12 सितंबर से जिला अस्पताल में भर्ती, ग्लूकोज की बोतल लगी लेकिन उपचार व्यवस्था पर सवाल; खाना तक खाने की स्थिति में नहीं मरीज
गरियाबंद (गंगा प्रकाश)। जिला अस्पताल गरियाबंद में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अस्पताल में बीते कई दिनों से भर्ती एक अज्ञात मरीज की बदहाली सामने आने के बाद अस्पताल प्रबंधन की निगरानी और उपचार व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। मरीज बिस्तर पर बीमार हालत में पड़ा है और बताया जा रहा है कि वह ठीक से भोजन तक नहीं कर पा रहा है। ऐसे में उसकी नियमित देखभाल और उपचार को लेकर कई सवाल सामने आ रहे हैं।
मिली जानकारी के अनुसार उक्त मरीज को 12 सितंबर को 108 एंबुलेंस के माध्यम से अज्ञात मरीज के रूप में जिला अस्पताल गरियाबंद लाया गया था। इसके बाद से वह अस्पताल में भर्ती है। 18 सितंबर की रात मरीज अस्पताल के बिस्तर पर सोया हुआ मिला। मरीज की हालत देखकर यह सवाल उठ रहा है कि क्या उसकी नियमित स्वास्थ्य जांच और निगरानी की जा रही है।

हाथ में ग्लूकोज, लेकिन इलाज की व्यवस्था पर सवाल
मरीज के हाथ में ग्लूकोज की बोतल लगी हुई दिखाई दी, लेकिन मौके की स्थिति को लेकर सवाल उठे कि ग्लूकोज वास्तव में मरीज को दिया जा रहा था या नहीं। यदि ग्लूकोज लगाया गया था तो उसकी निगरानी कौन कर रहा था और मरीज की स्थिति की नियमित जांच किस स्तर पर की जा रही थी, यह स्पष्ट नहीं हो सका।
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एक गंभीर रूप से बीमार मरीज के लिए केवल बिस्तर और ग्लूकोज लगा देना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। उसकी चिकित्सकीय जांच, आवश्यक दवाइयां, भोजन, साफ-सफाई तथा समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण भी जरूरी है।

अज्ञात है तो क्या जिम्मेदारी भी खत्म?
अस्पताल प्रबंधन से जब मरीज के संबंध में जानकारी ली गई तो बताया गया कि मरीज अज्ञात है और उसकी पहचान के लिए पुलिस विभाग को सूचना दी गई है। लेकिन सवाल यह है कि जब तक मरीज की पहचान नहीं हो जाती, तब तक उसकी चिकित्सा और देखभाल की जिम्मेदारी किसकी है?
अज्ञात होने के बावजूद मरीज अस्पताल में भर्ती है और वह बीमारी की हालत में है। ऐसे में उसकी पहचान होने तक अस्पताल प्रबंधन द्वारा उसके उपचार और मानवीय देखभाल की पूरी व्यवस्था किया जाना आवश्यक है।
भोजन तक नहीं खा पा रहा मरीज
बताया जा रहा है कि मरीज की हालत ऐसी है कि वह ठीक से भोजन भी नहीं कर पा रहा है। वह अस्पताल के बिस्तर पर ही पड़ा हुआ है। ऐसी स्थिति में मरीज को समय पर भोजन, पानी और आवश्यक चिकित्सा सहायता मिल रही है या नहीं, यह भी जांच का विषय है।
मरीज के परिजन मौजूद नहीं होने के कारण उसकी जरूरतों पर ध्यान कौन दे रहा है, यह सवाल भी सामने आ रहा है। अस्पताल में भर्ती किसी भी मरीज की स्थिति पर स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा नियमित निगरानी की व्यवस्था होना जरूरी है।

अस्पताल परिसर की साफ-सफाई पर भी सवाल
इधर जिला अस्पताल परिसर में साफ-सफाई व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाना आवश्यक है। इसके बावजूद परिसर में गंदगी दिखाई देने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
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मरीज पहले से बीमारी से जूझते हैं। ऐसे में अस्पताल परिसर और वार्डों में पर्याप्त स्वच्छता नहीं होने पर संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए सफाई व्यवस्था की भी नियमित निगरानी किए जाने की जरूरत है।
वार्डों का निरीक्षण होता है तो यह स्थिति कैसे बनी?
मामले में सबसे बड़ा सवाल अस्पताल की निगरानी व्यवस्था को लेकर है। यदि अस्पताल के जिम्मेदार अधिकारी और चिकित्सक नियमित रूप से वार्डों का निरीक्षण करते हैं तो कई दिनों से भर्ती अज्ञात मरीज की स्थिति और उसकी आवश्यकताओं पर पर्याप्त ध्यान क्यों नहीं गया?
क्या वार्डों में भर्ती मरीजों की नियमित जांच की जा रही है? क्या अज्ञात मरीजों के लिए अलग से निगरानी व्यवस्था है? क्या मरीज को समय पर भोजन और दवाइयां उपलब्ध कराई जा रही हैं? इन सवालों का जवाब अस्पताल प्रबंधन से अपेक्षित है।
जांच के साथ मरीज की पहचान और उपचार की मांग
स्थानीय लोगों ने मामले की जांच कराने के साथ ही मरीज को समुचित उपचार और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। साथ ही मरीज की पहचान के लिए पुलिस और अस्पताल प्रशासन के बीच समन्वय बढ़ाने की जरूरत बताई गई है।
फिलहाल जिला अस्पताल में भर्ती इस अज्ञात मरीज की स्थिति ने इलाज, निगरानी, भोजन और साफ-सफाई जैसी मूलभूत व्यवस्थाओं को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह है कि अस्पताल प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मरीज की स्थिति की जांच करता है और उसकी समुचित देखभाल सुनिश्चित करता है या नहीं।





