देवभोग से रायपुर तक करीब 240 किलोमीटर की भागदौड़ से परेशान जिलेवासी, भाजपा जिला कोषाध्यक्ष अजय रोहरा ने राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा को सौंपा ज्ञापन, जिला मुख्यालय में कार्यालय शुरू करने की मांग तेज
गरियाबंद (गंगा प्रकाश)। जिला गठन के लगभग 14 वर्ष बीत जाने के बाद भी गरियाबंद जिले के नागरिकों को नगर एवं ग्राम निवेश से जुड़े जरूरी कार्यों के लिए राजधानी रायपुर का चक्कर लगाना पड़ रहा है। जिला मुख्यालय में अब तक नगर एवं ग्राम निवेश कार्यालय प्रारंभ नहीं होने के कारण भूमि स्वामियों सहित आम नागरिकों को अपने आवश्यक कार्यों के संपादन के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। वर्षों से बनी इस समस्या को लेकर अब गरियाबंद में कार्यालय स्थापना की मांग एक बार फिर सामने आई है। भारतीय जनता पार्टी के जिला कोषाध्यक्ष अजय रोहरा ने प्रदेश के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री टंकराम वर्मा को पत्र सौंपकर गरियाबंद जिला मुख्यालय में नगर एवं ग्राम निवेश कार्यालय प्रारंभ करने की मांग की है।
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अजय रोहरा ने अपने मांग पत्र में जिले की भौगोलिक स्थिति और आम नागरिकों की परेशानियों का उल्लेख करते हुए कहा है कि गरियाबंद को जिला बने करीब 14 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन नगर एवं ग्राम निवेश कार्यालय की सुविधा आज भी जिले में उपलब्ध नहीं है। इसके चलते नागरिकों को भूमि व्यपवर्तन (डायवर्सन) एवं नगर तथा ग्राम निवेश से संबंधित अन्य आवश्यक कार्यों के लिए रायपुर स्थित कार्यालय पर निर्भर रहना पड़ता है। स्थानीय स्तर पर कार्यालय नहीं होने से लोगों को न केवल आने-जाने में परेशानी होती है, बल्कि समय और आर्थिक संसाधनों की भी अतिरिक्त खपत होती है।

दूरस्थ अंचल के ग्रामीणों के लिए बड़ी परेशानी
जिले के दूरस्थ देवभोग क्षेत्र के नागरिकों के सामने यह समस्या और अधिक गंभीर हो जाती है। ज्ञापन में बताया गया है कि देवभोग की दूरी गरियाबंद जिला मुख्यालय से लगभग 130 किलोमीटर है। ऐसे में देवभोग और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को नगर एवं ग्राम निवेश कार्यालय से संबंधित कार्यों के लिए रायपुर तक करीब 240 किलोमीटर की लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। किसी दस्तावेज की कमी, जानकारी प्राप्त करने या प्रक्रिया संबंधी जरूरतों के चलते यदि बार-बार कार्यालय जाना पड़े, तो आम नागरिकों को अतिरिक्त खर्च और समय की परेशानी झेलनी पड़ सकती है।
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विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों के भूमि स्वामियों के लिए ऐसी प्रक्रियाओं को पूरा करना आसान नहीं होता। रोजमर्रा के कामकाज से समय निकालकर दूर शहर तक पहुंचना और फिर कार्यालयीन प्रक्रिया पूरी करना लोगों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। ऐसे में जिला मुख्यालय में संबंधित कार्यालय की स्थापना से जिले के विभिन्न क्षेत्रों के नागरिकों को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

जिला मुख्यालय में कार्यालय खुलने से क्या होगा फायदा?
नगर एवं ग्राम निवेश कार्यालय प्रारंभ होने से संबंधित सेवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर पहुंच आसान हो सकती है। इससे भूमि स्वामियों, किसानों, आम नागरिकों तथा निर्माण एवं विकास से जुड़े कार्यों के लिए जानकारी और निर्धारित प्रक्रियाओं के संबंध में सुविधा मिल सकती है। हालांकि, कार्यालय शुरू होने पर कौन-कौन सी सेवाएं उपलब्ध होंगी और किन कार्यों का निराकरण स्थानीय स्तर पर किया जाएगा, यह शासन की स्वीकृति और विभागीय व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
अजय रोहरा ने राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा से आग्रह किया है कि जिले की जनभावनाओं, प्रशासनिक जरूरतों और नागरिकों की परेशानियों को ध्यान में रखते हुए गरियाबंद जिला मुख्यालय में नगर एवं ग्राम निवेश कार्यालय खोलने के लिए आवश्यक पहल की जाए। उन्होंने जल्द से जल्द कार्यालय प्रारंभ किए जाने की मांग की है, ताकि जिले के लोगों को अनावश्यक भागदौड़ से मुक्ति मिल सके।
इस मांग पत्र को स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं पदाधिकारियों का भी समर्थन प्राप्त होने की बात कही गई है। अब देखना होगा कि गरियाबंद में कार्यालय स्थापना की इस मांग पर शासन और संबंधित विभाग कब तक निर्णय लेते हैं। फिलहाल जिलेवासियों को इंतजार है उस पहल का, जिससे नगर एवं ग्राम निवेश से जुड़े कार्यों के लिए राजधानी की लंबी दौड़ लगाने की मजबूरी कम हो सके।





