सेवा सेतु शिविर में गरमाया माहौल, मंत्री दयालदास बघेल ने संभाली स्थिति; 36 गांवों के संपर्क से लेकर अधिकारियों की उपलब्धता तक उठे मुद्दे, खोकसरा को मिली 10 लाख की सौगात
देवभोग (गंगा प्रकाश)। ग्राम पंचायत खोकसरा में आयोजित सेवा सेतु कार्यक्रम उस समय चर्चा में आ गया, जब पूर्व संसदीय सचिव एवं पूर्व विधायक गोवर्धन सिंह मांझी उद्बोधन देने वालों की सूची में अपना नाम नहीं होने पर नाराज हो गए। कार्यक्रम में प्रभारी मंत्री एवं खाद्य मंत्री दयालदास बघेल की मौजूदगी में सामने आए इस घटनाक्रम के बाद कुछ देर के लिए माहौल गरमा गया। मंत्री के हस्तक्षेप के बाद मांझी को बोलने का अवसर मिला, तो उन्होंने क्षेत्र की बुनियादी समस्याओं से लेकर विभिन्न विभागों में अधिकारियों की उपलब्धता तक कई अहम मुद्दे उठा दिए।
कार्यक्रम में एक ओर शासन की योजनाओं और विकास कार्यों की घोषणाएं हुईं, वहीं दूसरी ओर जनप्रतिनिधि द्वारा उठाए गए सवालों ने प्रशासन के सामने क्षेत्र की समस्याओं के समाधान की चुनौती भी रखी।
उद्बोधन सूची से नाम गायब, मंच पर जताई नाराजगी
कार्यक्रम के दौरान अतिथियों के उद्बोधन का क्रम चल रहा था। इसी बीच जब गोवर्धन सिंह मांझी का नाम वक्ताओं की सूची में नहीं आया, तो उन्होंने मंच से ही अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) के समक्ष यह विषय उठाते हुए कहा कि क्षेत्र से जुड़े जनप्रतिनिधियों को कार्यक्रम में अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए।
मंत्री दयालदास बघेल की मौजूदगी में हुई इस घटना ने कुछ समय के लिए सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा। इसके बाद मंत्री ने हस्तक्षेप करते हुए मांझी को उद्बोधन देने की अनुमति दी। बोलने का अवसर मिलने पर उन्होंने क्षेत्र की समस्याओं को प्रमुखता से सामने रखा।
36 गांवों का बरसात में टूट जाता है संपर्क
पूर्व विधायक गोवर्धन सिंह मांझी ने बेलाट नाले पर पुल निर्माण का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि बरसात के दिनों में पुल नहीं होने के कारण क्षेत्र के करीब 36 गांवों का संपर्क टूट जाता है। इससे ग्रामीणों को आवागमन और दैनिक जरूरतों से जुड़े कार्यों में परेशानी होती है।
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उन्होंने बेलाट नाले पर जल्द पुल निर्माण कराने की मांग रखी और इस विषय को सांसद के समक्ष भी उठाने की बात कही। अब ग्रामीणों की नजर इस बात पर है कि लंबे समय से प्रभावित बताए जा रहे इन गांवों को राहत दिलाने के लिए पुल निर्माण की दिशा में कब ठोस पहल होती है।
खुटगांव-खोकसरा सड़क की बदहाली का मुद्दा
मांझी ने खुटगांव से खोकसरा तक जर्जर हो चुकी सड़क का मुद्दा भी मंच से उठाया। उन्होंने कहा कि सड़क की खराब स्थिति के कारण ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने संबंधित सड़क का निर्माण जल्द कराने की मांग रखी, ताकि लोगों को राहत मिल सके।
एक तरफ गांवों में विकास कार्यों की घोषणाएं हो रही हैं, तो दूसरी तरफ ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क और पुल जैसी बुनियादी सुविधाओं की मांग यह सवाल खड़ा करती है कि लंबित समस्याओं का समाधान कब तक धरातल पर दिखाई देगा।
देवभोग में अधिकारियों की उपलब्धता पर सवाल
अपने उद्बोधन में पूर्व विधायक ने देवभोग विकासखंड के विभिन्न विभागों में अधिकारियों की उपलब्धता का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने जल संसाधन विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE), कृषि विभाग और लोक निर्माण विभाग (PWD) सहित अन्य विभागों का उल्लेख किया।
