दो साल से फरार, पहले से जारी है स्थायी वारंट
नारायण साहू के खिलाफ दो साल पहले स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था। इसके बावजूद वह फरार चल रहा है। ACB-EOW की जांच में सामने आया है कि वह कोयला सिंडिकेट के लिए कैश कलेक्शन की अहम कड़ी था। जांच एजेंसी के अनुसार, साहू ने करीब 13 करोड़ रुपये की अवैध नगदी इकट्ठा की थी। इसमें से लगभग 7.5 करोड़ रुपये अधिकारियों और नेताओं तक पहुंचाए गए। रकम की आवाजाही ड्राइवर नेटवर्क और निजी माध्यमों से की गई।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
“आर्थिक अपराध केवल व्यक्तिगत लाभ तक सीमित नहीं रहते। ऐसे मामलों का असर व्यापक होता है और यह देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाते हैं।” — छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
अब आगे क्या होगा
अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद नारायण साहू की गिरफ्तारी तय मानी जा रही है। ACB-EOW की टीमें उसकी तलाश में लगातार दबिश दे रही हैं। बिलासपुर और रायपुर के अलावा अन्य जिलों में भी संभावित ठिकानों पर नजर रखी जा रही है। कानूनी जानकारों के अनुसार, साहू की गिरफ्तारी के बाद घोटाले में कैश फ्लो और नेटवर्क को लेकर जांच और तेज होगी। इससे अन्य आरोपियों की मुश्किलें भी बढ़ सकती हैं।
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