गरियाबंद/फिंगेश्वर (गंगा प्रकाश)। अब जल्द ही शराब दुकानों में शराब खरीदने के लिए ग्राहकों को अपने मोबाईल में नेट की जरूरत पड़ने वाली है। अब राज्य की सरकार कैशलेस के दायरे में शराब दुकानों को भी ला रही है, इसके चलते जल्द ही नगदी लेनदेन पर लगाम लगाया जा सकता है। आबकारी विभाग शराब की बिक्री यूपीआई के जरिए ऑनलाइन करने जा रहा है। आबकारी अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार सब कुछ सामान्य रहा तो जून के दूसरे सप्ताह से शराब कैशलेस खरीदी की जा सकेगी। इससे शराब की अवैध बिक्री पर लगाम लग सकेगा। मिली जानकारी के अनुसार विभाग और कारोबार करने वाले मार्केटिंग कंपनी ने इससे उबरने अब शराब की खरीदी बिक्री को ऑनलाइन करने की तैयारी पूरी कर ली है। रोजाना प्रदेश में करोड़ो की देशी-विदेशी शराब पी जाती है। इस कड़ी में नगर के शराब दुकानों पर प्रतिदिन लाखों की बिक्री होती है, जो नगद में बेची जाती है। अब यह सब कुछ बैंकों के जरिए यूपीआई से होगा। नगर में शराब की दो दुकानें है। जल्द ही बैंक खाते खोलकर इसके क्यूआर कोड के जरिए शौकिन शराब लेकर पेमेंट ऑनलाइन कर सकेंगे। फिलहाल यह सिस्टम प्रीमियम दुकानों में पायलट प्रोजेक्ट के तहत शुरू किया जा रहा है, उसके बाद सभी देशी-अंग्रेजी शराब दुकानों में भी शुरू किया जायेगा। मामले में वित्त अधिकारी आबकारी ने कहा कि प्रशासनीक घोषणा अभी नहीं हुई है, बाकी पेमेंट सिस्टम कैशलेस हो जाएगा तो आसानी होगा। देसी-अंग्रेजी के शराब दुकानों में अक्सर शिकायत मिलती है कि चिल्हर बोलकर ओवर रेट, सीजन में ओवर कमाई में शराब बिक्री की जाती है। दुकानों के सैल्समेन ओवर कमाई को आपस में बांटकर अतिरिक्त कमाई करते है, सैल्समेन की इससे कमाई लाखों में पहुंचती है। ऑनलाइन पेमेंट से इस पर लगाम लगेगा। दोनों दुकानों पर शराब की निश्चित मात्रा में बिक्री तय की गई है। ऑनलाइन पेमेंट से इस पर रोकथाम लगेगी। क्योंकि ज्यादा मात्रा में बिक्री करने पर ज्यादा पेमेंट आएगा, जिससे बिक्री का लिमिट पता चल जाएगा। ऑनलाइन पेमेंट से कोचियागिरी पर लगाम लगेगी, क्यों कोचियागिरी करने वाले नगदी पेटी-पेटी माल खरीदी करते है। ऑनलाइन पेमेंट से इसकी जानकारी उपलब्ध होगी कि किसको कितना माल बेचा गया है और किससे कितना पेमेंट आया। आए दिन शराब की दुकानों पर लूटपाट, छीनाझपटी की शिकायत आती रहती है। ऑनलाइन पेमेंट से नगद की रकम कम आएगी, जिससे दुकानों पर ऐसी स्थिति कम बनेगी। साथ ही पुलिस प्रशासन को भी दुकान की बिक्री के रकम को संभालने का अतिरिक्त बोझ झेलने नहीं पड़ेगा।
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