जनपद सदस्य मुंगेश्वरी ठाकुर ने CEO को सौंपा ज्ञापन, तत्काल पेयजल व्यवस्था की मांग
छुरा (गंगा प्रकाश)। गर्मी की तपिश बढ़ने के साथ ही ग्रामीण अंचलों में पेय जल संकट गहराने लगा है, लेकिन ग्राम पंचायत देवरी अंतर्गत आने वाले ग्राम विजयपुर में हालात अब बेहद गंभीर हो चुके हैं। गांव के पांच हैंडपंप पूरी तरह सूख चुके हैं, वहीं गांव की पानी टंकी भी खाली पड़ी हुई है। स्थिति ऐसी बन गई है कि ग्रामीणों को पीने तक का पानी बड़ी मुश्किल से मिल पा रहा है। महिलाएं सुबह से बर्तन लेकर पानी की तलाश में भटक रही हैं, जबकि कई परिवारों को दूर-दराज के जलस्रोतों से पानी लाना पड़ रहा है। लगातार बढ़ती परेशानी के बीच अब ग्रामीणों में नाराजगी भी साफ दिखाई देने लगी है।
ग्राम विजयपुर की इस गंभीर समस्या को लेकर जनपद पंचायत छुरा क्षेत्र क्रमांक 18 की जनपद सदस्य श्रीमती मुंगेश्वरी अशोक ठाकुर ने जनपद पंचायत छुरा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को लिखित आवेदन सौंपकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने आवेदन में स्पष्ट रूप से बताया है कि गांव में लंबे समय से पेयजल संकट बना हुआ है, लेकिन भीषण गर्मी के चलते अब हालात विकराल रूप धारण कर चुके हैं। यदि समय रहते उचित व्यवस्था नहीं की गई तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी भयावह हो सकती है।

गांव के पांच हैंडपंपों ने छोड़ा साथ
ग्रामीणों के अनुसार गांव के अलग-अलग वार्डों में लगे पांच हैंडपंप पूरी तरह बंद हो चुके हैं। पहले जिन हैंडपंपों से ग्रामीणों को राहत मिलती थी, अब वहां सिर्फ सूखी आवाजें सुनाई दे रही हैं। हैंडपंपों के जवाब दे देने के बाद ग्रामीणों की निर्भरता पानी टंकी और अन्य वैकल्पिक साधनों पर बढ़ गई थी, लेकिन अब पानी टंकी भी सूख चुकी है। ऐसे में गांव के लोगों के सामने भारी संकट खड़ा हो गया है।
बताया जा रहा है कि कई मोहल्लों में सुबह से ही पानी भरने के लिए लोगों की लंबी कतारें लग जाती हैं। जहां कहीं थोड़ा बहुत पानी उपलब्ध हो रहा है, वहां लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। कई परिवारों को अपने दैनिक उपयोग के लिए भी पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है।
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महिलाओं और बच्चों की बढ़ी परेशानी
गांव में जलसंकट का सबसे ज्यादा असर महिलाओं और बच्चों पर दिखाई दे रहा है। सुबह होते ही महिलाएं बर्तन और डिब्बे लेकर पानी की तलाश में निकल पड़ती हैं। कई बार उन्हें एक से दो किलोमीटर दूर जाकर पानी लाना पड़ता है। भीषण गर्मी के बीच पानी लाने की यह मजबूरी ग्रामीण महिलाओं के लिए बड़ी परेशानी बन गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि पानी की कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। कई बच्चे परिवार के साथ पानी लाने में समय बिता रहे हैं। वहीं बुजुर्गों और बीमार लोगों के सामने भी गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई है।

नलजल योजना भी पड़ी ठप
गांव में पानी टंकी सूख जाने के कारण नलजल योजना भी पूरी तरह प्रभावित हो गई है। जिन घरों तक पहले नल के माध्यम से पानी पहुंचता था, वहां अब कई दिनों से पानी नहीं आया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय पर पानी टंकी की व्यवस्था और जलस्रोतों का रखरखाव किया जाता तो आज ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि हर वर्ष गर्मी के मौसम में पानी की समस्या सामने आती है, लेकिन जिम्मेदार विभाग द्वारा स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता। परिणामस्वरूप हर साल ग्रामीणों को इसी तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
जनपद सदस्य ने प्रशासन से की त्वरित कार्रवाई की मांग
जनपद सदस्य श्रीमती मुंगेश्वरी अशोक ठाकुर ने प्रशासन से मांग की है कि गांव में तत्काल टैंकर के माध्यम से पेयजल आपूर्ति शुरू की जाए। साथ ही सूखे पड़े हैंडपंपों की मरम्मत, नए बोर खनन तथा पानी टंकी को पुनः चालू कराने के लिए आवश्यक कदम जल्द उठाए जाएं।
उन्होंने कहा कि गांव के लोग गंभीर परेशानी से गुजर रहे हैं और यदि जल्द समाधान नहीं किया गया तो ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ सकता है। उन्होंने प्रशासन से मानवीय संवेदनाओं को ध्यान में रखते हुए प्राथमिकता के आधार पर कार्यवाही करने की अपील की है।
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ग्रामीणों ने जताई नाराजगी
गांव के लोगों का कहना है कि भीषण गर्मी में पानी जैसी मूलभूत आवश्यकता के लिए संघर्ष करना बेहद दुखद है। कई ग्रामीणों ने कहा कि शासन द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात बिल्कुल अलग दिखाई दे रहे हैं।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द पेयजल व्यवस्था नहीं सुधारी गई तो वे प्रशासन के खिलाफ आंदोलन करने को मजबूर होंगे। फिलहाल पूरे गांव की नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है और लोग उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही उन्हें इस भीषण जलसंकट से राहत मिलेगी।




