ग्रामीणों ने रोजगार और मूलभूत सुविधाओं के वादे पूरे नहीं होने का लगाया आरोप, विधायक विक्रम मंडावी ने उच्चस्तरीय जांच की मांग उठाई
यदिंद्रन नायर
बीजापुर (गंगा प्रकाश)। बीजापुर-सुकमा सीमा पर स्थित ग्राम तुमलपाड़ में संचालित कथित गिट्टी क्रशर प्लांट और BRO (बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन) की सड़क निर्माण परियोजना को लेकर गंगा प्रकाश द्वारा प्रकाशित खोजी पड़ताल के बाद अब यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर सुर्खियों में आ गया है। पहले गंगा प्रकाश ने सड़क निर्माण कार्य, क्रशर प्लांट, गिट्टी के उपयोग, परियोजना स्थल पर सूचना बोर्ड नहीं होने, विभागीय निगरानी और निर्माण कार्य की पारदर्शिता पर कई सवाल उठाए थे। अब इन्हीं मुद्दों को लेकर बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी, सुकमा जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हरीश कवासी सहित कांग्रेस के कई जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे तथा ग्रामीणों से चर्चा कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
ग्रामीणों ने सुनाई अपनी पीड़ा
निरीक्षण के दौरान ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों को बताया कि गांव में क्रशर प्लांट लगाने से पहले गांव वालों को कई बड़े-बड़े आश्वासन दिए गए थे। ग्रामीणों के अनुसार, प्लांट संचालकों ने कहा था कि गांव के प्रत्येक परिवार से कम से कम एक सदस्य को रोजगार दिया जाएगा। इसके अलावा गांव में बिजली, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाओं का विकास कराने का भी भरोसा दिलाया गया था।

ग्रामीणों का दावा है कि इन्हीं आश्वासनों के आधार पर गांव के लोगों ने विरोध नहीं किया, लेकिन आज तक अधिकांश परिवारों को रोजगार नहीं मिला और न ही बिजली-पानी जैसी सुविधाओं में कोई उल्लेखनीय सुधार हुआ। उल्टा गांव के बीच संचालित क्रशर प्लांट के कारण धूल, शोर और भारी वाहनों की आवाजाही से लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि गिट्टी निकालने के लिए नियमित रूप से ब्लास्टिंग की जाती है, जिससे कंपन और तेज धमाकों के कारण लोग भय और असुविधा महसूस करते हैं।
ग्राम पंचायत इंजराम के पास भीषण सड़क हादसा, बेकाबू ट्रेलर किराना दुकान में घुसा, महिला और मासूम बच्ची घायल
ग्रामसभा और अनुमति पर उठे सवाल
ग्रामीणों ने विधायक और कांग्रेस नेताओं को बताया कि गांव में क्रशर प्लांट स्थापित करने से पहले न तो ग्रामसभा की बैठक आयोजित की गई और न ही ग्रामीणों से औपचारिक सहमति ली गई। उनका आरोप है कि पंचायत से भी विधिवत अनुमति नहीं ली गई।
यदि ऐसा है, तो यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि क्रशर प्लांट किन अनुमतियों के आधार पर संचालित हो रहा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और संबंधित विभागों का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
गंगा प्रकाश की जमीनी पड़ताल में सामने आए कई तथ्य
गंगा प्रकाश के सलाहकार संपादक एवं वरिष्ठ संवाददाता यदिन्द्रन नायर ने निर्माण स्थल और क्रशर प्लांट का भौतिक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि निर्माण स्थल पर BRO अथवा कार्यदायी एजेंसी का कोई परियोजना सूचना बोर्ड प्रदर्शित नहीं मिला।
सामान्यतः किसी भी सरकारी निर्माण कार्य में परियोजना की लागत, कार्य अवधि, कार्यदायी संस्था, ठेकेदार का नाम और अन्य आवश्यक जानकारी वाला बोर्ड लगाया जाता है, ताकि आम नागरिकों को परियोजना की जानकारी मिल सके। लेकिन निरीक्षण के दौरान ऐसा कोई बोर्ड दिखाई नहीं दिया।
बस्ती के बीच संचालित हो रहा क्रशर प्लांट
पड़ताल के दौरान यह भी सामने आया कि क्रशर प्लांट आबादी वाले क्षेत्र के बीच संचालित हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि दिन-रात चलने वाली मशीनों और भारी वाहनों के कारण धूल प्रदूषण बढ़ गया है, जिससे बच्चों, बुजुर्गों और अन्य ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अब सवाल यह उठता है कि क्या आबादी क्षेत्र के इतने निकट क्रशर प्लांट संचालित करने के लिए सभी आवश्यक पर्यावरणीय और प्रशासनिक स्वीकृतियां प्राप्त की गई थीं?
विभागीय सूत्रों ने भी उठाए सवाल
नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर विभागीय सूत्रों ने गंगा प्रकाश को बताया कि BRO परियोजना, क्रशर प्लांट और निर्माण सामग्री के उपयोग से जुड़े कई तथ्य संबंधित विभागों के संज्ञान में हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और संबंधित विभागों की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

