मनरेगा की मजदूरी और सामग्री भुगतान करीब 8 माह से लंबित होने का दावा, मूलभूत व 16वें वित्त आयोग की राशि समेत मानदेय भुगतान की मांग तेज
गरियाबंद (गंगा प्रकाश)। जिले की ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों की रफ्तार पर अब बकाया भुगतान का मुद्दा भारी पड़ने लगा है। लंबित राशि को लेकर जिला सरपंच संघ ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान करते हुए 2 नवंबर 2026 को जिला मुख्यालय में रैली और प्रदर्शन करने की तैयारी की है। आंदोलन के तहत चक्काजाम के बाद सरपंच कलेक्टोरेट पहुंचकर अपनी मांगें प्रशासन के सामने रखेंगे। ऐसे में अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आंदोलन से पहले जिम्मेदार महकमा भुगतान को लेकर कोई ठोस पहल करता है या नहीं।
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जिला सरपंच संघ गरियाबंद के अनुसार जिले की ग्राम पंचायतों में मनरेगा के तहत कराए गए कार्यों की मजदूरी एवं सामग्री भुगतान की करीब 30 करोड़ रुपये की राशि लंबित है। संघ का दावा है कि लगभग आठ महीने से भुगतान नहीं होने के कारण पंचायतों के सामने आर्थिक संकट जैसी स्थिति बन रही है। इसके साथ ही मूलभूत मद, 16वें वित्त आयोग की राशि, निर्माण कार्यों के बकाये तथा सरपंच, उपसरपंच और पंचों के मानदेय भुगतान का मामला भी लंबित बताया गया है।

संघ का कहना है कि कई पंचायतों में निर्माण कार्य पूरे होने के साथ मूल्यांकन एवं सत्यापन की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है, लेकिन पांच से छह महीने गुजरने के बाद भी संबंधित राशि नहीं मिली है। इससे न केवल आगामी विकास कार्यों की योजना प्रभावित हो रही है, बल्कि पंचायत प्रतिनिधियों को भी आर्थिक और प्रशासनिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
कमार भवन से शुरू होगी रैली
सरपंच संघ द्वारा पुलिस अधीक्षक गरियाबंद को प्रदर्शन की लिखित सूचना सौंप दी गई है। संघ के जिलाध्यक्ष हरीश साहू के मुताबिक 2 नवंबर को कमार भवन से रैली निकाली जाएगी। प्रस्तावित रैली गांधी मैदान और तिरंगा चौक होते हुए चक्काजाम के बाद कलेक्टर कार्यालय पहुंचेगी, जहां लंबित भुगतान सहित पंचायतों से जुड़ी विभिन्न समस्याओं को लेकर मांगें रखी जाएंगी।

सरपंच संघ ने शासन-प्रशासन से बकाया राशि का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित करने तथा पंचायतों की समस्याओं का निराकरण करने की मांग की है। अब इस आंदोलन का असर जिले की प्रशासनिक हलचल पर कितना पड़ेगा, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। वहीं प्रस्तावित चक्काजाम को देखते हुए आम नागरिकों को भी आवागमन में संभावित परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। प्रदर्शन के दौरान यातायात व्यवस्था को लेकर प्रशासन की तैयारी भी महत्वपूर्ण रहेगी।
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फिलहाल बकाया भुगतान को लेकर पंचायत प्रतिनिधियों का आक्रोश खुलकर सामने आ चुका है। अब सवाल यही है कि क्या मांगों पर समय रहते सुनवाई होगी, या फिर भुगतान की प्रतीक्षा कर रहीं पंचायतों की आवाज आंदोलन के जरिए और बुलंद होगी?





