एक महीने में मवेशियों पर चौथी घटना, चरवाहों में बढ़ी दहशत; निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल
बस्तर/मधोता (गंगा प्रकाश)। मधोता और आसपास के जंगलों में बाघ की लगातार बढ़ती गतिविधियों ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। शनिवार को मधोता जंगल में एक बार फिर बाघ ने पालतू गाय पर हमला कर दिया। चरवाहे और ग्रामीणों के शोर मचाने पर बाघ घायल गाय को छोड़कर जंगल की ओर चला गया। हमले में गाय की गर्दन पर गहरे घाव होने की जानकारी सामने आई है।
जानकारी के अनुसार, मधोता माटापारा निवासी हिमांशु शनिवार को अपने मवेशियों को चराने के लिए मधोता जंगल की ओर गया था। इसी दौरान झाड़ियों की ओर से हलचल और आवाज सुनाई दी। खतरे का अंदेशा होने पर हिमांशु लाठी लेकर उस दिशा में पहुंचा और शोर मचाने लगा। आवाज सुनकर आसपास मौजूद अन्य चरवाहे भी वहां पहुंच गए। ग्रामीणों के मुताबिक, लोगों की मौजूदगी और शोर के बीच बाघ घायल गाय को छोड़कर घने जंगल की ओर चला गया।

घंटों तक उपचार का इंतजार करती रही घायल गाय
बाघ के हमले के बाद गाय गंभीर रूप से घायल हो गई। ग्रामीणों के अनुसार उसकी गर्दन पर पंजों और दांतों के निशान दिखाई दे रहे हैं। घटना के कई घंटे बाद तक उसे पशु चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकी। ग्रामीणों ने अपने स्तर पर गाय की देखभाल और उपचार का प्रयास किया।
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ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में लगातार बाघ की मौजूदगी और मवेशियों पर हमले की घटनाएं सामने आने के बावजूद जंगल में निगरानी और ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम नजर नहीं आ रहे हैं। इससे जंगल में मवेशी चराने जाने वाले लोगों में भय बढ़ता जा रहा है।
एक महीने में मवेशियों पर हमले की चौथी घटना
ग्रामीणों के अनुसार, करीब एक माह पहले मुंडकटिया पारा के ऊपरी जंगल में बाघ के पगमार्क देखे गए थे। इसके बाद मधोता जंगल में एक बैल के शिकार की जानकारी सामने आई। करीब एक सप्ताह पहले इसी क्षेत्र में एक बछड़े को मारे जाने की बात भी ग्रामीणों ने बताई थी। अब गाय पर हमले की घटना सामने आने से ग्रामीणों का दावा है कि लगभग एक महीने के भीतर मवेशियों पर हमले की यह चौथी घटना है।
लगातार हो रही घटनाओं ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। खासकर सुबह और शाम के समय मवेशियों को चराने जंगल जाने वाले ग्रामीण अब अतिरिक्त सतर्कता बरत रहे हैं।

निगरानी बढ़ाने और उपचार की मांग
ग्रामीणों ने बस्तर वन परिक्षेत्र के अधिकारियों से घटना स्थल का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति की जांच करने, घायल गाय का उपचार कराने तथा बाघ की गतिविधियों पर नजर रखने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि जंगल में कैमरा ट्रैप, गश्त और अन्य सुरक्षा उपाय बढ़ाए जाने चाहिए, ताकि बाघ की मौजूदगी वाले क्षेत्र की पहचान कर लोगों को समय रहते सतर्क किया जा सके।
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ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि यदि बाघ की गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी नहीं बढ़ाई गई तो भविष्य में मवेशियों के साथ-साथ इंसानों के लिए भी खतरा पैदा हो सकता है। हालांकि, मानव पर हमले की कोई घटना सामने आने की जानकारी नहीं है। वन विभाग की जांच और निगरानी के बाद ही बाघ की गतिविधियों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।





