गणेश विसर्जन की झांकी देखने पहुंचे स्कूली छात्रों को पुलिस ने बनाया आरोपी? सहायक आयुक्त न्यायालय से करानी पड़ी जमानत
परिजनों का दावा—बच्चे केवल झांकी देखने पहुंचे थे; पुलिस कार्रवाई के बाद परिवारों में दहशत, 28 सितंबर की रात की कार्रवाई को लेकर उठ रहे कई सवाल
रायपुर/गोलबाजार (गंगा प्रकाश)। गणेश विसर्जन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस की सख्ती के बीच गोलबाजार थाना क्षेत्र में हुई कथित कार्रवाई अब कई सवालों के घेरे में आती दिखाई दे रही है। दूर-दराज क्षेत्रों से गणेश विसर्जन की झांकियां देखने और कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे कुछ स्कूली छात्रों को पुलिस द्वारा पकड़कर थाना ले जाने का मामला सामने आया है। परिजनों का आरोप है कि उनके बच्चे किसी मारपीट, हथियार या अन्य आपराधिक गतिविधि में शामिल नहीं थे, बल्कि अपने दोस्तों के साथ गणेश विसर्जन कार्यक्रम देखने पहुंचे थे।
मामला तब और गंभीर हो गया जब परिजनों को पता चला कि पुलिस के अनुसार उनके बच्चों को आरोपी के रूप में कार्रवाई का सामना करना पड़ा और बाद में उन्हें न्यायालयीन प्रक्रिया के माध्यम से जमानत करानी पड़ी। परिजनों के अनुसार बच्चों को सहायक आयुक्त न्यायालय से जमानत दिलानी पड़ी। इससे परिवारों में यह सवाल उठने लगा है कि आखिर जिन बच्चों को वे सामान्य स्कूली छात्र समझकर झांकी देखने भेज रहे थे, वे पुलिस रिकॉर्ड में आरोपी कैसे बन गए?
कड़ा पहनना बना कार्रवाई का आधार?
परिजनों और कुछ युवाओं के अनुसार, बच्चे गणेश विसर्जन की झांकी देखने पहुंचे थे। इसी दौरान कुछ बच्चों के हाथ में कड़ा देखकर पुलिस ने उन्हें रोक लिया। आरोप है कि पुलिस ने कड़ा पहने युवाओं को अपने साथ थाना ले जाकर कार्रवाई की।
यहां सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या हाथ में कड़ा पहनना अपने आप में अपराध है?
यदि किसी विशेष कड़े को लेकर पुलिस को संदेह था अथवा किसी वस्तु को हथियार के रूप में इस्तेमाल किए जाने की आशंका थी, तो पुलिस को उसकी जब्ती अथवा कानून के अनुसार कार्रवाई करने का अधिकार हो सकता है। लेकिन किसी स्कूली छात्र को केवल कड़ा पहनने के आधार पर अपराधी की श्रेणी में डालने की शिकायत सामने आना गंभीर विषय है।
👉 जरूर पढ़ें: बिलों की फाइल खुली तो उठे कई सवाल, अब जांच में क्या निकलेगा सच?
पुलिस के अनुसार आरोपी, परिवार के अनुसार छात्र
मामले में दो अलग-अलग तस्वीरें सामने आ रही हैं। पुलिस की कार्रवाई के अनुसार संबंधित बच्चों को आरोपी माना गया और उन्हें न्यायालयीन प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। वहीं बच्चों के परिजनों का कहना है कि उनके बच्चे स्कूली छात्र हैं और वे गणेश विसर्जन की झांकी देखने तथा दोस्तों के साथ कार्यक्रम में शामिल होने गए थे।
यही अंतर अब पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल बन गया है।
- क्या बच्चों के खिलाफ वास्तव में कोई अपराध दर्ज किया गया था?
- यदि अपराध दर्ज किया गया तो कौन-सी धाराओं में?
- क्या पुलिस ने बच्चों के पास से कोई आपत्तिजनक वस्तु बरामद की?
- क्या केवल कड़े के आधार पर कार्रवाई हुई या इसके अलावा भी पुलिस के पास कोई आधार था?
