8 ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों ने 17 सूत्रीय मांगों को लेकर खोला मोर्चा
राधे पटेल
गरियाबंद(गंगा प्रकाश)। जिले के गोना समाधान शिविर (सुशासन तिहार) में शुक्रवार को एक अलग ही तस्वीर देखने को मिली। मंच पर लगी कुर्सियां खाली रह गईं, जबकि जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधि ग्रामीणों के बीच जमीन पर बैठकर उनकी समस्याएं सुनते नजर आए। शिविर में पहली बार ऐसा दृश्य देखने को मिला, जब अधिकारी और ग्रामीण आमने-सामने बैठकर समस्याओं पर सीधा संवाद करते दिखाई दिए।
शिविर में गरियाबंद कलेक्टर भगवान सिंह उईके, पुलिस अधीक्षक वेदव्रत सिरमौर, जिला पंचायत अध्यक्ष गौरी शंकर कश्यप, जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम, जिला पंचायत सदस्य लोकेश्वरी नेताम, एसडीएम हितेश्वरी बाघे एवं तहसीलदार सुशील कुमार भोई सहित जिला प्रशासन के अधिकारी मौजूद रहे। सभी अधिकारियों ने ग्रामीणों के बीच बैठकर समस्याओं का अवलोकन किया और कई मामलों में मौके पर ही समाधान की कार्रवाई शुरू की।
नारों के साथ पहुंचे हजारों ग्रामीण
8 ग्राम पंचायतों के हजारों ग्रामीण “हम अपना अधिकार मांगते हैं, नहीं किसी से भीख मांगते” के नारों के साथ रैली के रूप में समाधान शिविर पहुंचे। ग्रामीणों ने अपनी 17 प्रमुख मांगों को प्रशासन के सामने रखते हुए वर्षों से लंबित समस्याओं के निराकरण की मांग की।
ग्रामीणों ने बिजली विहीन गांवों में शीघ्र विद्युत व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग उठाई। वहीं शोभा क्षेत्र के अस्पताल में स्टाफ की कमी को लेकर ग्रामीणों ने नाराजगी जताते हुए स्थायी स्वास्थ्य व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग रखी।
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अधूरी नल-जल योजना पर नाराजगी
शिविर में अधूरी पड़ी नल-जल योजना भी प्रमुख मुद्दा रही। ग्रामीणों ने कहा कि कई गांवों में पानी की टंकियां अधूरी पड़ी हैं और नियमित पेयजल आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इस पर कलेक्टर ने अधिकारियों को कार्य शीघ्र पूर्ण कराने के निर्देश दिए तथा कहा कि समय पर कार्य पूर्ण नहीं होने पर संबंधित ठेकेदार का टेंडर निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी।
चार वर्षों से अधूरा पंचायत भवन
ग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्र में कई पंचायत भवन और स्कूल भवन वर्षों से अधूरे पड़े हैं। स्कूल जतन योजना के तहत स्वीकृत भवनों में कहीं केवल नींव खोदकर काम छोड़ दिया गया है तो कहीं छत ढलाई का कार्य वर्षों से अधूरा है। इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों ने 30 जून तक सभी अधूरे निर्माण कार्य पूर्ण कराने की मांग की।
सड़क और वन अधिकार के मुद्दे भी उठे
ग्रामीणों ने जर्जर सड़कों की मरम्मत कराने की मांग भी प्रशासन के सामने रखी। उनका कहना था कि खराब सड़कों के कारण आवागमन में भारी परेशानी होती है। साथ ही उदंती अभयारण्य एवं टाइगर रिजर्व क्षेत्र होने के कारण नई सड़कों की स्वीकृति में बाधाएं आ रही हैं। ग्रामीणों ने कलेक्टर से मुख्यमंत्री से मुलाकात कराने में सहयोग की मांग भी की।
वन अधिकार पट्टा प्राप्त हितग्राहियों के नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं होने का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया गया। ग्रामीणों ने कहा कि रिकॉर्ड में नाम शामिल नहीं होने से उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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खाद, डीजल और पेट्रोल की कमी से किसान परेशान
किसानों ने खाद, पेट्रोल और डीजल की कमी को लेकर प्रशासन को अवगत कराया। किसानों का कहना था कि समय पर सुविधाएं नहीं मिलने से खेती-किसानी प्रभावित हो रही है और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
कई समस्याओं का मौके पर निराकरण
सुशासन तिहार शिविर में ग्रामीणों और अधिकारियों के बीच सीधा संवाद देखने को मिला। कई समस्याओं का मौके पर ही निराकरण किया गया, जबकि अन्य मांगों पर जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया गया। ग्रामीणों ने कहा कि पहली बार उन्हें महसूस हुआ कि प्रशासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुन रहा है।
शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीण, जनप्रतिनिधि, पुलिस विभाग एवं जिला प्रशासन के अधिकारी उपस्थित रहे। अब क्षेत्रवासियों की नजर इस बात पर टिकी है कि वर्षों से लंबित मांगों पर प्रशासन कितना अमल कर पाता है और अधूरे विकास कार्य कब तक पूरे होते हैं।
