मनरेगा के करीब 30 करोड़ रुपये के भुगतान सहित अन्य लंबित राशि जारी करने की मांग, मूलभूत और 16वें वित्त आयोग की राशि भी अटकी; जिलाध्यक्ष हरीश साहु बोले—पंचायतों की बदहाली दूर करे सरकार, भुगतान नहीं हुआ तो आंदोलन होगा तेज
गरियाबंद (गंगा प्रकाश)। गांवों के विकास की जिम्मेदारी संभालने वाली ग्राम पंचायतें आज खुद आर्थिक संकट से जूझने को मजबूर हैं। ग्रामीणों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने से लेकर निर्माण कार्यों को गति देने तक पंचायतों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, लेकिन लंबित भुगतान की समस्या ने अब पंचायत प्रतिनिधियों की चिंता बढ़ा दी है। मनरेगा की मजदूरी एवं सामग्री की राशि, मूलभूत मद तथा 16वें वित्त आयोग की राशि सहित विभिन्न देयकों के भुगतान में देरी को लेकर जिला सरपंच संघ गरियाबंद ने शासन-प्रशासन के सामने अपनी आवाज बुलंद की है। भुगतान की मांग को लेकर संघ ने कटोरा लेकर कलेक्ट्रेट तक प्रतीकात्मक प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है। ऐसे में अब सवाल उठने लगा है कि गांवों के विकास की जिम्मेदारी उठाने वाली पंचायतों को आखिर अपनी ही राशि के लिए कब तक इंतजार करना पड़ेगा?
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जिला सरपंच संघ गरियाबंद एवं समस्त उपसरपंच-पंचगण की ओर से 2 नवंबर 2026 को जारी ज्ञापन में मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री, कलेक्टर गरियाबंद तथा जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी का ध्यान पंचायतों की आर्थिक समस्याओं की ओर आकृष्ट कराया गया है। संघ ने लंबित भुगतान का निराकरण कर पंचायतों को आर्थिक राहत प्रदान करने की मांग की है।
ज्ञापन के अनुसार जिले में मनरेगा के अंतर्गत लगभग 30 करोड़ रुपये के कार्यों की मजदूरी एवं सामग्री राशि लंबित है। संघ का दावा है कि भुगतान में करीब 8 माह से देरी हो रही है। वहीं मूलभूत एवं 16वें वित्त आयोग की राशि उपलब्ध नहीं होने, निर्माण कार्यों के देयकों का भुगतान अटकने तथा उपसरपंच एवं पंचगण के मानदेय से जुड़ी समस्याओं के चलते पंचायतों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है। संघ ने बताया कि मूल्यांकन एवं सत्यापन पूर्ण होने के बाद भी अनेक निर्माण कार्यों की राशि 5 से 6 माह से लंबित है। इन आंकड़ों एवं अवधि की आधिकारिक विभागीय पुष्टि होना बाकी है।
संघ का कहना है कि पंचायतों में कराए जाने वाले विकास कार्यों के लिए समय पर राशि उपलब्ध होना बेहद जरूरी है। भुगतान में देरी के चलते निर्माण कार्यों से जुड़े लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, वहीं पंचायतों के सामने नए विकास कार्यों को आगे बढ़ाने की चुनौती भी खड़ी होती है। ग्रामीण क्षेत्रों में आवश्यक सुविधाओं के विस्तार और जनहित के कार्यों की निरंतरता के लिए लंबित देयकों का निराकरण जरूरी है।

सरपंच संघ जिलाध्यक्ष हरीश साहु ने उठाई आवाज
