गरियाबंद (गंगा प्रकाश)।जिला मुख्यालय गरियाबंद स्थित कृषि विज्ञान केन्द्र में विगत 27 मार्च 2023 को अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना ( औषधीय एवं सुगंध फसल) के अन्तर्गत इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के पादप कार्यिकी, कृषि जैव रसायन, औषधीय एवं सुगंध विभाग द्वारा औषधीय एवं सुगंधित फसलों पर एक दिवसीय कृषक प्रषिक्षण का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कृषि विज्ञान केन्द्र गरियाबंद के प्रमुख डॉ. मनीष चौरसिया ने छत्तीसगढ़ में औषधीय एवं सुगंधित फसलों की व्यवसायिक खेती का महत्व के बारे में जानकारी दी। औषधीय एवं सुगंध विभाग के प्राध्यापक डॉ. यमन देवांगन ने विभिन्न औषधीय एवं सुगंधित फसल जैसे तुलसी, चन्द्रसुर, लेमनग्रास, पान, अश्वगंधा आदि पौधों की उन्नत उत्पादन तकनीको की जानकारी दी। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की सह- प्राध्यापक डॉ. ऐलिस टिरकी ने विभिन्न औषधीय एवं सुगंधित फसल तुलसी, चन्द्रसुर, लेमनग्रास, पान, अश्वगंधा आदि पौधों की उन्नत किस्मों की पहचान, उनके गुण एवं उपयोग के बारे में विस्तृत जानकारी दी। के.वी.के. गरियाबंद के वैज्ञानिक डॉ. शालू एन अब्राहम एवं डॉ. ईषू साहू ने कृषको को अवगत कराया कि किस प्रकार स्व-सहायता समूह औषधीय एवं सुगंधित फसलों की खेती करके किस प्रकार लाभ ले सकतें है। इस प्रशिक्षण में इफको टोकियो (समन्वित ग्रामीण विकास परियोजना) के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी तनवीर खान एवं कनिष्ठ प्रबंधक हरेश यादव भी उपस्थित थे एवं इनके परियोजना ग्राम भरुआमुड़ा, हिराबत्तर और जटियातोरा के 30 किसानों ने भाग लिया। इस प्रशिक्षण के दौरान किसानों को पान, अष्वगंधा, इन्सुलिन पौधा, तुलसी, ऐलोवेरा इत्यादि के पौधों के साथ जैव उवैरक पी.एस.बी., ऐजेटोबैक्टर एवं प्रमाण पत्र का भी वितरण किया गया। इस प्रशिक्षण में छुरा विकासखण्ड के ग्राम भरुआमुड़ा, हिराबत्तर एवं जटियातोरा के 30 किसानों ने भाग लिया।
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