क्रशर संचालक से भी लिया गया पक्ष
पत्रकारिता के सिद्धांतों का पालन करते हुए गंगा प्रकाश ने क्रशर संचालक का पक्ष भी जानने का प्रयास किया।
मोबाइल फोन पर संपर्क करने पर क्रशर संचालक ने कहा— अभी बरसात का मौसम चल रहा है। मैं मौके पर आकर ही पूरी जानकारी दे पाऊंगा। लगभग एक महीने बाद मिलकर पूरे मामले पर विस्तार से चर्चा करेंगे। उन्होंने बातचीत के दौरान आरोपों पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी, बल्कि बाद में दस्तावेजों के साथ अपना पक्ष रखने की बात कही।
विधायक विक्रम मंडावी ने उठाए कई सवाल
निरीक्षण के बाद विधायक विक्रम मंडावी ने कहा कि यदि आदिवासी क्षेत्र में ग्रामसभा की अनुमति के बिना क्रशर प्लांट संचालित हो रहा है, तो इसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से सवाल किया कि क्या वन क्षेत्र में बिना संबंधित विभागों की अनुमति के क्रशर प्लांट चलाया जा सकता है? यदि ब्लास्टिंग हो रही है, तो क्या उसके लिए आवश्यक वैधानिक अनुमति ली गई है?
उन्होंने कहा कि यदि सभी कार्य नियमों के अनुसार हुए हैं, तो संबंधित विभागों को दस्तावेज सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। यदि कहीं नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई होनी चाहिए।

हरीश कवासी ने सरकार पर साधा निशाना
सुकमा जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हरीश कवासी ने आरोप लगाया कि ग्रामीणों की शिकायतों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कानून के दायरे में होना चाहिए और यदि कहीं अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो कांग्रेस आंदोलन जारी रखेगी।
गरियाबंद में आदिवासी विकास विभाग पर भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही के गंभीर आरोप
अब प्रशासन के सामने कई सवाल
अब इस पूरे मामले में जिला प्रशासन, खनिज विभाग, वन विभाग, प्रदूषण नियंत्रण मंडल और BRO के सामने कई महत्वपूर्ण प्रश्न हैं—
- क्या क्रशर प्लांट के लिए सभी आवश्यक अनुमतियां ली गई थीं?
- क्या ग्रामसभा और पंचायत की वैधानिक प्रक्रिया पूरी की गई?
- क्या गांव वालों से किए गए रोजगार और मूलभूत सुविधाओं के वादों का कोई रिकॉर्ड है?
- क्या परियोजना स्थल पर सूचना बोर्ड लगाया जाना आवश्यक था?
- क्या स्थानीय शिकायतों की जांच हुई?
- यदि जांच हुई तो उसकी रिपोर्ट क्या कहती है?
जनहित में निष्पक्ष जांच जरूरी
सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क निर्माण विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। इसलिए ऐसी परियोजनाओं में पारदर्शिता, कानून का पालन और जनता के प्रति जवाबदेही भी उतनी ही आवश्यक है।
गंगा प्रकाश का उद्देश्य किसी संस्था या व्यक्ति को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि जनहित से जुड़े उन सवालों को सामने लाना है जिनका जवाब जनता जानना चाहती है। अब जबकि इस मामले में ग्रामीणों के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों ने भी जांच की मांग की है और क्रशर संचालक ने विस्तृत पक्ष बाद में रखने की बात कही है, ऐसे में जिला प्रशासन, BRO तथा संबंधित विभागों से अपेक्षा है कि वे सभी आवश्यक दस्तावेजों और तथ्यों के साथ स्थिति स्पष्ट करें।
यदि सभी कार्य नियमों के अनुरूप हुए हैं तो इससे जनता का विश्वास मजबूत होगा, और यदि किसी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है तो नियमानुसार निष्पक्ष कार्रवाई होना सुशासन की कसौटी होगी।




