श्रद्धालुजनों में भोजन प्रसादी ग्रहण की। कल सोमवार को भागवत कथा के 6वें दिन सोमवार 01 अप्रैल को भगवताचार्य पं. भागीरथी तिवारी महाराज रूखमणी विवाह प्रसंग पर प्रवचन करेंगे। रूखमणी विवाह प्रसंग के लिए कथा पंडाल को काफी आकर्षक ढंग से विवाह मंडप जैसा सजाया गया है। बाजे गाजे एवं पारंपरिक नृत्य के साथ रूखमणी विवाह प्रसंग का कार्यक्रम होगा।


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