छुरा में भगवा आभा के साथ ध्वजारोहण, सनातन परंपरा में लहराया तिरंगा
छुरा (गंगा प्रकाश)। छुरा में भगवा आभा के साथ ध्वजारोहण :;स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर छुरा नगर पूरी तरह सनातन रंग में रंगा नज़र आया। नगर के मुख्य मैदान में जैसे ही सुबह की पहली किरणें बिखरीं, पूरा वातावरण भगवा आभा से नहाया हुआ प्रतीत हुआ। चारों ओर भगवा पताकाएँ, फूलों की सजावट और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज ने माहौल को भक्ति और देशभक्ति दोनों से सराबोर कर दिया।

अध्यक्ष लुकेश्वरी निषाद का पारंपरिक अंदाज़
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा नगर पंचायत अध्यक्ष लुकेश्वरी निषाद का आगमन, जिन्होंने परंपरागत भगवा साड़ी और पागा (पगड़ी) पहनकर मंच पर कदम रखा। जैसे ही उन्होंने मंच पर पहुँचकर राष्ट्रध्वज को सलामी दी और तिरंगा फहराया, पूरा मैदान “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम्” के गगनभेदी नारों से गूंज उठा। उनके इस पारंपरिक अंदाज़ ने लोगों के दिलों को छू लिया।
त्याग और वीरता की याद
अपने उद्बोधन में अध्यक्ष लुकेश्वरी निषाद ने कहा— “भगवा केवल एक रंग नहीं, यह त्याग, वीरता और संस्कृति का प्रतीक है। इस ध्वज के नीचे हम सब एक हैं, और हमें यही एकता भारत को महान बनाती है।” उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को नमन करते हुए युवाओं से देशभक्ति के पथ पर चलने का आह्वान किया।

नगर का सांस्कृतिक रंग
कार्यक्रम के दौरान विद्यालयों के बच्चों ने “वंदे मातरम्”, “झंडा ऊंचा रहे हमारा” और वीर रस से भरपूर कविताओं की प्रस्तुति दी। मंच के किनारों पर पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप और नगाड़ों की आवाज़ ने पूरे आयोजन को ऐतिहासिक भव्यता दी। ग्रामीण क्षेत्रों से आए बुजुर्गों ने भी परंपरागत वेशभूषा में भाग लिया, जिससे कार्यक्रम में लोक-संस्कृति की सजीव झलक देखने को मिली।
सनातन परंपरा में आधुनिक देशभक्ति
छुरा का यह आयोजन सिर्फ ध्वजारोहण नहीं था, बल्कि यह सनातन परंपरा और आधुनिक राष्ट्रभक्ति का संगम था। एक ओर भगवा रंग ने संस्कृति की गरिमा को दर्शाया, वहीं लहराते तिरंगे ने देश की एकता और अखंडता का संदेश दिया।
अंत में, राष्ट्रगान की मधुर धुन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ, लेकिन लोगों के दिलों में गूंजते नारों और भगवा-तिरंगे के संगम की छवि देर तक बसती रही।




