वन विभाग में तबादला आदेश के क्रियान्वयन पर सख्ती, स्थानांतरित अफसरों को तत्काल नई पदस्थापना पर भेजने के निर्देश; समय-सीमा में पालन नहीं हुआ तो कार्रवाई के संकेत
रायपुर/गरियाबंद (गंगा प्रकाश)। छत्तीसगढ़ वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग में सहायक वन संरक्षक स्तर के अधिकारियों की बड़े पैमाने पर पदस्थापना बदलने के बाद अब इसके क्रियान्वयन को लेकर विभागीय सख्ती सामने आई है। 2 सितंबर 2026 को जारी शासनादेश में 64 अधिकारियों की नवीन पदस्थापना की गई थी। आदेश के बाद भी यदि कहीं स्थानांतरित अधिकारी पुरानी पदस्थापना पर बने हुए हैं या उन्हें भारमुक्त नहीं किया गया है, तो अब विभाग ने इसकी स्थिति स्पष्ट करने की प्रक्रिया तेज कर दी है।
मंत्रालय, महानदी भवन, नवा रायपुर अटल नगर से जारी मूल आदेश में प्रशासनिक दृष्टिकोण से संबंधित अधिकारियों को उनके नाम के सामने दर्शाए गए नवीन पदस्थापना पद पर अस्थायी रूप से आगामी आदेश तक पदस्थ किए जाने का उल्लेख है।
64 अधिकारियों की बदली गई पदस्थापना
वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा जारी आदेश में प्रदेश के विभिन्न वनमंडलों, जिला यूनियनों, परियोजना मंडलों, टाइगर रिजर्व, अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थानों सहित कई कार्यालयों में पदस्थ अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया गया है। आदेश में प्रत्येक अधिकारी की वर्तमान पदस्थापना और नवीन पदस्थापना अलग-अलग दर्ज की गई है।

तीन दिन में भारमुक्ति और रिपोर्ट का निर्देश
तबादले के बावजूद अधिकारियों को भारमुक्त नहीं किए जाने की शिकायतों के बाद अब संबंधित स्थानांतरित अधिकारियों को तीन दिन के भीतर भारमुक्त कर नई पदस्थापना पर भेजने तथा इसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। विभागीय स्तर पर जारी निर्देश में समय-सीमा का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।
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इससे उन कार्यालयों में हलचल बढ़ गई है, जहां स्थानांतरण आदेश जारी होने के बावजूद अधिकारियों के पुराने पद पर बने रहने की स्थिति बताई जा रही है।
पुरानी कुर्सी पर टिके रहने का रास्ता होगा बंद?
शासन के आदेश में नवीन पदस्थापना स्पष्ट रूप से निर्धारित होने के बाद अब संबंधित अधिकारियों को नई जिम्मेदारी संभालनी है। ऐसे में भारमुक्ति की कार्रवाई में देरी होने पर जिम्मेदारी तय होने की स्थिति बन सकती है।
निर्देश में निर्धारित समय-सीमा में आदेश का पालन नहीं करने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की बात भी कही गई है। यही वजह है कि अब विभागीय स्तर पर तीन दिन के भीतर प्रस्तुत की जाने वाली रिपोर्ट महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

गरियाबंद में भी बदली कई जिम्मेदारियां
इस आदेश का असर गरियाबंद वनमंडल पर भी पड़ा है। आदेश में देवभोग और राजिम सहित गरियाबंद वनमंडल से जुड़े पदों पर नवीन पदस्थापनाएं की गई हैं। जिला यूनियन गरियाबंद से जुड़े पद पर भी बदलाव किया गया है।
वहीं गरियाबंद वनमंडल में संलग्नाधिकारी के रूप में भी नवीन पदस्थापना का उल्लेख आदेश में किया गया है।
आदेश में दर्ज है तारीख, क्रमांक और अधिकारी का नाम
इस पूरे मामले का मूल आधार छत्तीसगढ़ शासन, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, मंत्रालय, महानदी भवन, नवा रायपुर अटल नगर से जारी शासनादेश है।
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- आदेश दिनांक: 02 सितंबर 2026
- आदेश क्रमांक: ESTB-102(2)/365/2026-FOREST
- दस्तावेज क्रमांक: I/612754/2026
- आदेश जारीकर्ता: जे. पी. पाठक, विशेष सचिव, छत्तीसगढ़ शासन, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग
आदेश के अंत में स्पष्ट रूप से छत्तीसगढ़ के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार अंकित है।
अब रिपोर्ट बताएगी कितने अफसर हुए भारमुक्त
64 अधिकारियों की पदस्थापना बदलने के बाद अब विभागीय स्तर पर सबसे महत्वपूर्ण कड़ी भारमुक्ति और नई पदस्थापना पर कार्यभार ग्रहण करने की रिपोर्ट होगी। तीन दिन की समय-सीमा में आने वाली रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि शासन के आदेश का पालन किस स्तर तक हुआ है और किन अधिकारियों को पुरानी पदस्थापना से कार्यमुक्त किया गया।
फिलहाल सवाल यही है—तबादला आदेश जारी होने के बाद भी अगर कहीं पुरानी कुर्सी नहीं छोड़ी गई, तो तीन दिन की रिपोर्ट के बाद विभाग किस पर कार्रवाई करता है?