इन सवालों का जवाब पुलिस के आधिकारिक रिकॉर्ड और संबंधित न्यायालयीन दस्तावेजों से ही स्पष्ट हो सकेगा।
सहायक आयुक्त न्यायालय से जमानत—परिजनों की चिंता बढ़ी
परिजनों के अनुसार पुलिस कार्रवाई के बाद बच्चों को सीधे घर ले जाने की स्थिति नहीं बनी। उन्हें सहायक आयुक्त न्यायालय के समक्ष जमानत प्रक्रिया से गुजरना पड़ा।
बच्चों के माता-पिता के लिए यह स्थिति इसलिए भी चिंताजनक रही क्योंकि उनका कहना है कि उन्हें पहले यह जानकारी ही नहीं थी कि उनके बच्चे कहां हैं और किस मामले में पुलिस ने उन्हें पकड़ा है।
एक तरफ बच्चे पुलिस कार्रवाई में थे और दूसरी तरफ घर में माता-पिता मोबाइल पर बार-बार संपर्क करने का प्रयास कर रहे थे। मोबाइल बंद मिलने के कारण परिवारों की चिंता और बढ़ती गई।
बच्चा कहां है?—रातभर परेशान रहे माता-पिता
परिजनों का कहना है कि बच्चे देर रात तक घर नहीं लौटे तो उन्होंने फोन किया। मोबाइल बंद मिला। इसके बाद उनके दोस्तों से संपर्क किया गया। लेकिन कथित रूप से स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाई।
आखिरकार जब परिजनों ने स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाई तो उन्हें पता चला कि उनका बच्चा गोलबाजार पुलिस की कार्रवाई में है।
परिवारों का कहना है कि यदि पुलिस ने बच्चों को आरोपी के रूप में कार्रवाई में लिया था तो अभिभावकों को समय पर सूचना क्यों नहीं दी गई? खासकर यदि संबंधित छात्र नाबालिग थे तो उनके माता-पिता को जानकारी देना और उनके साथ निर्धारित कानूनी प्रक्रिया अपनाना अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है।
28 सितंबर की रात की कार्रवाई में क्या-क्या मिला?
28 सितंबर की रात गोलबाजार थाना क्षेत्र में पुलिस द्वारा बड़ी कार्रवाई किए जाने की चर्चा है। इसमें बड़ी मात्रा में कड़े, शराब की बोतलें, चाकू-सुरी तथा अन्य सामान बरामद किए जाने की बात कही जा रही है।
लगभग 400 किलो कड़े की जब्ती की बात भी सामने आ रही है। यदि यह आंकड़ा पुलिस की आधिकारिक जब्ती सूची से पुष्ट होता है तो यह महत्वपूर्ण कार्रवाई होगी।
- लेकिन सवाल यह है कि इन वस्तुओं की बरामदगी किन लोगों से हुई?
- कितने लोगों को आरोपी बनाया गया?
- कितने लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया?
- कितने लोगों को गिरफ्तार किया गया?
- और कितने लोगों को केवल समझाइश देकर छोड़ दिया गया?
असली सवाल—कड़ा, हथियार या सिर्फ शक?
