गरियाबंद (गंगा प्रकाश)। अपराधों की विवेचना को अधिक वैज्ञानिक, प्रभावी और तकनीक आधारित बनाने के उद्देश्य से गरियाबंद पुलिस द्वारा जिले के सभी थानों के विवेचकों (आईओ) के लिए एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सभा कक्ष में आयोजित इस प्रशिक्षण में फिंगर प्रिंट विज्ञान और राष्ट्रीय स्वचालित फिंगरप्रिंट पहचान प्रणाली (NAFIS) के उपयोग की विस्तृत जानकारी दी गई।

प्रशिक्षण के प्रथम सत्र में फिंगर प्रिंट विशेषज्ञों ने विवेचकों को अपराध स्थल से सुरक्षित एवं वैज्ञानिक तरीके से उंगलियों के निशान संकलित करने, उन्हें संरक्षित रखने तथा न्यायालयीन साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत करने की प्रक्रिया समझाई। विशेषज्ञों ने बताया कि फिंगर प्रिंट अपराध की जांच में सबसे महत्वपूर्ण और विश्वसनीय वैज्ञानिक साक्ष्यों में से एक है, जो अपराधियों की पहचान स्थापित करने में अहम भूमिका निभाता है।
नुक्कड़ नाटक के माध्यम से स्कूली बच्चों ने दिया नशामुक्ति और यातायात जागरूकता का संदेश
द्वितीय सत्र में विवेचकों को NAFIS (नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम) के संचालन और उपयोग का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। लाइव डेमो के माध्यम से बताया गया कि गिरफ्तार आरोपियों के फिंगर प्रिंट को लाइव स्कैनर की सहायता से राष्ट्रीय डेटाबेस में किस प्रकार दर्ज किया जाता है तथा संदिग्ध व्यक्तियों के फिंगर प्रिंट का देशभर के करोड़ों रिकॉर्ड से कुछ ही मिनटों में मिलान कैसे किया जा सकता है।

प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों ने कहा कि बदलते अपराध स्वरूप और आधुनिक चुनौतियों को देखते हुए पुलिस बल का तकनीकी रूप से दक्ष होना समय की आवश्यकता है। NAFIS प्रणाली के प्रभावी उपयोग से अंतरराज्यीय अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी में तेजी आएगी। साथ ही अज्ञात शवों की शिनाख्त, फरार अपराधियों की तलाश तथा पुराने लंबित मामलों के निराकरण में भी महत्वपूर्ण सफलता मिलने की संभावना है।
करैत सांप के डंसने से मासूम की मौत, अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप
पुलिस अधिकारियों ने विवेचकों से प्रशिक्षण में प्राप्त तकनीकी ज्ञान का उपयोग दैनिक जांच कार्यों में करने और वैज्ञानिक साक्ष्यों पर आधारित विवेचना को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिले के विभिन्न थानों से आए विवेचक एवं पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे।




