गरियाबंद/फिंगेश्वर(गंगा प्रकाश)। दिल्ली में एक बार फिर किसानों को आंदोलन भाजपा की किसान विरोधी नीति के कारण हिंसात्मक होता जा रहा है। कृषकों के शांतिपूर्ण किए जा रहे आंदोलन में भाजपा की केन्द्र सरकार बेवजह सख्ती एवं असहयोग कर रही है। इससे आंदोलन कारी कृषकों में भारी रोष व्याप्त है। विशुद्ध किसान परिवार की फिंगेश्वर जनपद पंचायत की अध्यक्ष श्रीमती पुष्पा जगन्नाथ साहू ने कहा कि जब भी किसान आंदोलन पर इतिहास लिखा जाएगा तब मोदी सरकार के दस साल के कार्यकाल को किसानों के खिलाफ बर्बरता, दमन और दंशकाल के रूप में जाना जाएगा। आज भाजपा की केन्द्र सरकार तथा हरियाणा, राजस्थान, उत्तरप्रदेश की भाजपा सरकारों ने देश की राजधानी दिल्ली को एक पुलिस छावनी में तब्दील कर रखा है जैसे कि किसी दुश्मन ने दिल्ली की सत्ता पर हमला बोल दिया हो। दिल्ली के चारों ओर खासतौर पर हरियाणा और दिल्ली बार्डर का मंजर सोनिपत में कुंडली और बहादुरगढ़ में टीकरी बार्डर पर सीमेंट के बैरिकेड बड़े-बड़े बोल्डर रोड रोलर व कंटेनर्स लगाकर उन्हें सील कर दिया गया है। यही हाल यूपी और राजस्थान बार्डर का भी है। श्रीमती साहू ने कहा कि देश के अन्नदाताओं को अपने अधिकारों के लिए आज तरह तरह के जुल्म सहने पड़ रहे है। अपने हक के लिए किसान दिल्ली चलो नारे के साथ पूरे अनुशासन के साथ जा रहे है। रास्ते में किसानों द्वारा ना कहीं टै्रफिक जाम किया जा रहा ना ही चक्काजाम लेकिन केन्द्र की मोदी सरकार किसानों से बात करने बजाए उन पर बल प्रयोग कर उन्हें दिल्ली बार्डर पर रोक रही है। जनपद अध्यक्ष श्रीमती पुष्पा जगन्नाथ साहू ने कहा कि दो वर्ष पहले मोदी सरकार ने तीन काले कानूनों को रदद कर एमएसपी पर गारंटी देने का वादा किया था। इसके बाद किसानों ने आंदोलन वापस ले लिया था। लेकिन केन्द्र सरकार ने एमएसपी को लेकर अपने वादे पूरे नहीं किए। श्रीमती साहू ने कहा कि 2021 में कृषि कानूनों को लेकर किसानों को बड़ी कुर्बानी देनी पड़ी। किसान करीब एक साल तक लगातार धरना प्रदर्शन करते रहे। इस आंदोलन के दौरान 700 से ज्यादा किसानों की मौत हो गई लेकिन केन्द्र सरकार की मोदी सरकार को किसानों की मौत को कोई अफसोस नहीं हुआ। जनपद अध्यक्ष पुष्पा साहू ने कहा कि 2021 के आंदोलन की तरह ही इस बार भी अपनी कई मांगो के लिए किसान विरोधी प्रदर्शन कर रहे है। लेकिन किसानों की बात सुनने के बजाए मोदी सरकार उन पर आशु गैस के गोले छोड़ रहे है। मोदी सरकार द्वारा किसानों पर अत्याचार उनके किसान विरोधी मानसिकता को दर्शाता है।
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