गरियाबंद/फिंगेश्वर(गंगा प्रकाश)। धान बेचने के लिए राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई डिजिटल व्यवस्था टोकन तुंहर हाथ ऐप ग्रामीण किसानों के लिए बड़ी परेशानी का सबब बन गई है। कमजोर नेटवर्क कनेक्टिविटी और सर्वर पर अत्यधिक दबाव के चलते हजारों किसान टोकन काटने के लिए संघर्श कर रहे हैं, जिससे उनका समय और श्रम दोनों बर्बाद हो रहा है। टोकन काटने का समय, यानी सुबह आठ बजे, किसानों के लिए तनावपूर्ण साबित हो रहा है। ग्रामीण इलाकों में नेटवर्क कनेक्टिविटी इतनी दयनीय है कि जैसे ही सैकड़ों किसान एक साथ ऐप खोलने की कोशिश करते हैं, सर्वर धीमा पड़ जाता है। बेहतर सिग्नल की तलाश में किसान अपने घरों की छतों, चौक-चौंराहों और यहां तक की पेड़ों के उपर चढ़कर नेटवर्क ढुंढते नजर आते है। किसानों ने बताया कि ऐप खोलने पर बार बार लोडिंग होती है और अंत में ट्राई अगेन का संदेश आ जाता है। जिससे टोकन मिल पाना मुश्किल हो जाता है। किसानों का कहना है कि यह स्थिति उनकी मानसिक परेशानी को बढ़ा रही है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि या तो टोकन प्रणाली को सरल बनाया जाए या ग्रामीण नेटवर्क इन्फ्रास्ट्रक्चर को जल्द से जल्द दुरूस्त किया जाए।
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