टू-लेन सड़क बनने के बाद बढ़ी वाहनों की रफ्तार, अंधे मोड़ पर अनियंत्रित होकर पेड़, बड़े पत्थरों और भवनों से टकरा रहे वाहन; सुरक्षा इंतजामों की कमी पर उठे सवाल
छुरा (गंगा प्रकाश)। आस्था के प्रमुख केंद्र जतमाई मंदिर तक पहुंचने वाला मार्ग अब लोगों के लिए चिंता का कारण बनता जा रहा है। छुरा से जतमाई मंदिर जाने वाले रास्ते पर मंदिर से पहले स्थित एक अंधा मोड़ लगातार हादसों को लेकर चर्चा में है। स्थानीय लोगों के मुताबिक पिछले एक महीने के भीतर इस मोड़ पर हुए हादसों में पांच लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 50 से अधिक लोग घायल हुए हैं। इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है, लेकिन लगातार दुर्घटनाओं की खबरों ने क्षेत्रवासियों की चिंता बढ़ा दी है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि टू-लेन सड़क बनने के बाद इस मार्ग पर वाहनों की रफ्तार बढ़ी है। ऐसे में अंधे मोड़ पर सामने की स्थिति का अंदाजा नहीं लग पाने से वाहन चालक अचानक नियंत्रण खो बैठते हैं। कई वाहन सड़क से नीचे उतरकर किनारे लगे पेड़ों, बड़े-बड़े पत्थरों और आसपास स्थित भवनों से टकरा जाते हैं। हादसों की गंभीरता को देखते हुए यह मोड़ अब सड़क सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बनता नजर आ रहा है।
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क्षेत्रवासियों के अनुसार दुर्घटना संभावित इस स्थान पर वाहन चालकों को पहले से सतर्क करने वाले पर्याप्त चेतावनी संकेतक, रिफ्लेक्टर और गति नियंत्रण के प्रभावी इंतजाम नजर नहीं आते। उनका कहना है कि मंदिर मार्ग पर श्रद्धालुओं, पर्यटकों और स्थानीय लोगों की आवाजाही को देखते हुए सुरक्षा उपायों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

लोगों ने लोक निर्माण विभाग और प्रशासन से अंधे मोड़ का तत्काल तकनीकी निरीक्षण कराने, उचित चेतावनी बोर्ड, रोड मार्किंग, रिफ्लेक्टर, सुरक्षित किनारे तथा जरूरत के मुताबिक मानकों के अनुरूप गति नियंत्रण व्यवस्था लागू करने की मांग की है। साथ ही दुर्घटनाओं के वास्तविक आंकड़ों का संकलन कर स्थायी समाधान निकालने की अपील की है।
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सड़क निर्माण का उद्देश्य आवागमन को आसान बनाना है, लेकिन यदि सुरक्षा इंतजाम पीछे छूट जाएं तो यही सुविधा जोखिम में बदल सकती है। अब सवाल यह है कि जतमाई मंदिर मार्ग के इस खतरनाक मोड़ पर जिम्मेदार विभाग कब ठोस कदम उठाएगा? क्या हादसों पर अंकुश लगाने के लिए किसी और बड़ी दुर्घटना का इंतजार किया जाएगा?





