नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष और तनाव के बीच भारत ने पहली बार ईरान के सर्वोच्च नेता (Supreme Leader) अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत पर आधिकारिक रूप से शोक व्यक्त किया है। गुरुवार को भारत सरकार की ओर से विदेश सचिव विक्रम मिसरी नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास पहुंचे और खामेनेई के निधन पर अपनी संवेदनाएं प्रकट कीं।
शोक पुस्तिका पर किए हस्ताक्षर
विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने ईरानी दूतावास में रखी ‘शोक पुस्तिका’ (Condolence Book) पर हस्ताक्षर किए और दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि दी। यह कदम ऐसे समय में आया है जब ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच युद्ध अपने छठे दिन में प्रवेश कर चुका है। भारत की इस पहल को कूटनीतिक हलकों में ईरान के साथ द्विपक्षीय संबंधों को संतुलित रखने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
जंग का छठा दिन: तनाव चरम पर
गौरतलब है कि पिछले शनिवार (28 फरवरी) को अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हवाई हमलों में खामेनेई के मारे जाने की पुष्टि हुई थी। इस हमले के बाद से ही पूरे खाड़ी क्षेत्र में युद्ध की स्थिति बनी हुई है। ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए इजराइल और अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागी हैं।
पीएम मोदी ने की शांति की अपील
एक तरफ जहां भारत ने खामेनेई की मौत पर शोक जताया है, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस संकट पर गहरी चिंता व्यक्त की है। फिनलैंड के राष्ट्रपति के साथ चर्चा के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि “सैन्य टकराव से किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता” और उन्होंने युद्ध को तत्काल समाप्त कर संवाद की राह अपनाने की अपील की।




