राजनांदगांव/दुर्ग (गंगा प्रकाश)। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले से एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें एक आदिवासी परिवार ने जमीन हड़पने, धमकी देने और कथित अपहरण जैसे आरोप लगाए हैं। मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल है और समाज के लोग निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम छुरिया डोंगरी (कैशो खैरी), थाना गेंडाटोला, तहसील छुरिया निवासी महेश मंडावी, जो पूर्व में ग्राम सरपंच भी रह चुके हैं और वर्तमान में उनकी बहू सरपंच है, कुछ वर्षों पूर्व रोजगार की तलाश में दुर्ग गए थे। वहां वे आरटीओ उड़नदस्ता कार्यालय में कार्यरत रहे। आरोप है कि नौकरी के दौरान उन पर अवैध वसूली से जुड़े कार्यों का दबाव बनाया गया और बाद में उन्हें नौकरी से हटा दिया गया।
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परिजनों एवं स्थानीय सूत्रों के अनुसार, नौकरी छोड़ने के बाद महेश मंडावी अपने गांव लौटकर खेती-किसानी करने लगे। आरोप है कि इसके बाद भी कुछ लोगों द्वारा उन पर लगातार दबाव बनाया जाता रहा। पीड़ित पक्ष का दावा है कि धमकी और भय का माहौल बनाकर उनकी लगभग 22 एकड़ भूमि अंबागढ़ क्षेत्र में एवं 7 एकड़ भूमि छुरिया क्षेत्र में एक आदिवासी महिला के नाम रजिस्ट्री कराई गई।
वहीं, अपुष्ट सूत्रों के हवाले से यह भी दावा किया जा रहा है कि 14 जून 2026 को महेश मंडावी के दो पुत्रों – ओम मंडावी और अरविंद मंडावी को कथित रूप से दुर्ग से रायपुर ले जाकर पूरी रात रखा गया। आरोप है कि शेष भूमि की रजिस्ट्री कराने के लिए दबाव बनाया गया और बाद में उन्हें छोड़ दिया गया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
सूत्रों का कहना है कि कथित घटनाओं के बाद परिवार भय के माहौल में है और खुलकर शिकायत दर्ज कराने से भी कतरा रहा है। वहीं क्षेत्र में इस मामले को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। समाज के लोगों द्वारा मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई जा रही है।
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हालांकि, समाचार लिखे जाने तक प्रशासन अथवा संबंधित अधिकारियों का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका है। आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना शेष है।
स्थानीय नागरिकों एवं सामाजिक संगठनों ने प्रशासन और संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष एवं तथ्यात्मक जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि सत्य सामने आ सके और दोषियों पर विधिसम्मत कार्रवाई हो सके।
