गरियाबंद (गंगा प्रकाश)। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के डोंगरी दौरे से पहले विकास कार्यों से ज्यादा चर्चा एक आमंत्रण पत्र की हो रही है। वजह भी दिलचस्प है। जिस गांव में करोड़ों रुपए के कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास होना है, उसी गांव के सरपंच का नाम न्योते से गायब है।
जिला प्रशासन द्वारा जारी आमंत्रण पत्र में मुख्यमंत्री से लेकर विधानसभा अध्यक्ष, मंत्री, सांसद और अन्य जनप्रतिनिधियों के नाम तो पूरे सम्मान के साथ दर्ज हैं, लेकिन ग्राम पंचायत डोंगरी के निर्वाचित सरपंच को शायद ‘स्पेशल इनविजिबल गेस्ट’ मान लिया गया। नतीजा यह कि गांव में अब विकास कार्यों से ज्यादा चर्चा इस बात की है कि आखिर सरपंच का नाम गया तो गया कहां ?

17 जून को डोंगरी में नवनिर्मित अमात गोंड भवन का लोकार्पण होना है। कार्यक्रम में प्रदेश के कई दिग्गज नेताओं की मौजूदगी प्रस्तावित है। लेकिन गांव वालों का सवाल सीधा है—भवन हमारे गांव में, कार्यक्रम हमारे गांव में, भीड़ भी हमारे गांव की और नाम… कहीं और के !
35 हजार रुपये की कथित अवैध वसूली के विरोध में आदिवासी किसान परिवार सहित आमरण अनशन पर
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत राज व्यवस्था में सरपंच गांव का पहला जनप्रतिनिधि होता है। ऐसे में न्योते से उनका नाम गायब होना सामान्य भूल है या फिर किसी की नाराजगी का परिणाम, इसे लेकर चौपाल से लेकर चाय दुकानों तक बहस जारी है।
कुछ ग्रामीण तो मजाक में यह भी कह रहे हैं कि शायद सरपंच का नाम अलग से वीआईपी सूची में होगा, जो अभी सार्वजनिक नहीं हुई है। वहीं कुछ लोग इसे प्रशासनिक चूक बता रहे हैं।

फिलहाल कार्यक्रम की तैयारियां जोरों पर हैं, लेकिन आमंत्रण पत्र ने एक ऐसा सवाल खड़ा कर दिया है जिसका जवाब लोग लोकार्पण से पहले जानना चाहते हैं—गांव का मुखिया आखिर न्योते में क्यों नहीं दिखा ?
सुशासन तिहार में बड़ा झटका: एक आदेश से 15 पंचायतों के हजारों ग्रामीणों की उम्मीदों पर पानी
चुटकी में चर्चा
न्योते में मुख्यमंत्री, मंत्री, सांसद, विधायक सब हैं… बस गांव का सरपंच खोजने पर भी नहीं मिल रहा। लगता है इस बार सबसे बड़ा उद्घाटन आमंत्रण पत्र का ही हो गया !





