10.38 लाख के स्टॉक अंतर से मचा हड़कंप, समायोजन के बाद भी करीब 5 लाख का अंतर बरकरार होने का दावा; वार्षिक आमसभा में हंगामा, दो घंटे में बैठक स्थगित
गरियाबंद/देवभोग (गंगा प्रकाश)। जिले की झाखरपारा सहकारी समिति एक बार फिर कथित वित्तीय एवं स्टॉक अनियमितताओं को लेकर सवालों के घेरे में है। पिछले धान खरीदी सीजन में करीब 57 लाख रुपये के धान शॉर्टेज को लेकर चर्चा में रही समिति में अब खाद वितरण के रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक के बीच अंतर सामने आने का दावा किया जा रहा है। 2 सितंबर को खाद गोदाम के स्टॉक वेरिफिकेशन के दौरान करीब 10.38 लाख रुपये की खाद का अंतर सामने आने की बात कही जा रही है। समिति प्रबंधन के अनुसार समायोजन प्रक्रिया के बाद भी करीब 5 लाख रुपये का अंतर शेष बताया जा रहा है।
मामला सामने आने के बाद खाद-बीज वितरण प्रभारी अभय नागेश को समिति प्रबंधक नयन सिंह ठाकुर की ओर से कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने तथा उच्च अधिकारियों को इसकी जानकारी दिए जाने की बात सामने आई है। अब सवाल यह है कि खाद की वास्तविक कमी कहां हुई और रिकॉर्ड में दर्ज मात्रा तथा भौतिक स्टॉक के बीच अंतर की जिम्मेदारी आखिर किसकी तय होगी?

2 सितंबर के सत्यापन में खुला स्टॉक का अंतर
जानकारी के अनुसार सहकारिता विभाग के सुपरवाइजर ने 2 सितंबर को समिति के खाद गोदाम का स्टॉक वेरिफिकेशन किया। इस दौरान आबंटित खाद, वितरण संबंधी रिकॉर्ड और गोदाम में उपलब्ध वास्तविक स्टॉक के मिलान में करीब 10.38 लाख रुपये का अंतर सामने आने का दावा किया गया।
बताया गया कि आबंटित खाद की पूरी मात्रा न तो वितरण रिकॉर्ड में दिखाई दे रही थी और न ही गोदाम में उपलब्ध मिली। इसके बाद समिति प्रबंधन ने खाद-बीज वितरण प्रभारी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा।
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खाद वितरण प्रक्रिया समाप्त होने के बाद 30 सितंबर तक अंतिम समायोजन रिपोर्ट प्रस्तुत किया जाना था। समिति प्रबंधन के मुताबिक रिकॉर्ड के समायोजन के बाद भी करीब 5 लाख रुपये की खाद का अंतर सामने आने की बात कही जा रही है। हालांकि अंतिम रूप से वास्तविक कमी कितनी है, यह संबंधित रिकॉर्ड और दस्तावेजों के अंतिम सत्यापन के बाद ही स्पष्ट होगा।

गोदाम बंद रहने और जांच में सहयोग नहीं करने के आरोप
मामले में स्थानीय स्तर पर यह आरोप भी सामने आया है कि 2 सितंबर से 30 सितंबर के बीच खाद गोदाम लंबे समय तक बंद रहा। वहीं खाद वितरण प्रभारी द्वारा जांच प्रक्रिया में अपेक्षित सहयोग नहीं किए जाने और निरीक्षण के लिए बुलाए जाने पर उपस्थित नहीं होने की बातें भी कही जा रही हैं।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में किसानों और समिति से जुड़े लोगों की मांग है कि खाद के आबंटन, उठाव, वितरण, बिक्री रजिस्टर, स्टॉक रजिस्टर और संबंधित दस्तावेजों का स्वतंत्र रूप से मिलान कराया जाए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
धान खरीदी में भी सामने आ चुका है करीब 57 लाख का शॉर्टेज
झाखरपारा समिति में स्टॉक को लेकर सवाल पहली बार नहीं उठे हैं। पिछले धान खरीदी सत्र में शुरुआती जांच के दौरान करीब 2400 क्विंटल धान, जिसकी कीमत लगभग 57 लाख रुपये बताई गई थी, के शॉर्टेज का मामला सामने आया था।
