धार्मिक आस्था और पर्यावरण संतुलन का संदेश लेकर गरजा नाग पंचमी का पर्व, गूंज उठा शासकीय स्कूल बिजली परिसर
गरियाबंद/फिंगेश्वर(गंगा प्रकाश)। धार्मिक आस्था और पर्यावरण संतुलन का संदेश भारत विविध पर्व-त्योहारों की भूमि है, जहां हर उत्सव जीवन में आध्यात्मिक ऊर्जा, सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक एकजुटता का संदेश लेकर आता है। ऐसे ही पावन पर्वों में से एक नाग पंचमी का उत्सव मंगलवार को शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, बिजली (फिंगेश्वर) में पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता के महत्व को भी उजागर करता दिखा।

पूजा-अर्चना और आस्था का माहौल
विद्यालय परिसर में छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और प्राचार्य पूरन लाल साहू की उपस्थिति में नाग देवता की विधिवत पूजा-अर्चना की गई। धूप-दीप और मंत्रोच्चार के बीच जब नाग देवता का आवाहन हुआ, तो संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत हो उठा।
प्राचार्य पूरन लाल साहू ने अपने संबोधन में कहा — “नाग पंचमी पूजा धार्मिक आस्था का प्रतीक है। नागदेवता केवल पूज्य नहीं, बल्कि हमारे खेत-खलिहानों और पर्यावरण के भी रक्षक हैं। नाइट्रोजन चक्र को संतुलित कर वे कृषि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।”
उन्होंने यह भी बताया कि सांप जैसे जीव खेतों में रहने वाले चूहों और अन्य फसल नष्ट करने वाले जीवों को नियंत्रित करते हैं, जिससे किसानों को सीधा लाभ मिलता है। इस दृष्टि से नाग देव वास्तव में ‘किसानों के मित्र’ हैं।
परंपरा और पर्यावरण का अद्भुत संगम
विद्यालय के व्याख्याता दिनेश कुमार साहू ने नाग पंचमी के पौराणिक और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा — “हर साल सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी मनाई जाती है। यह पर्व हमें सिखाता है कि हमें प्रकृति और जीव-जंतुओं के साथ तालमेल बनाकर जीना चाहिए। नाग पूजा केवल परंपरा नहीं, एक चेतना है जो हमें पर्यावरण संतुलन की ओर प्रेरित करती है।”
छात्राओं ने दिखाई नेतृत्व क्षमता
कार्यक्रम का संचालन बेहद सुंदर और प्रभावशाली ढंग से कक्षा बारहवीं की छात्रा हसीना निषाद ने किया। उन्होंने न केवल कार्यक्रम को सजाया-संवारा, बल्कि अपनी नेतृत्व क्षमता से सभी का ध्यान भी आकर्षित किया।
विशिष्ट उपस्थिति और सहयोग
इस अवसर पर विद्यालय के समस्त स्टाफ और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। जिनमें प्रमुख रूप से नरेन्द्र कुमार वर्मा, योगेश सोनकर, नकुल राम साहू, रुद्र प्रताप साहू, दुष्यंत कुमार साहू, तोमन राम साहू, कीर्ति निषाद आदि शिक्षक व सहयोगीगण सम्मिलित रहे। सभी ने मिलकर इस धार्मिक आयोजन को सफल और यादगार बनाया।
संदेश स्पष्ट — नाग देवता केवल पूज्य नहीं, प्रकृति के प्रहरी भी हैं
इस आयोजन ने न केवल छात्रों को सांस्कृतिक विरासत से जोड़ा, बल्कि पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी बढ़ाई। आज के युग में जब प्रकृति के प्रति मानव का संतुलन डगमगा रहा है, ऐसे आयोजनों से बच्चों में संरक्षण की भावना विकसित होती है।
नाग पंचमी का यह आयोजन एक उत्कृष्ट उदाहरण है कि शिक्षा केवल पुस्तकों में नहीं, बल्कि संस्कृति और प्रकृति के प्रति समर्पण में भी निहित है।