गंगा प्रकाश में खबर प्रकाशित होने के बाद प्राथमिक परीक्षा स्थगित, डीईओ बोले—जांच कर लापरवाह कर्मचारी पर होगी कार्रवाई
छुरा (गंगा प्रकाश)। गरियाबंद जिले के प्राथमिक विद्यालयों में कक्षा पहली से पांचवीं तक की तिमाही परीक्षा के हिंदी विषय के प्रश्नपत्र सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के मामले के बाद अब कक्षा छठवीं से आठवीं तक के हिंदी विषय के प्रश्नपत्र के वायरल होने का मामला सामने आया है। प्राथमिक कक्षाओं के प्रश्नपत्र वायरल होने की खबर गंगा प्रकाश में प्रकाशित होने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी राजेश चन्द्राकार ने हिंदी विषय की परीक्षा आगामी तिथि घोषित होने तक स्थगित करने का आदेश जारी किया है।
इसी बीच शनिवार 19 सितंबर की रात कक्षा छठवीं, सातवीं और आठवीं के हिंदी विषय के प्रश्नपत्र भी सोशल मीडिया पर प्रसारित होने की जानकारी सामने आई। इन कक्षाओं की तिमाही परीक्षा 21 सितंबर से शुरू होना प्रस्तावित है और पहले दिन हिंदी विषय का प्रश्नपत्र होना बताया जा रहा है। लगातार दो स्तरों के प्रश्नपत्र सोशल मीडिया तक पहुंचने से शिक्षा विभाग की प्रश्नपत्र तैयार करने, प्रिंटिंग और वितरण व्यवस्था की गोपनीयता पर सवाल उठने लगे हैं।

प्राथमिक कक्षाओं के प्रश्नपत्र सुबह वायरल
मामला उस समय सामने आया जब शनिवार 19 सितंबर की सुबह करीब 10 बजे कक्षा पहली से पांचवीं तक हिंदी विषय के प्रश्नपत्रों की पीडीएफ फाइल सोशल मीडिया पर प्रसारित होने लगी। दावा किया गया कि ये वही प्रश्नपत्र हैं, जो 21 सितंबर को होने वाली तिमाही परीक्षा में विद्यार्थियों को वितरित किए जाने थे।
👉 जरूर पढ़ें: नाम मतदाताओं के… कार्ड किसने छाप दिए? डुप्लीकेट वोटर आईडी ने खड़े किए कई सवाल
हालांकि वायरल पीडीएफ वास्तव में आगामी परीक्षा के आधिकारिक प्रश्नपत्र हैं या नहीं, इसकी स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि विभाग की ओर से नहीं की गई थी। इसके बावजूद प्रश्नपत्रों के सोशल मीडिया तक पहुंचने की सूचना के बाद परीक्षा की गोपनीयता को लेकर सवाल खड़े हुए।
खबर के बाद परीक्षा स्थगित
प्रश्नपत्र वायरल होने की खबर गंगा प्रकाश में प्रकाशित होने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी राजेश चन्द्राकार ने प्राथमिक कक्षाओं के हिंदी विषय की परीक्षा को आगामी तिथि घोषित होने तक स्थगित करने का आदेश जारी किया। इससे मामले की गंभीरता को लेकर विभागीय स्तर पर उठाए गए कदम भी सामने आए हैं।
इसके बाद शनिवार रात मिडिल स्कूल की कक्षाओं के हिंदी विषय के प्रश्नपत्र वायरल होने की जानकारी ने विभाग के सामने एक और चुनौती खड़ी कर दी है।

जांच दल करेगा पड़ताल
मामले में जिला शिक्षा अधिकारी राजेश चन्द्राकार ने जिला स्तरीय जांच दल गठित कर पूरे प्रकरण की जांच कराने की बात कही है। उन्होंने फोन पर बताया कि यदि प्रश्नपत्र विभागीय व्यवस्था से लापरवाही के कारण बाहर आया है तो जिम्मेदार कर्मचारी के विरुद्ध निलंबन जैसी कार्रवाई की जाएगी।
‘सामान्य टेस्ट’ बताने पर उठे सवाल
विभागीय स्तर पर यह भी कहा गया कि प्रश्नपत्र को सामान्य टेस्ट के रूप में लिया जा रहा था और इसके वायरल होने को प्रारंभिक तौर पर गंभीर विषय नहीं माना गया। हालांकि गंगा प्रकाश में खबर प्रकाशित होने के बाद परीक्षा स्थगित करने का निर्णय लिया गया।
👉 जरूर पढ़ें : महिला समूह की राशन दुकान में आखिर कौन चला रहा था कारोबार? जांच में सामने आया ऐसा नाम कि SDM ने थमा दिया नोटिस
विभाग के इस स्पष्टीकरण के बाद सवाल यह है कि यदि प्रश्नपत्र केवल सामान्य टेस्ट के लिए तैयार अथवा उपलब्ध कराए गए थे, तो कक्षा पहली से पांचवीं तक के हिंदी विषय के प्रश्नपत्र परीक्षा से दो दिन पहले सोशल मीडिया तक किस माध्यम से पहुंचे? साथ ही यह भी जांच का विषय है कि वायरल प्रश्नपत्र और 21 सितंबर को विद्यार्थियों को दिए जाने वाले प्रश्नपत्र एक ही थे अथवा नहीं।
गोपनीयता की प्रक्रिया पर उठे सवाल
प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर विद्यार्थियों तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया की जांच अब महत्वपूर्ण हो गई है। प्रश्नपत्र तैयार करने, डिजिटल फाइल उपलब्ध कराने, प्रिंटिंग, संकुल स्तर पर वितरण तथा विद्यालयों तक पहुंचाने की प्रक्रिया में किन-किन स्तरों पर प्रश्नपत्र की प्रति उपलब्ध थी, इसकी पड़ताल आवश्यक है।
यदि जांच में वायरल दस्तावेज और आगामी परीक्षा में उपयोग किए जाने वाले प्रश्नपत्र एक ही पाए जाते हैं, तो प्रश्नपत्र की गोपनीयता भंग होने के लिए जिम्मेदारी तय करना विभाग के सामने अहम मुद्दा होगा।
दुल्ला संकुल स्तर से वायरल होने की चर्चा
प्रश्नपत्र वायरल होने के बाद चर्चा है कि छुरा ब्लॉक के दुल्ला संकुल स्तर से प्रश्नपत्र प्रिंटिंग अथवा अन्य प्रक्रिया के लिए उपलब्ध कराया गया होगा और वहीं से इसकी डिजिटल प्रति सोशल मीडिया तक पहुंची। हालांकि अभी तक शिक्षा विभाग ने किसी व्यक्ति अथवा किसी विशेष स्तर को इस मामले के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया है।
ऐसे में दुल्ला संकुल से प्रश्नपत्र वायरल होने की चर्चा की भी जांच आवश्यक होगी। वास्तविक स्थिति जिला स्तरीय जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
अब जांच पर टिकी नजर
एक ही परीक्षा से जुड़े प्राथमिक और मिडिल स्तर के प्रश्नपत्र सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद शिक्षा विभाग की प्रश्नपत्र गोपनीयता और वितरण व्यवस्था की जांच महत्वपूर्ण हो गई है। परीक्षा स्थगित करने के निर्णय के बाद अब यह देखना होगा कि जांच में प्रश्नपत्र बाहर आने का स्रोत क्या सामने आता है और जिम्मेदारी किस स्तर पर तय की जाती है।





