छुरा से दो किमी दूर तिलईदादर जंगल में अवैध खनन, तहसीलदार ने रुकवाया काम, बिना पंचनामा छोड़े जाने पर उठे सवाल

छुरा/गरियाबंद (गंगा प्रकाश)। जब 25 जनवरी को पूरा देश गणतंत्र दिवस समारोह की तैयारियों में पूरे जोश-खरोश के साथ जुटा हुआ था, तब शाम ढलते ही छुरा से लगे तिलईदादर जंगल क्षेत्र में बोर खनन माफिया सक्रिय हो गए। जिस समय सरकारी अमला परेड, मंच सज्जा और सुरक्षा व्यवस्था में व्यस्त था, उसी दौरान पाण्डुका वन परिक्षेत्र अंतर्गत तिलाई दादर बीट के कक्ष क्रमांक P-101 से लगे ऑरेंज एरिया में अवैध रूप से बोर खनन कार्य कराया जा रहा था।

छुरा नगर से लगभग दो किलोमीटर दूर स्थित इस जंगल क्षेत्र में चल रहे बोर खनन की सूचना मिलते ही छुरा तहसीलदार गेंदलाल साहु मौके पर पहुंचे और तत्काल कार्य रुकवाया गया। मौके पर मौजूद बोर मशीन पर राजीवलोचन बोरवेल्स, राजिम अंकित पाया गया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि बोर खनन कार्य उक्त फर्म द्वारा किया जा रहा था।

यह क्षेत्र वन विभाग के अंतर्गत आता है और पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील ऑरेंज जोन घोषित है, जहां बिना विधिवत अनुमति किसी भी प्रकार की खुदाई, खनन या भू-जल दोहन प्रतिबंधित है। इसके बावजूद जंगल से लगे इस हिस्से में भारी मशीनें पहुंचना और बोर खनन किया जाना, प्रशासनिक सतर्कता और वन सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

वन अधिकार और लगानी भूमि में चल रहा था कार्य

मौके पर पहुंचने के बाद तहसीलदार गेंदलाल साहु ने बताया कि जिस स्थान पर बोर खनन किया जा रहा था, वह भूमि वन अधिकार क्षेत्र एवं लगानी भूमि के अंतर्गत आती है। उन्होंने कहा कि प्रथम दृष्टया मामला गंभीर है और इसमें वन विभाग व राजस्व विभाग के समन्वय से बुधवार को आगे की विधिवत कार्रवाई की जाएगी।

तहसीलदार के अनुसार, यह जांच की जाएगी कि बोर खनन किसके आदेश पर कराया जा रहा था, अनुमति थी या नहीं, और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।

हालांकि, इस कार्रवाई के दौरान एक अहम पहलू यह रहा कि मौके पर मौजूद बोर खनन वाहन और मशीन को बिना पंचनामा तैयार किए ही वापस भेज दिया गया। नियमों के अनुसार, यदि वन भूमि या ऑरेंज एरिया में अवैध गतिविधि पकड़ी जाती है, तो मशीन जब्त कर पंचनामा बनाया जाना चाहिए। इस प्रक्रिया के पालन न होने से अब पूरे मामले की गंभीरता और निष्पक्ष कार्रवाई को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

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बीट गार्ड का बयान

तिलईदादर बीट के बीट गार्ड डोमन साहु ने बताया कि उन्हें बोर खनन की सूचना मिली थी, जिसके बाद वे तत्काल मौके पर पहुंचे। निरीक्षण में यह स्पष्ट हुआ कि संबंधित स्थल ऑरेंज एरिया में आता है। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी जानकारी दी, जिसके बाद तहसीलदार मौके पर पहुंचे और कार्य रुकवाया गया। आगे की कार्रवाई के संबंध में उन्होंने कहा कि यह उच्च अधिकारियों के स्तर पर तय होगी।

मीडिया की पड़ताल में बोर पूरा होने के संकेत

सूचना मिलते ही हमारे मीडिया कर्मी भी घटनास्थल पर पहुंचे और वहां की स्थिति का फोटो व वीडियो के माध्यम से दस्तावेजीकरण किया। मौके पर मौजूद हालात से यह स्पष्ट संकेत मिला कि बोर खनन कार्य पहले ही काफी हद तक, बल्कि लगभग पूरा किया जा चुका था।

संवाददाता के अनुसार, बोर स्थल के आसपास भारी मात्रा में खुदी हुई मिट्टी, गहरा गड्ढा और पानी का निकास साफ तौर पर दिखाई दे रहा था। इससे यह जाहिर होता है कि बोर खनन सफल रहा है और मशीनें संभवतः अंतिम चरण में थीं। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि यदि बोर पहले ही हो चुका है, तो अब प्रशासन इसे सील करने, बंद करने या निष्क्रिय करने को लेकर क्या ठोस कदम उठाएगा।

पर्यावरण और भू-जल पर खतरा

वन विशेषज्ञों का मानना है कि जंगल और ऑरेंज जोन में इस तरह का बोर खनन सीधे तौर पर वन संरक्षण अधिनियम और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम का उल्लंघन है। इससे क्षेत्र का भू-जल स्तर प्रभावित होता है, आसपास के पेड़-पौधों की जड़ें सूखने लगती हैं और वन्य जीवों के प्राकृतिक जलस्रोत संकट में पड़ जाते हैं।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस मामले में केवल औपचारिक कार्रवाई कर दी गई, तो बोर खनन माफिया के हौसले और बुलंद होंगे। उन्होंने मांग की है कि पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए, दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो और भविष्य में जंगल क्षेत्र में ऐसी गतिविधियों पर रोक के लिए स्थायी निगरानी व्यवस्था बनाई जाए।

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बुधवार की कार्रवाई पर टिकी निगाहें

फिलहाल प्रशासन ने बोर खनन रुकवा दिया है, लेकिन राजीवलोचन बोरवेल्स, राजिम की मशीन की मौजूदगी, बिना पंचनामा छोड़े गए वाहन और लगभग पूर्ण हो चुके बोर को लेकर कई सवाल अब भी अनुत्तरित हैं। अब पूरे क्षेत्र की निगाहें बुधवार को होने वाली प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं, जब यह तय होगा कि यह मामला केवल कागजी कार्रवाई बनकर रह जाएगा या वास्तव में दोषियों पर कानूनी शिकंजा कसेगा।


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