गरियाबंद/राजिम/फिंगेश्वर(गंगा प्रकाश)। राष्ट्रपति प्रधानमंत्री पर और राज्यपाल मुख्यमंत्री पर एक्शन ले सकते हैं। लेकिन मणिपुर जघन्य हिंसा पर चारों चुप्पी साधे हुए हैं। जबकि राष्ट्रपति और मणिपुर की राज्यपाल दोनों ही पीड़ित कौम से ताल्लुक रखते हैं और दोनों महिला भी है इन पदों की निंदा तो नहीं की जाती लेकिन आग्रह तो किया जा सकता है। आखिर मणिपुर में इतनी जधन्य हत्याएं और मानवता का बलात्कार होने के बावजूद भी राष्ट्रपति शासन या राज्यपाल शासन क्यों नहीं लगाया गया ? इस मामले में राष्ट्रपति राज्यपाल वर्सेस प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री नजर नहीं आता है। उपरोक्त बातें को फिंगेश्वर जनपद पंचायत के पूर्व अध्यक्ष राघोबा महाडिक ने एक मुलाकात में कही है उन्होंने कहा है कि महामहिम राष्ट्रपति महोदय को जगन्नाथ मंदिर ले जाकर उनकी परीक्षा ले ली थी कि गर्भ गृह में प्रवेश नहीं देने से क्या एक्शन ले सकती है। कुछ भी एक्शन नहीं आया तो भाजपा को लगा कि मणिपुर में हिंसा करवाई जा सकती है और वहां राज्यपाल भी राष्ट्रपति कौम ही काम से आती है। श्री महाडिक ने कहा कि राष्ट्रपति का अधिकार बनता है कि वह मुख्यमंत्री को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लागू कर तक के राज्यपाल राष्ट्रपति के प्रतिनिधि है वहां राज्यपाल प्रशासन संभालते हैं। आज 3 महीना से भी अधिक हो गए प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री और उसके अमले मानवता को तार-तार होते देख रहे हैं। राष्ट्रपति और राज्यपाल को ऐसी क्या मजबूरी है मणिपुर हिंसा पर एक्शन नहीं ला पा रहे हैं। पूर्व जनपद अध्यक्ष माहाणिक ने कहा कि बड़े दुख की बात है यह कि वहां सेना भी आतंकियों, हत्यारों, और दरिंदों के साथ है वहां की जनता को हथियारों से भुना जा रहा है। स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री मोदी ने वोटिंग मशीन का खेल समझ चुके हैं इसलिए तो जनता का तनिक भी भय नहीं है।
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