फर्जी नक्सली मुठभेड़ पर कांग्रेस का बड़ा कदम — 7 सदस्यीय जांच समिति मौके पर पहुँची, खोलेगी पुलिस-भाजपा सरकार की पोल
कोंडागांव (गंगा प्रकाश)। फर्जी नक्सली मुठभेड़ पर कांग्रेस का बड़ा कदम — केशकाल क्षेत्र के ग्राम कोहकामेटा में हाल ही में हुई कथित नक्सली मुठभेड़ अब बड़े विवाद का रूप ले चुकी है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि यह घटना किसी भी तरह नक्सली मुठभेड़ नहीं थी, बल्कि पुलिस द्वारा निर्दोष ग्रामीण युवाओं के साथ की गई मारपीट और गोलीबारी को नक्सली मुठभेड़ का रंग दिया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि भाजपा सरकार और कोंडागांव पुलिस ने अपनी नाक बचाने और साख बनाए रखने के लिए इस पूरी कहानी को गढ़ा है।
इस सनसनीखेज मामले की गंभीरता को देखते हुए छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) ने त्वरित कदम उठाते हुए एक 7 सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया है।

समिति में शामिल चेहरे
इस जांच समिति का संयोजक पूर्व मंत्री मोहन मरकाम को बनाया गया है। वहीं, टीम में बस्तर विधायक लखेश्वर बघेल, भानुप्रतापपुर विधायक श्रीमती सावित्री मंडावी, पूर्व विधायक संतराम नेताम, प्रदेश कांग्रेस महामंत्री रवि घोष, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष देवचंद मतलाम और कोंडागांव जिला कांग्रेस अध्यक्ष बुधराम नेताम शामिल हैं।
मौके पर किया मुआयना, सुनी पीड़ितों की दास्तां
यह समिति रविवार को कोहकामेटा पहुँची और घटना स्थल का मौका मुआयना किया। वहां मौजूद ग्रामीणों, पीड़ित परिवारों और प्रत्यक्षदर्शियों से खुलकर बातचीत की। ग्रामीणों ने बताया कि घटना की रात पुलिस गांव में पहुँची और बिना किसी सबूत के युवाओं को नक्सली करार देकर बेरहमी से पीटा और गोलीबारी की। बाद में उसी घटनाक्रम को मुठभेड़ का रूप दे दिया गया।
“सच को दबाने की कोशिश कर रही भाजपा सरकार”
मौका निरीक्षण के बाद समिति के संयोजक मोहन मरकाम ने कहा — “यह घटना पुलिस और भाजपा सरकार की मिलीभगत से रची गई एक गंदी साजिश है। निर्दोष युवाओं को नक्सली बताकर मारपीट करना, गोली चलाना और फिर मुठभेड़ की झूठी कहानी गढ़ना निंदनीय है। कांग्रेस इस पूरे मामले को जनता के सामने लाएगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करेगी।”
रिपोर्ट से हिलेगी सरकार
जांच समिति अपनी विस्तृत रिपोर्ट जल्द ही छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) को सौंपेगी। रिपोर्ट के आधार पर कांग्रेस नेतृत्व इस मामले को राज्य और केंद्र स्तर पर उठाकर भाजपा सरकार और पुलिस प्रशासन को कटघरे में खड़ा करेगी। कांग्रेस नेताओं का साफ कहना है कि इस फर्जी मुठभेड़ की आड़ में निर्दोष ग्रामीणों का खून बहाया गया है और अब इसे किसी भी हालत में दबाने नहीं दिया जाएगा।
राजनीतिक भूचाल के आसार
इस घटनाक्रम ने बस्तर से लेकर पूरे छत्तीसगढ़ की राजनीति को गरमा दिया है। ग्रामीण आक्रोशित हैं, कांग्रेस खुलकर हमलावर हो चुकी है, वहीं भाजपा सरकार और पुलिस प्रशासन पर सवालों की बौछार हो रही है। आने वाले दिनों में यह मामला बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले सकता है।