परिजनों का आरोप– इंजेक्शन के कुछ ही मिनट बाद हुई तबीयत खराब, राजिम अस्पताल में डॉक्टरों ने किया मृत घोषित; ग्रामीणों ने उच्चस्तरीय जांच, दस्तावेजों की पड़ताल और स्वास्थ्य विभाग की जवाबदेही तय करने की उठाई मांग
गरियाबंद/कोपरा (गंगा प्रकाश)। नगर पंचायत कोपरा में लगभग एक माह पूर्व हुई 43 वर्षीय संतोष तारक की मौत अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। इस घटना को लेकर परिजनों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। उनका आरोप है कि पेट दर्द एवं गैस की शिकायत होने पर संतोष तारक अपनी पत्नी के साथ नगर पंचायत कोपरा में उपचार कर रहे एक कथित झोलाछाप चिकित्सक के पास पहुंचे थे। वहीं उपचार के दौरान लगाए गए इंजेक्शन के कुछ ही मिनट बाद उनकी हालत तेजी से बिगड़ गई और बाद में राजिम शासकीय अस्पताल में चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद से ग्रामीण संबंधित व्यक्ति की चिकित्सा योग्यता, पंजीयन, लाइसेंस तथा अन्य दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

परिजनों के अनुसार, संतोष तारक पूरी तरह होश में थे और सामान्य रूप से इलाज कराने पहुंचे थे। आरोप है कि संबंधित व्यक्ति ने उन्हें इंजेक्शन लगाया। इंजेक्शन लगने के लगभग 10 मिनट के भीतर ही उन्हें तेज घबराहट, बेचैनी, उल्टी और चक्कर आने लगे। उन्होंने अपनी पत्नी से कहा कि उनकी तबीयत अचानक बिगड़ रही है। कुछ ही देर बाद वे बेहोश हो गए। इसके बाद उन्हें वाहन से तत्काल राजिम शासकीय अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
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पोस्टमार्टम नहीं होने पर भी उठे सवाल
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में मृत्यु घोषित होने के बाद भी शव का पोस्टमार्टम नहीं कराया गया। उनका कहना है कि उन्हें समझाकर और विभिन्न कारण बताकर वापस गांव ले जाया गया। अब ग्रामीण इस पूरे घटनाक्रम की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि पोस्टमार्टम कराया जाता तो मृत्यु के वास्तविक कारणों का पता चल सकता था।

गांव की बैठक में भी गूंजा मामला
घटना के बाद गांव में ग्रामीणों की बैठक आयोजित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित व्यक्ति पहली बैठक में उपस्थित हुआ था, लेकिन बाद में दूसरी बैठक में शामिल होने के बजाय अपनी ओर से संदेश भिजवा दिया कि वह बैठक में नहीं आएगा। ग्रामीणों का कहना है कि इस रवैये से लोगों में और अधिक नाराजगी बढ़ गई तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग और तेज हो गई।
डिग्री, लाइसेंस और मेडिकल पंजीयन की जांच की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित व्यक्ति लंबे समय से क्षेत्र में एलोपैथिक उपचार कर रहा है। ऐसे में यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि उसके पास एलोपैथिक चिकित्सा करने की वैध डिग्री है या नहीं, वह मेडिकल काउंसिल में पंजीकृत है अथवा नहीं, उसके पास उपचार करने का वैध लाइसेंस है या नहीं तथा वह किस आधार पर मरीजों का इलाज कर रहा था। साथ ही उसके स्थायी निवास, पहचान एवं अन्य दस्तावेजों की भी जांच कराने की मांग की गई है।

अगस्त 2025 की घटना का भी दिया हवाला
ग्रामीणों ने बताया कि अगस्त 2025 में ग्राम पंचायत छिंदौला के आश्रित ग्राम पेंड्रा में भी कथित झोलाछाप उपचार के दौरान एक मरीज की मौत हुई थी। उस मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी। ग्रामीणों का कहना है कि यदि उस समय प्रभावी कार्रवाई होती तो आज ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होती। उनका कहना है कि लगातार सामने आ रही घटनाएं ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध चिकित्सा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा रही हैं।
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ग्रामीण क्षेत्रों में खुलेआम चल रहा कथित अवैध उपचार
ग्रामीणों का आरोप है कि जिले के कई गांवों में बिना वैध चिकित्सा योग्यता वाले लोग खुलेआम एलोपैथिक दवाइयां दे रहे हैं, इंजेक्शन लगा रहे हैं, ग्लूकोज की बोतल चढ़ा रहे हैं और गंभीर मरीजों का उपचार कर रहे हैं। हालत बिगड़ने पर मरीजों को सरकारी अस्पताल भेज दिया जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि गरीब और अशिक्षित लोग इन्हें डॉक्टर समझकर उपचार करा लेते हैं, जिससे कई बार गंभीर परिणाम सामने आते हैं।
स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर भी उठे सवाल
ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि विभाग समय-समय पर निजी क्लीनिकों, उपचार केंद्रों तथा चिकित्सा कार्य कर रहे लोगों की डिग्री, पंजीयन और लाइसेंस की नियमित जांच करता तो ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती। ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग की निष्क्रियता के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में कथित झोलाछापों का नेटवर्क लगातार फैलता जा रहा है।
प्रभावशाली लोगों के संरक्षण का भी आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ प्रभावशाली लोगों के संरक्षण के कारण ऐसे मामलों में प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाती। उनका कहना है कि यदि एक व्यक्ति की मौत के बाद भी जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं होती तो भविष्य में भी गरीब और निर्दोष लोगों की जान जोखिम में पड़ती रहेगी।
उच्चस्तरीय और वैज्ञानिक जांच की मांग
ग्रामीणों एवं परिजनों ने मांग की है कि संतोष तारक की मौत की पूरे घटनाक्रम सहित उच्चस्तरीय, निष्पक्ष और वैज्ञानिक जांच कराई जाए। उपचार में उपयोग किए गए इंजेक्शन एवं दवाओं की जांच, उपचार प्रक्रिया की समीक्षा तथा संबंधित व्यक्ति की चिकित्सा योग्यता की विधिवत पड़ताल की जाए। यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही अथवा अनियमितता सामने आती है तो संबंधित लोगों के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही पूरे जिले में विशेष अभियान चलाकर बिना वैध योग्यता चिकित्सा कार्य करने वाले लोगों की पहचान कर उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को इस प्रकार की दुखद घटना का सामना न करना पड़े।




