छुरा (गंगा प्रकाश)। रीपा योजना में करोड़ों का घोटाला ! गरियाबंद जिले के आदिवासी बाहुल्य ब्लॉक छुरा का सांकरा क्लस्टर एक बड़े भ्रष्टाचार की सुर्खियों में है। राज्य सरकार द्वारा महिलाओं और युवाओं को स्वरोजगार दिलाने के उद्देश्य से शुरू की गई रीपा (RIPA) योजना – महात्मा गांधी ग्रामीण औद्योगिक पार्क योजना में करोड़ों की राशि खर्च होने के बावजूद धरातल पर न तो रोजगार दिख रहा है और न ही कोई उत्पादन इकाई।

स्थानीय स्तर पर जिम्मेदार सरपंच और सचिव पर गंभीर आरोप लगे हैं कि उन्होंने मिलकर शासन से स्वीकृत राशि का गबन किया और गुणवत्ताहीन निर्माण कार्य के साथ-साथ फर्जी बिलों के जरिए लाखों का आहरण कर लिया।

योजना का उद्देश्य और जमीनी हकीकत

रीपा योजना का उद्देश्य ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को स्वरोजगार उपलब्ध कराना, कौशल प्रशिक्षण देना, औद्योगिक पार्क स्थापित करना और स्थानीय उत्पादों को बाजार से जोड़ना था।

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लेकिन हकीकत यह है कि—

  1. सांकरा क्लस्टर के आजीविका भवन में योजना के तहत करीब 2 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई।
  2. निर्माण कार्य एजेंसी ने गुणवत्ता से समझौता कर निम्नस्तरीय कार्य किया।
  3. फर्जी बिल और कागजी खर्च दिखाकर लाखों रुपये आहरण कर लिए गए।
  4. आज तक क्लस्टर क्षेत्र में एक भी स्वरोजगार इकाई शुरू नहीं हो पाई।
  5. ग्रामीण युवा और महिलाएं अब भी रोजगार के इंतजार में हैं।

सचिव का खेल और तबादला नीति की अनदेखी

ग्रामीणों का आरोप है कि सांकरा क्लस्टर का सचिव सालों से एक ही जगह जमे हुए हैं। शासन की तबादला नीति के बावजूद उन्हें वहीं रखा गया है। इसी वजह से स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार और मनमानी का बोलबाला है।

अधिकारियों से पक्ष जानना चाहा, मिला टालमटोल जवाब

जब इस मामले पर संकुल समन्वयक झरना साहू से मोबाइल पर संपर्क करने की कोशिश की गई तो उनका मोबाइल अनरीचेबल बताया गया।

वहीं बीपीएम सुभाष निर्मालकर से बात करने पर उन्होंने भी जवाब देने से कतराते हुए कहा— “आपके पास कौन शिकायत की और कैसे शिकायत हुई है, मैं आपको किस तरह से बताऊं। आप शिकायतकर्ता का नाम बताएं, तब ही मैं कुछ बता पाऊंगा।”

 शिकायत पहुंची नया रायपुर – इंद्रावती भवन

भ्रष्टाचार की आशंका को देखते हुए ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की शिकायत नया रायपुर स्थित इंद्रावती भवन में दर्ज कराई है। शिकायत में साफ तौर पर कहा गया है कि—

  1. रीपा योजना के तहत सांकरा क्लस्टर में करोड़ों रुपये की गड़बड़ी हुई है।
  2. गुणवत्ताहीन निर्माण और फर्जी बिलों से राशि का आहरण हुआ है।
  3. सचिव और सरपंच ने मिलकर लाखों का डांका डाला है।

रीपा योजना का लक्ष्य ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को सशक्त बनाना था, लेकिन सांकरा क्लस्टर का मामला बताता है कि किस तरह भ्रष्ट तंत्र ने विकास योजनाओं को अपनी जेब भरने का जरिया बना लिया है।

अब सवाल है कि क्या शासन इस बड़े घोटाले पर चुप बैठा रहेगा या फिर सचमुच जांच कर दोषियों को सजा देगा?

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ग्रामीणों की मांग:

  • दोषी सचिव और सरपंच को तत्काल हटाया जाए।
  • फर्जी बिल और आहरण की ऑडिट जांच कराई जाए।
  • दोषियों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज हो।
  • योजना को सही दिशा में लागू कर वास्तविक स्वरोजगार उपलब्ध कराया जाए।


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