निजी कृषि भूमि डूबान क्षेत्र में जाने का दावा, हक के लिए वर्षों से भटक रहे किसान; शासन-प्रशासन से दस्तावेजों की जांच कर मुआवजा दिलाने की मांग
ओमप्रकाश रजक
बकावंड(गंगा प्रकाश)। विकासखंड बकावंड के ग्राम बकावंड, हल्का नंबर 24, तहसील बकावंड स्थित अमरीगुड़ा तालाब निर्माण से प्रभावित किसानों का मुआवजे का मामला करीब तीन दशक बाद भी लंबित होने का दावा किया जा रहा है। किसानों के अनुसार तालाब निर्माण के दौरान उनकी निजी कृषि भूमि डूबान क्षेत्र में चली गई थी। उस समय क्षेत्र अविभाजित मध्यप्रदेश का हिस्सा था। वर्षों बीत जाने के बाद भी संबंधित किसानों को उनकी भूमि का उचित मुआवजा नहीं मिलने से वे अपने हक के लिए लगातार शासन-प्रशासन के कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं।
जीवन-यापन का सहारा थी कृषि भूमि
प्रभावित किसानों का कहना है कि उनकी कृषि भूमि परिवार के जीवन-यापन का प्रमुख साधन थी। तालाब निर्माण के बाद भूमि डूबान क्षेत्र में चली जाने से खेती का क्षेत्र प्रभावित हुआ और परिवारों के सामने आर्थिक कठिनाइयां खड़ी हुईं। किसानों का कहना है कि इतने लंबे समय बाद भी मुआवजे का समाधान नहीं होना उनके लिए गंभीर परेशानी का विषय है।
इन किसानों की जमीन डूबान क्षेत्र में जाने का दावा
किसानों द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार समन्दु पिता लखमु की खसरा नंबर 449/2 में 6.16 हेक्टेयर, सोनाधर पिता दसरु की खसरा नंबर 501 एवं 502/2 में 5.04 हेक्टेयर, रुकनी पति लछमन की खसरा नंबर 528/2 में 0.28 हेक्टेयर तथा कमली पति की खसरा नंबर 529/2 में 6.00 हेक्टेयर भूमि शामिल है।
👉 जरूर पढ़ें: स्कूल में सामग्री खरीदी के बिल, पेंटिंग और वाहन किराये का भुगतान… आखिर किस काम में खर्च हुई सरकारी रकम?
इसी प्रकार हरिबंधु पिता दसरथ की खसरा नंबर 530 में 2.062 हेक्टेयर, दसरथ पिता सुधु की खसरा नंबर 498 एवं 1499/2 में 1.075 हेक्टेयर तथा गुरुबारी/वेबा/मधु की खसरा नंबर 525 एवं 526/2 में 3.30 हेक्टेयर भूमि तालाब के डूबान क्षेत्र में जाने की बात किसानों ने कही है।
अभिलेखों की जांच कर मुआवजा दिलाने की मांग
प्रभावित किसानों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि अमरीगुड़ा तालाब निर्माण से संबंधित पुराने राजस्व अभिलेख, भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई, मुआवजा प्रकरण एवं अन्य उपलब्ध दस्तावेजों की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए। किसानों का कहना है कि यदि उनकी निजी भूमि तालाब निर्माण के डूबान क्षेत्र में गया है और मुआवजा लंबित है, तो पात्र किसानों को नियमानुसार उनका हक दिलाया जाए।
👉 जरूर पढ़ें: कबाड़ से जुगाड़ की उड़ान ने दिलाया राज्य का सम्मान, शिक्षक सुदामा लोधी को मिला ‘एजुकेशन स्कलप्टर अवार्ड 2026’
किसानों ने प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेते हुए स्थल एवं राजस्व अभिलेखों का परीक्षण कर लंबित मुआवजे का निराकरण करने की मांग की है। उनका कहना है कि तीन दशक से अधिक समय से लंबित मामले में अब उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि दस्तावेजों के आधार पर ठोस कार्रवाई और न्याय की अपेक्षा है।
