कमार विकास प्राधिकरण के खर्च पर उठे सवाल, राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कलेक्टर से मांगी जांच; पुराने कामों और भुगतान की पड़ताल की मांग
गरियाबंद (गंगा प्रकाश)। कमार जनजाति के विकास के लिए वर्षों से जारी विकास राशि आखिर कहां और कैसे खर्च हुई? जिन योजनाओं के जरिए कमार समाज की तस्वीर बदलने का दावा किया जाता रहा, उनका वास्तविक लाभ जमीन पर कितना पहुंचा? अब यही सवाल कमार विकास प्राधिकरण की कार्यशैली को लेकर उठने लगे हैं।
राष्ट्रीय विशेष पिछड़ी जनजाति कमार समाज भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनसिंग सोरी ने कलेक्टर गरियाबंद को आवेदन सौंपकर कमार विकास प्राधिकरण की विकास राशि के कथित बंदरबांट और पूर्व में किए गए खर्च की जांच की मांग की है। आवेदन के बाद प्राधिकरण के माध्यम से स्वीकृत कार्यों, खर्च की गई राशि और वास्तविक लाभार्थियों तक योजनाओं की पहुंच को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

विकास के नाम पर खर्च, लेकिन जमीन पर तस्वीर अलग?
समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने आरोप लगाया है कि कमार समुदाय के विकास के लिए शासन से मिलने वाली राशि का अपेक्षित उपयोग वास्तविक जरूरतमंदों के हित में नहीं हो रहा है। उनका कहना है कि कई बार ऐसी योजनाओं में राशि खर्च होने की शिकायतें सामने आती हैं, जिनसे समुदाय को प्रत्यक्ष एवं दीर्घकालिक लाभ नहीं मिल पाता।
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उन्होंने मांग की है कि पूर्व में स्वीकृत सभी प्रमुख कार्यों की फाइलों, स्वीकृति आदेशों, भुगतान विवरण और कार्य पूर्णता से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जाए। साथ ही जरूरत पड़ने पर मौके पर भौतिक सत्यापन कर यह देखा जाए कि कागजों में दर्ज कार्य वास्तव में जमीन पर हुए हैं या नहीं।
कमार-भुंजिया परिवार आज भी बुनियादी सुविधाओं से जूझ रहे
गरियाबंद जिले के दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों में कमार एवं भुंजिया समुदाय के अनेक परिवार निवास करते हैं। समाज का कहना है कि शिक्षा, रोजगार, आवास, पेयजल, सड़क और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं आज भी कई क्षेत्रों में बनी हुई हैं।
ऐसे में सवाल यह भी है कि वर्षों से जनजातीय विकास के लिए जारी राशि का कितना हिस्सा वास्तविक जरूरतों पर खर्च हुआ और उसका परिणाम क्या रहा? इन्हीं बिंदुओं पर अब जांच की मांग की गई है।

1982 से अस्तित्व में है कमार विकास प्राधिकरण
कमार जनजाति के समुचित विकास के उद्देश्य से वर्ष 1982 में गरियाबंद में कमार विकास प्राधिकरण का गठन किया गया था। प्राधिकरण के गठन का उद्देश्य कमार समुदाय की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति में सुधार के लिए योजनाएं तैयार करना और उनका प्रभावी क्रियान्वयन करना था।
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चार दशक से अधिक समय बीतने के बाद भी यदि समाज के लोगों को विकास की योजनाओं और मूलभूत सुविधाओं के लिए शिकायतें करनी पड़ रही हैं, तो स्वाभाविक रूप से प्राधिकरण के अब तक के कामकाज और खर्च की समीक्षा का सवाल सामने आता है।
जांच के बाद सामने आएगी असली तस्वीर
राष्ट्रीय अध्यक्ष बनसिंग सोरी ने कलेक्टर से मांग की है कि कमार विकास प्राधिकरण की पूर्व एवं वर्तमान योजनाओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए। स्वीकृत राशि, कार्यों की लागत, भुगतान, कार्य की गुणवत्ता और वास्तविक हितग्राहियों को मिले लाभ की पड़ताल की जाए। यदि जांच में अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
अब निगाह जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर है। क्या वर्षों से खर्च होती आ रही विकास राशि का हिसाब खुलेगा? क्या पुराने कार्यों की जमीनी हकीकत सामने आएगी? या फिर यह शिकायत भी जांच की फाइलों तक ही सीमित रह जाएगी? इसका जवाब प्रशासनिक जांच के बाद ही सामने आएगा।




