गरियाबंद/फिंगेश्वर (गंगा प्रकाश)। गुरूवार 30 मई को पारा 45 डिग्री तक चढ़ा रहा। जिसके चलते सुबह 7 बजे से ही जनजीवन प्रभावित हो गया। सुबह से ही सूर्यदेव अपने तेवर दिखाने लगे। नौतपा के छठवें दिन बाकी चार दिनों की अपेक्षा लुका छुपी का खेल नहीं चला बल्कि तपिश के साथ सूर्य ने पूरे दिनभर रौब दिखाएं। शाम 5ः30 के बाद ही लोग अपने घर से निकले। इस समय भी सड़क पर चलने से ताव सीधे माथे पर आ रहे थे। दोपहर 12 बजे के बाद सड़कें सुनी दिखाई दे रही थी। इक्का दुक्का जरूरी काम वाले ही आवागमन करते दिखें। तेज गर्मी पेयजल उपलब्ध कराने के लिए कहीं पर मटकी तो कहीं पर पानी को ठंडा करने वाली मशीन लगाकर रख दिए है जिससे सरलता के साथ शीतल पेयजल उपलब्ध हो। लू लगने के डर से लोग घर से बाहर निकलते ही चेहरे पर कपड़े बांधकर गमन कर रहे है। इधर मौसम विभाग ने नौतपे के आखिरी दिनों में अंधड़ की संभावना बताई है। मनुष्य के लिए तो जगह जगह फिल्टर मशीन एवं अन्य माध्यमों से शीतल पानी की व्यवस्था प्रदेष के लगभग अधिकांश शहरों में देखने को मिल जाती है लेकिन धर्म नगरी फिंगेश्वर में पशुओं की सुरक्षा एवं उनके प्यास बुझाने के लिए पानी की व्यवस्था कौन करें। गाय, बैल, भैंस नल की टोटी के पास खड़े होकर जीब से पानी को अपने शरीर के अंदर लेने का प्रयत्न करते हुए अनेक दृष्य देखने को मिलते है। क्योंकि इनके पीने के लिए कहीं पर कोई टंकी या फिर कोटना की व्यवस्था नहीं किया गया है। शहर में बदहवास घूम रहे इन पशुओं की चिंता किसी को नहीं है। प्रचंड गर्मी के चलते लोग या तो घर से निकलते नहीं है और निकल भी रहे है तो अपने साथ में बोतल पर ठंडा पानी रखकर जा रहे हैं लेकिन यह पानी रास्ते में ही खत्म हो रहा है क्योंकि गर्मी में बहुत जल्दी गला सुख रहा है ऐसे में हर सरकारी कार्यालय एवं प्राइवेट संस्थान पर शीतल पेयजल उपलब्ध कराना शासन और सरकार दोनों की महति जिम्मेदारी बन जाती है। शहर में कई कार्यालय है इनमें से अधिकांश शासकीय दफ्तरों में शीतल पेयजल की व्यवस्था नहीं है जिससे पानी पीने के लिए लोग इधर-उधर भटकते रहते है। तहसील मुख्यालय में कहीं भी मटके का पानी देखने को नहीं मिला। जनपद कार्यालय में शीतल पेयजल का मशीन लगा हुआ है लोगों का कहना है कि सभी विभाग के दफ्तर में ठंडे पानी होना चाहिए। 31 मई तक पारा 45 डिग्री तक रहने का अनुमान है। खासतौर से लोग अपने स्वास्थ्य पर ज्यादा ध्यान दे रहे है। एक बार नहाने वाले लोग दो बार तीन बार स्नान कर रहे है। लेकिन आसपास के गांव तालाबों में पानी न के बराबर है।
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