यदि पुलिस की कार्रवाई का उद्देश्य हथियार लेकर घूमने वाले अथवा मारपीट करने वाले लोगों पर अंकुश लगाना था तो ऐसी कार्रवाई का स्वागत किया जा सकता है। लेकिन यदि सामान्य रूप से कड़ा पहने हुए स्कूली छात्र भी उसी कार्रवाई में आरोपी बना दिए गए, तो यह जांच का विषय जरूर बनता है।
क्योंकि किसी छात्र की पहचान उसके हाथ में पहने आभूषण से नहीं, बल्कि उसके वास्तविक कृत्य से होनी चाहिए।
यदि किसी बच्चे ने कानून तोड़ा है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन यदि बच्चा केवल कार्यक्रम देखने पहुंचा था और उसके खिलाफ कोई आपत्तिजनक सामग्री नहीं मिली, तो उसके मामले की परिस्थितियों को स्पष्ट किया जाना आवश्यक है।
पैसे देने पर छोड़ने के आरोप, लेकिन पुष्टि जरूरी
कुछ युवाओं द्वारा नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर यह भी आरोप लगाया गया है कि कार्रवाई के दौरान कुछ लोगों को कथित रूप से पैसे देने के बाद छोड़ दिया गया, जबकि कुछ दूर-दराज से आए छात्र पुलिस कार्रवाई की जद में आ गए।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए यह आरोप भी पुलिस प्रशासन के समक्ष जांच का विषय है। यदि आरोप निराधार हैं तो पुलिस को तथ्य सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और यदि कोई अनियमितता हुई है तो निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
पुलिस की कार्रवाई और बच्चों का भविष्य
पुलिस का काम अपराध रोकना और कानून-व्यवस्था कायम रखना है। गणेश विसर्जन जैसे बड़े आयोजनों में पुलिस की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। शराब, हथियार, मारपीट और उपद्रव करने वालों के खिलाफ कार्रवाई आवश्यक हो सकती है।
👉 जरूर पढ़ें: स्कूल में सामग्री खरीदी के बिल, पेंटिंग और वाहन किराये का भुगतान… आखिर किस काम में खर्च हुई सरकारी रकम?
लेकिन इसी कार्रवाई के दौरान यदि स्कूली बच्चे भी आरोपी बनते हैं और उन्हें न्यायालय से जमानत करानी पड़ती है, तो मामला केवल पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं रहता, बल्कि बच्चों के भविष्य और परिवार की चिंता से भी जुड़ जाता है।
एक बच्चे के माता-पिता के लिए यह सुनना कि उनका बच्चा पुलिस के अनुसार आरोपी है और उसकी जमानत करानी पड़ेगी, अपने आप में बेहद चिंताजनक स्थिति है।
अब इन सवालों के जवाब जरूरी
गोलबाजार पुलिस की 28 सितंबर की कार्रवाई को लेकर अब सवालों की सूची लंबी होती जा रही है—
- क्या संबंधित स्कूली छात्रों के खिलाफ अपराध दर्ज किया गया?
- यदि हां, तो किन धाराओं के तहत?
- क्या बच्चे नाबालिग थे या बालिग?
- क्या उनके अभिभावकों को तत्काल सूचना दी गई?
- क्या बच्चों के पास से कोई हथियार या आपत्तिजनक सामग्री बरामद हुई?
- क्या केवल हाथ में कड़ा होने के कारण किसी छात्र के खिलाफ कार्रवाई हुई?
- 400 किलो कड़े की जब्ती का वास्तविक विवरण क्या है?
- शराब और चाकू-सुरी की जब्ती में कितने आरोपी बनाए गए?
- बच्चों को सहायक आयुक्त न्यायालय से जमानत क्यों करानी पड़ी?
- क्या सभी आरोपियों के साथ समान कार्रवाई की गई?
इन सवालों का जवाब पुलिस की आधिकारिक जानकारी और संबंधित न्यायालयीन दस्तावेजों से ही स्पष्ट हो सकेगा।
कड़ा पहनने से लेकर न्यायालय तक—आखिर बीच में ऐसा क्या हुआ?
गणेश विसर्जन की एक रात। हाथ में कड़ा पहने कुछ स्कूली छात्र। झांकी देखने और दोस्तों के साथ समय बिताने निकले बच्चे। अचानक पुलिस की कार्रवाई। थाना। फिर आरोपी के रूप में प्रक्रिया और अंततः सहायक आयुक्त न्यायालय से जमानत।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—
क्या इन बच्चों का अपराध सिर्फ इतना था कि वे कड़ा पहनकर गणेश विसर्जन की झांकी देखने पहुंचे थे, या पुलिस के पास उनके खिलाफ इससे कहीं अधिक ठोस आधार था?
इस सवाल का जवाब सामने आना जरूरी है।
गंगा प्रकाश इस पूरे मामले में पुलिस का आधिकारिक पक्ष भी प्रकाशित करेगा। पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई, दर्ज प्रकरण, जब्ती सूची और न्यायालयीन प्रक्रिया की वास्तविक जानकारी सामने आने के बाद मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।
