रानी दुर्गावती शहादत दिवस से टकराव का हवाला, सरपंच संघ और आदिवासी परिषद ने उठाई मांग
छुरा (गंगा प्रकाश)। विकासखंड छुरा में 24 जून 2026 को प्रस्तावित ग्रामसभा की तिथि को लेकर सरपंच संघ विकासखंड छुरा एवं अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद ने आपत्ति जताई है। दोनों संगठनों ने जिला कलेक्टर गरियाबंद के नाम जनपद पंचायत छुरा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) को ज्ञापन सौंपकर ग्रामसभा की तिथि परिवर्तन की मांग की है।

ज्ञापन में बताया गया है कि 24 जून को आदिवासी समाज की वीरांगना रानी दुर्गावती शहादत दिवस पूरे देश में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया जाता है। इस अवसर पर छुरा क्षेत्र में भी जिला स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया जाना प्रस्तावित है, जिसमें आदिवासी समाज के जनप्रतिनिधि, सरपंच, पंच, समाज प्रमुख, अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल होते हैं।
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सरपंच संघ ने अपने ज्ञापन में कहा है कि उसी दिन जिले की सभी ग्राम पंचायतों में ग्रामसभा आयोजित होने से बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और ग्रामीण ग्रामसभा में शामिल नहीं हो पाएंगे। इससे ग्रामसभा की मूल भावना प्रभावित होगी तथा अपेक्षित जनभागीदारी सुनिश्चित नहीं हो सकेगी।

वहीं अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद ने भी प्रशासन का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा है कि पिछले कई वर्षों से 24 जून को जिला स्तरीय शहादत दिवस कार्यक्रम आयोजित किया जाता रहा है। इस आयोजन में जिलेभर से समाजजन शामिल होते हैं। ऐसी स्थिति में ग्रामसभा और सामाजिक कार्यक्रम एक ही दिन होने से लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ेगा तथा कई लोग शासकीय योजनाओं और ग्रामसभा की महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं से वंचित रह सकते हैं।
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दोनों संगठनों ने कलेक्टर से मांग की है कि जनभावनाओं एवं व्यापक जनहित को ध्यान में रखते हुए 24 जून को प्रस्तावित ग्रामसभा की तिथि में संशोधन कर किसी अन्य उपयुक्त दिन आयोजन कराया जाए। उनका कहना है कि इससे ग्रामसभा में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित हो सकेगी और समाज के लोग अपने ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम में भी शामिल हो पाएंगे।
सूत्रों के अनुसार ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि मांग पर विचार नहीं किया गया तो समाज एवं जनप्रतिनिधियों में असंतोष की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। फिलहाल प्रशासन की ओर से तिथि परिवर्तन को लेकर कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है, लेकिन ज्ञापन सौंपे जाने के बाद पंचायत एवं सामाजिक संगठनों के बीच इस विषय पर चर्चा तेज हो गई है।





