जगदलपुर से नगरनार तक प्रशासन अलर्ट, बच्चों-महिलाओं और बुजुर्गों की हुई जांच: जरूरतमंदों को बांटी गईं दवाइयां
ओमप्रकाश रजक
जगदलपुर (गंगा प्रकाश)। बस्तर में लगातार बारिश के बीच कई इलाकों में बने बाढ़ जैसे हालात ने प्रशासन के सामने एक और चुनौती खड़ी कर दी है। जलभराव के कारण घरों से सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाए गए लोगों के बीच अब मौसमी बीमारी और संक्रमण का खतरा न बढ़े, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने राहत शिविरों का रुख कर लिया है। जगदलपुर से लेकर नगरनार तक बनाए गए राहत शिविरों में स्वास्थ्य दल पहुंचकर प्रभावित लोगों की जांच कर रहे हैं और जरूरत के अनुसार दवाइयां उपलब्ध करा रहे हैं।
बाढ़ प्रभावित नागरिकों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. मैत्री के नेतृत्व में शहरी स्वास्थ्य विभाग की टीम और स्थानीय मितानिनों ने जगदलपुर शहर के अलग-अलग राहत शिविरों का दौरा किया। टीम ने शिविरों में रह रहे लोगों की स्वास्थ्य स्थिति का जायजा लेने के साथ प्राथमिक स्वास्थ्य परीक्षण भी किया।

राहत शिविरों में पहुंची स्वास्थ्य टीम
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने भगत सिंह वार्ड स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, भैरमगंज हायर सेकेंडरी स्कूल, पंचपथ तथा प्रवीरचंद्र वार्ड के पनारापारा हायर सेकेंडरी स्कूल में बनाए गए राहत शिविरों का निरीक्षण किया। इन शिविरों में बाढ़ प्रभावित परिवारों ने शरण ली है।
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स्वास्थ्य दल ने यहां मौजूद बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की विशेष रूप से जांच की। बारिश और जलभराव के बीच बदलते मौसम से होने वाली बीमारियों को देखते हुए स्वास्थ्यकर्मियों ने प्रभावित लोगों को आवश्यक सावधानियों की जानकारी भी दी। जिन लोगों को उपचार या दवाइयों की आवश्यकता थी, उन्हें मौके पर ही निशुल्क दवाइयां उपलब्ध कराई गईं।
नगरनार में भी जारी है स्वास्थ्य निगरानी
इधर नगरनार क्षेत्र में भी राहत और बचाव अभियान जारी है। नदी बोड़ना गांव में जलभराव की स्थिति के बाद प्रभावित ग्रामीणों को सुरक्षित निकालकर नगरनार स्थित शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में बनाए गए राहत शिविर में पहुंचाया गया।
शिविर में ठहरे प्रभावित ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच की गई और आवश्यकता के अनुसार दवाइयां दी गईं। स्वास्थ्य विभाग का फोकस इस बात पर है कि बाढ़ के बाद उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों में किसी भी प्रकार के संक्रमण को फैलने का मौका न मिले।

ओआरएस और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था
राहत शिविरों में केवल दवाइयों का वितरण ही नहीं, बल्कि स्वच्छ पेयजल, ओआरएस और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जा रही है। स्वास्थ्य दल शिविरों की लगातार निगरानी कर रहे हैं, ताकि किसी व्यक्ति में बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर समय रहते उपचार शुरू किया जा सके।
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प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की यह सक्रियता इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि बाढ़ के दौरान विस्थापित लोगों को एक ही स्थान पर रहना पड़ता है। ऐसे में स्वच्छता, सुरक्षित पानी और समय पर स्वास्थ्य जांच संक्रमण की रोकथाम में अहम भूमिका निभाती है।
बाढ़ के साथ स्वास्थ्य सुरक्षा की भी चुनौती
बस्तर में बारिश और जलभराव के कारण जहां प्रशासन का प्राथमिक फोकस लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने पर है, वहीं अब राहत शिविरों में रह रहे लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा भी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें शिविरों में पहुंचकर लोगों की स्थिति पर नजर रख रही हैं।
फिलहाल प्रशासन की ओर से राहत शिविरों में स्वास्थ्य जांच, दवा वितरण, ओआरएस और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था जारी है। बाढ़ प्रभावित लोगों को किसी तरह की स्वास्थ्य परेशानी होने पर तत्काल स्वास्थ्य दल को जानकारी देने की अपील भी की जा रही है।





