पंचायत सचिव के बार-बार तबादले पर कोर्ट ने लगाई थी अंतरिम रोक, 3 सितंबर को जनपद पंचायत छुरा ने जारी किया नया पत्र; अब 23 सितंबर की सुनवाई पर टिकी निगाहें
छुरा (गंगा प्रकाश)। पंचायत सचिव के स्थानांतरण को लेकर गरियाबंद जिले में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश और उसके बाद जारी विभागीय पत्र ने पूरे घटनाक्रम को सवालों के घेरे में ला दिया है। एक तरफ छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पंचायत सचिव ईशाई राम ध्रुव के 7 अगस्त 2026 के स्थानांतरण आदेश के प्रभाव एवं क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक रोक लगा रखी है, वहीं दूसरी ओर जनपद पंचायत छुरा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी कार्यालय से 3 सितंबर 2026 को प्रभार अंतरण को लेकर पत्र जारी किया गया है। पत्र में संबंधित सचिवों को दो दिवस के भीतर ग्राम पंचायत का संपूर्ण प्रभार सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट बिलासपुर में WPS No. 6258/2026, ईशाई राम ध्रुव विरुद्ध छत्तीसगढ़ राज्य से जुड़ा है। हाईकोर्ट के 20 अगस्त 2026 के आदेश में दर्ज विवरण के अनुसार याचिकाकर्ता पंचायत सचिव के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें ग्राम पंचायत करचाली से ग्राम पंचायत पीपरहट्टा स्थानांतरित किया गया था। स्थानांतरण आदेश दिनांक 22 जून 2026 के बाद उन्होंने 22 जुलाई 2026 को पीपरहट्टा में कार्यभार ग्रहण किया था।
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लेकिन इसके कुछ ही समय बाद 7 अगस्त 2026 को उन्हें पुनः ग्राम पंचायत कुम्हडेईकला, जनपद पंचायत देवभोग स्थानांतरित कर दिया गया। हाईकोर्ट के आदेश में दर्ज है कि यह स्थानांतरण पिछले स्थानांतरण के कुछ ही समय बाद हुआ और नई पदस्थापना लगभग 170 किलोमीटर दूर बताई गई। याचिकाकर्ता की ओर से न्यायालय में यह तर्क रखा गया कि नए स्थानांतरण आदेश में किसी प्रशासनिक आवश्यकता या असाधारण परिस्थिति का उल्लेख नहीं किया गया है और स्थानांतरण नीति 2025 के अनुपालन को भी स्पष्ट नहीं किया गया।

कोर्ट में उठी बार-बार तबादले की बात
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने हाईकोर्ट के समक्ष दलील दी कि कम समय के अंतराल में बार-बार स्थानांतरण किया जाना उचित नहीं है और इसी आधार पर 7 अगस्त के आदेश के प्रभाव एवं क्रियान्वयन पर रोक लगाने की मांग की गई।
वहीं राज्य की ओर से उपस्थित शासकीय अधिवक्ता ने न्यायालय को बताया कि विवादित स्थानांतरण आदेश प्रतिवादी क्रमांक 3 यानी मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत गरियाबंद द्वारा जारी किया गया है तथा उक्त आदेश जारी करने में राज्य की कोई भूमिका नहीं है। इसके बाद न्यायालय ने नोटिस जारी किया और राज्य को जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
मामले की सुनवाई के बाद न्यायालय ने याचिकाकर्ता की प्रथम दृष्टया दलील पर विचार किया। आदेश में कहा गया कि याचिकाकर्ता का कम समय के अंतराल में बार-बार स्थानांतरण किए जाने की बात प्रथम दृष्टया सामने आई है।
इसके बाद न्यायालय ने दिनांक 07.08.2026 के विवादित स्थानांतरण आदेश के प्रभाव एवं क्रियान्वयन को याचिकाकर्ता के संबंध में अगली सुनवाई तक स्थगित रखने का आदेश दिया। मामले को आगे की सुनवाई के लिए 23 सितंबर 2026 को सूचीबद्ध किया गया है।

इधर 3 सितंबर का पत्र बना चर्चा का विषय
हाईकोर्ट के इस अंतरिम आदेश के बाद अब जनपद पंचायत छुरा कार्यालय से 3 सितंबर 2026 को जारी पत्र सामने आया है। पत्र का विषय “प्रभार अंतरण करने के संबंध में” है। इसमें जिला पंचायत गरियाबंद के पूर्व में जारी आदेशों का संदर्भ देते हुए संबंधित पंचायत सचिवों को ग्राम पंचायत का प्रभार सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
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पत्र में उल्लेख है कि संबंधित आदेशों के अनुसार पंचायत सचिवों की पदस्थापना की गई थी। पत्र में यह भी कहा गया है कि आदेश जारी होने के बाद भी संबंधित ग्राम पंचायत का संपूर्ण प्रभार आदेशित सचिवों को नहीं सौंपा गया है और न ही उनके द्वारा प्रभार ग्रहण किया गया है।
इसके बाद जनपद पंचायत छुरा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने संबंधितों को निर्देशित किया है कि दो दिवस के भीतर ग्राम पंचायत का संपूर्ण प्रभार अंतरण कर प्रभार सूची के साथ जनपद कार्यालय में प्रस्तुत करें।
निर्देश नहीं माना तो अनुशासनात्मक कार्रवाई का संकेत
पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित समयावधि में प्रभार अंतरण नहीं करने की स्थिति में उच्च कार्यालय के आदेश/निर्देश की अवहेलना किए जाने के संबंध में अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए प्रस्ताव उच्च कार्यालय को भेजा जाएगा। यानी विभाग ने प्रभार अंतरण को लेकर संबंधित सचिवों को समयबद्ध निर्देश दिया है।
पत्र की प्रतिलिपि कलेक्टर गरियाबंद, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत गरियाबंद तथा संबंधित पंचायत सचिव को भी भेजे जाने का उल्लेख है।
अब सबसे बड़ा सवाल—अगली सुनवाई तक क्या होगा?
पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि हाईकोर्ट के आदेश में 7 अगस्त 2026 के स्थानांतरण आदेश के प्रभाव एवं क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक रोक दर्ज है, जबकि 3 सितंबर को जनपद पंचायत छुरा की ओर से प्रभार अंतरण को लेकर निर्देश जारी किए गए हैं। उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर यह स्पष्ट है कि दोनों आदेश अलग-अलग स्तरों पर जारी हुए हैं, लेकिन इनके आपसी प्रभाव और अनुपालन की कानूनी स्थिति का अंतिम निर्धारण न्यायालय द्वारा ही किया जाना है।
हाईकोर्ट ने फिलहाल मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर 2026 को तय की है। ऐसे में अब नजर इस बात पर रहेगी कि संबंधित पक्ष न्यायालय के समक्ष क्या जवाब प्रस्तुत करते हैं और आगे अदालत इस स्थानांतरण विवाद में क्या आदेश पारित करती है।