जिला सरपंच संघ के जिलाध्यक्ष हरीश साहु ने पंचायतों की आर्थिक स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि ग्राम पंचायतें ग्रामीण विकास की आधारशिला हैं, लेकिन आज भुगतान में लगातार देरी के कारण पंचायतों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। मनरेगा के अंतर्गत कराए गए कार्यों की मजदूरी एवं सामग्री की राशि लंबित होने से सरपंचों और निर्माण कार्यों से जुड़े लोगों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। मूलभूत एवं 16वें वित्त आयोग की राशि समय पर नहीं मिलने से गांवों के विकास कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि शासन-प्रशासन को पंचायतों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए लंबित भुगतान तत्काल जारी करना चाहिए। हमारी मांग किसी व्यक्तिगत लाभ की नहीं, बल्कि पंचायतों के अधिकार, ग्रामीण विकास और मेहनतकश मजदूरों की मेहनत का भुगतान सुनिश्चित करने की है। यदि समय रहते मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं हुई, तो सरपंच संघ समस्त उपसरपंच एवं पंचगण के साथ लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन को आगे बढ़ाएगा।

भुगतान से लेकर मानदेय तक, कई मांगों पर जोर
संघ ने अपनी प्रमुख मांगों में मनरेगा की लंबित मजदूरी एवं सामग्री की राशि तत्काल जारी करने, मूलभूत तथा 16वें वित्त आयोग की राशि उपलब्ध कराने, उपसरपंच एवं पंचगण का लंबित मानदेय भुगतान सुनिश्चित करने और मूल्यांकन-सत्यापन पूर्ण निर्माण कार्यों की राशि जारी कर लंबित फाइलों का शीघ्र निराकरण करने की मांग रखी है। इसके साथ ही लंबित भुगतान के कारण प्रभावित किसानों को राहत दिलाने की मांग भी ज्ञापन में उठाई गई है।
संघ का कहना है कि पंचायत प्रतिनिधि गांवों में जनता की समस्याओं के समाधान और विकास कार्यों के संचालन के लिए लगातार प्रयास करते हैं। ऐसे में वित्तीय संसाधनों की कमी एवं भुगतान में देरी से उनकी कार्यक्षमता पर असर पड़ता है। समय पर भुगतान मिलने से मजदूरों, निर्माण कार्यों से जुड़े लोगों तथा पंचायतों को राहत मिलने के साथ ग्रामीण विकास की गति को भी मजबूती मिल सकती है।
कटोरा लेकर कलेक्ट्रेट तक पहुंचने की तैयारी
लंबित राशि के भुगतान की मांग को लेकर संघ ने गरियाबंद बस स्टैंड से कटोरा लेकर जिला कलेक्टर कार्यालय तक प्रतीकात्मक प्रदर्शन करने की बात कही है। इस कार्यक्रम के माध्यम से पंचायतों की आर्थिक बदहाली को सामने लाने और शासन-प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने की तैयारी है। संघ ने संकेत दिया है कि मांगों का समयसीमा में निराकरण नहीं होने पर आगे की रणनीति तैयार कर धरना-प्रदर्शन एवं चक्काजाम जैसे आंदोलनात्मक कदम उठाए जा सकते हैं।
हालांकि प्रस्तावित प्रदर्शन की सटीक समय-सारणी, प्रशासन की प्रतिक्रिया और भुगतान की वर्तमान स्थिति को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है। ऐसे में अब निगाहें जिला प्रशासन एवं संबंधित विभागों पर टिकी हैं कि पंचायतों की मांगों पर क्या पहल की जाती है।
गांवों के विकास की बुनियाद मानी जाने वाली पंचायतों को जब अपने ही कार्यों के भुगतान के लिए आंदोलन का रास्ता चुनना पड़े, तो यह व्यवस्था के सामने एक गंभीर सवाल खड़ा करता है। क्या पंचायतों की लंबित राशि दीपावली से पहले जारी होगी, क्या मजदूरों और निर्माण कार्यों से जुड़े लोगों को राहत मिलेगी, या फिर भुगतान का इंतजार और लंबा होगा? फिलहाल सरपंच संघ की मांगों पर होने वाली कार्रवाई ही इन सवालों का जवाब देगी।