मांझी ने कहा कि संबंधित विभागों में पदस्थ अनुविभागीय अधिकारियों (SDO) की नियमित उपलब्धता को लेकर शिकायतें सामने आती हैं। ऐसी स्थिति में ग्रामीणों को अपनी समस्याओं के निराकरण के लिए अधिकारियों से मिलने में कठिनाई हो सकती है।
उन्होंने जिला कलेक्टर से संबंधित विभागों में अधिकारियों की उपस्थिति और कार्यप्रणाली की जांच कराने का अनुरोध किया। साथ ही कहा कि यदि जांच में लापरवाही सामने आती है, तो नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए।
हालांकि, अधिकारियों की अनुपलब्धता से जुड़ी शिकायतों की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। ऐसे में प्रशासन की ओर से इन मुद्दों पर क्या कदम उठाए जाते हैं, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
मंत्री का भरोसा—हर आवेदन की होगी मॉनिटरिंग
सेवा सेतु कार्यक्रम में प्रभारी मंत्री दयालदास बघेल ने अधिकारियों को शिविर में प्राप्त प्रत्येक आवेदन की नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सेवा और सुशासन के संकल्प के अनुरूप सेवा सेतु अभियान के माध्यम से लोगों की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
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मंत्री ने स्पष्ट किया कि यदि किसी आवेदन का तत्काल निराकरण संभव नहीं है, तो संबंधित आवेदक को इसकी वजह और समाधान की संभावित समय-सीमा स्पष्ट रूप से बताई जाए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि शिविर में प्राप्त एक भी आवेदन कचरे की टोकरी में नहीं जाएगा।
मंत्री के इस आश्वासन के बाद अब ग्रामीणों की अपेक्षा है कि आवेदन केवल दर्ज करने तक सीमित न रहें, बल्कि उनकी नियमित समीक्षा हो और पात्र हितग्राहियों की समस्याओं का समयबद्ध निराकरण भी सुनिश्चित किया जाए।
खोकसरा को 10 लाख की सौगात, पंचायत भवन और अमृत सरोवर की भी स्वीकृति
कार्यक्रम के दौरान प्रभारी मंत्री ने खोकसरा गांव के लिए कई विकास कार्यों की घोषणाएं कीं। इनमें 10 लाख रुपये की लागत से गली कंक्रीटीकरण, नवीन ग्राम पंचायत भवन, बोर खनन और अमृत सरोवर निर्माण की स्वीकृति शामिल है।
वहीं, सागौनबाड़ी में बिजली व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए नया ट्रांसफार्मर लगाने की घोषणा भी की गई। इन घोषणाओं से संबंधित गांवों में विकास और बुनियादी सुविधाओं में सुधार की उम्मीद जगी है।
हालांकि, ग्रामीणों के लिए घोषणाओं के साथ-साथ इन कार्यों की स्वीकृति, निर्माण प्रक्रिया शुरू होने और समय पर पूरा होने की स्थिति भी महत्वपूर्ण होगी।
घोषणाओं के बीच लंबित मांगों पर टिकी निगाहें
खोकसरा में आयोजित सेवा सेतु कार्यक्रम में एक ओर विकास कार्यों की सौगात मिली, तो दूसरी ओर पूर्व विधायक गोवर्धन सिंह मांझी ने बेलाट नाले पर पुल, खुटगांव-खोकसरा सड़क और अधिकारियों की नियमित उपलब्धता जैसे मुद्दे उठाए।
उद्बोधन सूची को लेकर शुरू हुआ घटनाक्रम अंततः क्षेत्रीय समस्याओं को सामने रखने का अवसर बन गया। मंत्री ने प्रत्येक आवेदन की मॉनिटरिंग और समयबद्ध समाधान का भरोसा दिया है। अब यह देखना होगा कि शिविर में प्राप्त आवेदनों के साथ-साथ मंच से उठाई गई लंबित समस्याओं पर प्रशासन कितनी तेजी से कार्रवाई करता है।
सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या 36 गांवों को बरसात में संपर्क टूटने की समस्या से मुक्ति मिलेगी और क्या देवभोग के विभिन्न विभागों में अधिकारियों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी? इन सवालों का जवाब घोषणाओं से आगे बढ़कर धरातल पर होने वाली कार्रवाई से ही मिलेगा।
