कृषि, प्रकृति और पशुधन के प्रति आभार का पर्व बना गांव की एकता और भाईचारे का प्रतीक
छुरा (गंगा प्रकाश)। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपरा और संस्कृति का प्रतीक हरेली तिहार ग्राम गोंदलाबाहरा में इस वर्ष भी पूरे उत्साह, उमंग और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया। श्रावण मास की अमावस्या को मनाए जाने वाले इस पर्व में ग्रामीणों ने प्रकृति, कृषि और पशुधन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए अपनी लोक संस्कृति और परंपराओं को जीवंत रखा।

ग्राम गोंदलाबाहरा में हरेली केवल एक पर्व नहीं, बल्कि गांव की एकता, अखंडता, आपसी भाईचारे और सामाजिक समरसता का प्रतीक बनकर सामने आया। गांव में पर्व को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। ग्रामीणों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ हरेली तिहार मनाते हुए कृषि उपकरणों और पशुधन के प्रति सम्मान की भावना प्रकट की।
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ग्रामीणों ने बताया कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी लोक संस्कृति और परंपराओं से है। हरेली तिहार किसानों और ग्रामीण जीवन से सीधे जुड़ा पर्व है। खेती-किसानी के लिए उपयोग किए जाने वाले औजारों की पूजा तथा अच्छी फसल और सुख-समृद्धि की कामना इस पर्व की प्रमुख विशेषताओं में शामिल है। वहीं, यह पर्व प्रकृति और हरियाली के संरक्षण का संदेश भी देता है।

हरेली तिहार के आयोजन को सफल बनाने में ग्राम के प्रमुख भारत राम दानी, कैलाश साहू, हृदय साहू, भागीरथी साहू, जयदीप साहू, ठाकुर राम निराला, मेवा साहू, मनोहर बघेल, द्वारिका रात्रे, तोमस बंजारे, भानु ध्रुव, बलराम साहू, पवन ध्रुव, फग्गु राम पूर्व सरपंच, पवन मरकाम, रामानंद मनहरे, रामू ध्रुव, मनीष साहू, शोभाराम टंडन एवं ओमप्रकाश साहू सहित ग्रामीणों का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।
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ग्रामीणों ने कहा कि हरेली तिहार नई पीढ़ी को छत्तीसगढ़ की संस्कृति, परंपराओं और ग्रामीण जीवन की जड़ों से जोड़ने का भी महत्वपूर्ण माध्यम है। सामूहिक सहभागिता से मनाए जाने वाले इस पर्व से गांव में आपसी सद्भाव और भाईचारे की भावना और मजबूत होती है।

ग्रामवासियों ने हरेली तिहार के माध्यम से हरियाली, प्रकृति संरक्षण, कृषि संस्कृति और सामाजिक एकता का संदेश देते हुए पर्व को धूमधाम से मनाया। पूरे आयोजन में ग्रामीणों की सहभागिता ने यह साबित किया कि छत्तीसगढ़ की लोक परंपराएं आज भी गांवों में पूरी जीवंतता के साथ कायम हैं।




