पांच पंचायतों के ग्रामीणों का सहारा बदहाल, बोरियों में पड़ी लाखों की दवाइयों पर धूल की परत; जिम्मेदार अधिकारी बोले—जो छपना है छाप दें
बलरामपुर (गंगा प्रकाश)। सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को गांव-गांव तक पहुंचाने और ग्रामीणों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के दावों के बीच बलरामपुर जिले से सामने आई एक तस्वीर कई सवाल खड़े कर रही है। चलगली थाना क्षेत्र के रनहत स्थित शासकीय आयुर्वेदिक औषधालय में जहां मरीज इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, वहीं परिसर की बदहाली, गंदगी और दवाइयों के रखरखाव को लेकर गंभीर स्थिति सामने आने का दावा किया गया है।
बताया जा रहा है कि यह औषधालय वाशी, चंदौरा, रनहत, चलगली सहित करीब पांच ग्राम पंचायतों के हजारों ग्रामीणों के लिए स्वास्थ्य सुविधा का महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां प्रतिदिन लगभग 15 से 20 मरीज सर्दी-खांसी, बुखार, जोड़ों के दर्द सहित विभिन्न बीमारियों के उपचार के लिए पहुंचते हैं। औषधालय में आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी डॉ. एन.एस. टेकाम सहित चार कर्मचारियों की पदस्थापना होने की जानकारी सामने आई है।

गेट पर स्वागत नहीं, कीचड़ से सामना
औषधालय पहुंचने वाले मरीजों के लिए सबसे पहली परेशानी मुख्य द्वार पर ही दिखाई देने की बात कही गई है। परिसर के प्रवेश मार्ग पर पानी और कीचड़ जमा होने से मरीजों को इसी रास्ते से होकर अंदर जाना पड़ता है। बारिश के मौसम में स्थिति और खराब होने की बात कही जा रही है। बुजुर्गों और महिलाओं के लिए यह रास्ता विशेष रूप से परेशानी का कारण बन रहा है।
परिसर में गंदगी, शौचालय भी बदहाल
औषधालय के अंदर और आसपास साफ-सफाई की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि परिसर में जगह-जगह गंदगी फैली हुई है और शौचालय की स्थिति भी ठीक नहीं है। दुर्गंध के कारण मरीजों और उनके साथ आने वाले परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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स्वास्थ्य केंद्र में स्वच्छता व्यवस्था स्वयं सवालों के घेरे में हो तो संक्रमण से बचाव और स्वस्थ वातावरण उपलब्ध कराने के सरकारी दावे कितने प्रभावी हैं, यह जांच का विषय है।

सबसे बड़ा सवाल—दवाइयां मरीजों तक पहुंचीं या बोरी में ही पड़ी रहीं?
मामले का सबसे गंभीर पहलू औषधियों के रखरखाव से जुड़ा बताया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार शासन द्वारा ग्रामीण मरीजों के लिए उपलब्ध कराई गई आयुर्वेदिक दवाइयों को कथित तौर पर बोरियों में भरकर जमीन पर रखा गया है। दवाइयों पर धूल जमा होने और उनके उपयोग तथा एक्सपायरी की स्थिति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
यदि वास्तव में बड़ी मात्रा में दवाइयां इस तरह असुरक्षित तरीके से रखी गई हैं, तो यह पता लगाना जरूरी होगा कि उनका स्टॉक कब आया, कितनी मात्रा में आया, कितनी दवाइयां मरीजों को वितरित की गईं और वर्तमान में कितनी दवाइयां उपयोग योग्य हैं।
कैमरे के सामने अधिकारी ने नहीं दिया जवाब
औषधालय की व्यवस्थाओं को लेकर प्रभारी अधिकारी डॉ. एन.एस. टेकाम से पक्ष जानने का प्रयास किए जाने की बात सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कैमरे पर प्रतिक्रिया देने से इनकार करते हुए कहा—जो छपना है छाप लें, वीडियो-फोटो ले लें, इस संबंध में मैं कुछ नहीं बोलूंगा।
एक सरकारी स्वास्थ्य संस्थान की व्यवस्थाओं से जुड़े सवालों पर अधिकारी की ओर से सार्वजनिक रूप से जवाब नहीं दिए जाने से मामले को लेकर और सवाल खड़े हो गए हैं।
जांच का भरोसा, अब कार्रवाई का इंतजार
मामले की जानकारी जिला स्तर के अधिकारी अरविंद कुमार शर्मा तक पहुंचने पर उन्होंने जानकारी संज्ञान में आने की बात कहते हुए स्वयं जांच कराने और लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारी-कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
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अब सवाल सिर्फ रनहत के औषधालय की गंदगी का नहीं, बल्कि सरकारी दवाइयों के रखरखाव, मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं और जिम्मेदारी तय करने का भी है।
स्थानीय ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और जिला आयुर्वेद विभाग से तत्काल निरीक्षण कराकर औषधालय की साफ-सफाई, दवाइयों के स्टॉक और उनकी एक्सपायरी की जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस केंद्र पर पांच ग्राम पंचायतों के लोग इलाज के लिए निर्भर हैं, वहां मूलभूत सुविधाओं की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।
अब निगाह इस बात पर है कि खबर सामने आने के बाद रनहत आयुर्वेदिक औषधालय की तस्वीर बदलती है या फिर कीचड़, गंदगी और बोरियों में बंद दवाइयों की कहानी यूं ही जारी रहती है।





