CG: मुख्यमंत्री के गृहजिले में शिक्षा के नाम पर खुला भ्रष्टाचार!प्राचार्या का ‘सेटिंग राज’: स्कूल बना नेटवर्क मार्केटिंग और दलाली का अड्डा
जशपुर (गंगा प्रकाश)। मुख्यमंत्री के गृहजिले में शिक्षा के नाम पर खुला भ्रष्टाचार! छत्तीसगढ़ में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लाख दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जब मुख्यमंत्री के ही गृहजिले में शिक्षा के मंदिर को ‘धंधे का अड्डा’ बना दिया जाए, तो सवाल उठना लाजमी है। जशपुर जिले के एक शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से जो सनसनीखेज जानकारी सामने आई है, उसने न केवल शिक्षा विभाग, बल्कि पूरे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, इस विद्यालय की प्राचार्या का पूरा ध्यान शैक्षणिक गुणवत्ता पर नहीं, बल्कि अपने अधीनस्थ शिक्षकों को ‘सुरक्षा कवच’ देने पर केंद्रित है। आरोप है कि विद्यालय में पदस्थ कई व्याख्याता नेटवर्क मार्केटिंग (Herbal Life जैसे प्रोटीन सप्लीमेंट) और भूमि दलाली जैसे संदिग्ध कार्यों में सक्रिय हैं। ये शिक्षक कक्षाओं में बच्चों को पढ़ाने के बजाय, एक-दूसरे और बाहर से आने वालों को नेटवर्किंग प्लान समझाते हैं, प्रोटीन पाउडर के फायदे बताते हैं, और ज़मीन के सौदे फाइनल करते हैं।

सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि जब कुछ शिक्षकों ने आपत्ति जताई या प्रशासन में शिकायत करने की बात की, तो प्राचार्या ने दो टूक शब्दों में कहा –
“डरने की कोई जरूरत नहीं। मेरी सेटिंग जिले के वरिष्ठ अधिकारियों और शाला विकास समिति के प्रभावशाली सदस्यों से हो चुकी है। न तो कोई जांच होगी, न ही कोई कार्रवाई।”
यह कथन शिक्षा विभाग की व्यवस्था पर करारी चोट करता है। सवाल यह है कि अगर एक शासकीय विद्यालय की प्राचार्या अपने संरक्षण में इस प्रकार का गैर-शैक्षणिक और अवैध कार्य करवाए, तो बच्चों के भविष्य की सुरक्षा कौन करेगा?
शिक्षक या सौदागर?
शिक्षा विभाग से वेतन प्राप्त करने वाले ये शिक्षक, जिन्हें छात्र-छात्राओं को पढ़ाने और उनके भविष्य को सवारने की जिम्मेदारी दी गई है, वे अब सप्लीमेंट बेचने वाले एजेंट और दलाल बन चुके हैं। छात्राओं के अभिभावकों में गहरा रोष व्याप्त है। एक छात्रा के पिता ने नाम उजागर न करने की शर्त पर कहा –
“हम अपनी बेटियों को पढ़ने भेजते हैं, लेकिन वहाँ पढ़ाई के बजाय शिक्षक Herbal Life के सप्लीमेंट बेचते हैं और नेटवर्किंग प्लान समझाते हैं। ऐसे माहौल में हमारी बेटियाँ क्या सीखेंगी? अगर प्राचार्या ही इन्हें संरक्षण दे रही हैं, तो हम अपनी बेटियों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करें?”
शिक्षा विभाग की चुप्पी – सवालों के घेरे में
अब तक न तो जिला शिक्षा अधिकारी ने इस मामले पर संज्ञान लिया, और न ही किसी प्रकार की जांच प्रक्रिया आरंभ हुई है। इससे यह संदेह और गहरा हो गया है कि कहीं प्राचार्या का ‘सेटिंग’ वाला दावा सच तो नहीं? अगर सच है, तो यह पूरा मामला केवल एक विद्यालय या प्राचार्या का नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक ढांचे में व्याप्त भ्रष्टाचार का प्रतीक है।
जनता पूछ रही है:
- क्या मुख्यमंत्री जी के अपने गृहजिले में ही भ्रष्टाचार को खुली छूट मिल गई है?
- क्या शासकीय वेतनभोगी शिक्षक अब स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने के बजाय नेटवर्क मार्केटिंग और दलाली करेंगे?
- क्या शिक्षा विभाग का यह निकम्मापन प्राचार्या और शिक्षकों को संरक्षण देने का प्रमाण नहीं है?
- क्या ऐसे शिक्षकों और प्राचार्या पर शीघ्र कार्रवाई होगी, या “सेटिंग” का कवच उन्हें हमेशा बचाता रहेगा?
भ्रष्टाचार का ‘सेटिंग कवच’ और शिक्षा का भविष्य
यदि विद्यालयों में इस प्रकार खुलेआम गैर-शैक्षणिक गतिविधियाँ चलेंगी, तो शिक्षा व्यवस्था का भविष्य क्या होगा? क्या हम चाहते हैं कि अगली पीढ़ी के आदर्श ऐसे शिक्षक बनें, जो कक्षा में सप्लीमेंट बेचें और छुट्टी के बाद जमीन की रजिस्ट्री करवाएं?
शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने अनौपचारिक बातचीत में स्वीकार किया कि ऐसी शिकायतें पहले भी आई हैं, लेकिन ‘ऊपर से दबाव’ के चलते कई बार कार्रवाई नहीं हो पाती। अगर मुख्यमंत्री के ही गृहजिले में यह हाल है, तो अन्य जिलों की स्थिति का अंदाजा लगाना कठिन नहीं है।
अब समय आ गया है – जवाबदेही तय करनी होगी
जनता की स्पष्ट मांग है कि शिक्षा विभाग तत्काल इस विद्यालय की प्राचार्या और व्यवसायिक गतिविधियों में लिप्त शिक्षकों के खिलाफ जांच कर, दोषियों पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करे। वरना जशपुर जिले की पहचान शिक्षा के मंदिर के रूप में नहीं, बल्कि ‘भ्रष्टाचार के अड्डे’ के रूप में होगी – जो न केवल शासन के लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए शर्मनाक होगा।