बताया गया था कि रिकॉर्ड में दर्ज धान की मात्रा और मौके पर संग्रहण केंद्र में उपलब्ध धान में अंतर मिला था। मामले में तत्कालीन खरीदी प्रभारी चंदन राजपुर पर करीब 20 लाख रुपये के धान से संबंधित कथित गड़बड़ी को लेकर कार्रवाई की बात सामने आई थी। अन्य जिम्मेदारों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठे थे।
इस मामले में जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष सुखचंद बेसरा की ओर से भी निष्पक्ष जांच की मांग किए जाने की बात सामने आई थी।
पूर्व कार्रवाई झेल चुके कर्मचारी को जिम्मेदारी देने पर सवाल
झाखरपारा समिति के प्रभारी प्रबंधक की जिम्मेदारी को लेकर भी विवाद सामने आया है। स्थानीय लोगों के अनुसार करीब दो वर्ष पहले दीवानमुड़ा धान खरीदी केंद्र में तत्कालीन प्रभारी प्रबंधक नीलांबर बीसी का किसानों से कथित रिश्वत लेने का वीडियो सामने आया था।
इसके बाद सहकारिता विभाग की जांच में आरोप सही पाए जाने तथा खरीदी केंद्र में अनियमितता मिलने की बात कही गई थी। मामले में निलंबन के बाद सेवा से बर्खास्त किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
अब सवाल यह उठ रहा है कि पूर्व में कार्रवाई का सामना कर चुके कर्मचारी को झाखरपारा समिति में प्रभारी प्रबंधक की जिम्मेदारी किस आधार पर दी गई? स्थानीय किसानों का आरोप है कि पिछले खरीदी सीजन में उन्हें बिना स्पष्ट लिखित नियुक्ति आदेश के समिति की जिम्मेदारी दी गई थी और बाद में प्रभारी के संबंध में लिखित आदेश जारी किया गया।
वार्षिक आमसभा में हंगामा, दो घंटे में बैठक स्थगित
30 सितंबर को झाखरपारा सहकारी समिति के पदाधिकारियों और शेयरधारकों की वार्षिक आमसभा आयोजित की गई। बैठक में प्रभारी प्रबंधक की नियुक्ति के साथ समिति में सामने आ रही कथित अनियमितताओं का मुद्दा भी उठाया गया।
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किसानों और किसान प्रतिनिधियों ने समिति के कामकाज में पारदर्शिता तथा कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच की मांग रखी। इसी दौरान विवाद और हंगामे की स्थिति बनने के बाद करीब दो घंटे के भीतर ही बैठक स्थगित किए जाने की बात सामने आई है।
प्रबंधक बोले- कमी मिली है, रिकॉर्ड का होगा मिलान
झाखरपारा समिति के प्रबंधक नयन सिंह ठाकुर, जिला सहकारी बैंक देवभोग ने कहा कि खाद में कमी पाई गई है और इसकी जानकारी उच्च अधिकारियों को दी गई है। उन्होंने बताया कि समायोजन से संबंधित रिकॉर्ड का मिलान किया जाएगा। इसके बाद जो स्थिति सामने आएगी, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अब सबसे बड़ा सवाल…
धान के बाद खाद के स्टॉक में भी अंतर सामने आने के दावे ने झाखरपारा सहकारी समिति की कार्यप्रणाली पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या 10.38 लाख रुपये का प्रारंभिक अंतर वास्तव में करीब 5 लाख रुपये पर सिमटता है, या अंतिम जांच में आंकड़ा कुछ और सामने आएगा? खाद का वास्तविक स्टॉक कहां गया और रिकॉर्ड में अंतर की जिम्मेदारी किसकी होगी?
इन सवालों का जवाब अब स्टॉक रजिस्टर, वितरण रिकॉर्ड, उठाव दस्तावेज और अंतिम समायोजन रिपोर्ट के निष्पक्ष मिलान से ही सामने आएगा।





