CG : मंदिर की मूर्तियों पर ‘खून का तिलक’ – गरियाबंद के राजिम थाना क्षेत्र से दो आरोपी गिरफ्तार, गांव में सनसनी

 

राजिम/गरियाबंद (गंगा प्रकाश)। मंदिर की मूर्तियों पर ‘खून का तिलक’ – गरियाबंद जिले के राजिम थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम देवरी से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। यहां के गांव के मंदिर में विराजमान देवी-देवताओं की मूर्तियों पर किसी ने खून से तिलक कर दिया था। मामले का खुलासा तब हुआ जब रविवार सुबह ग्रामीण पूजा-अर्चना के लिए मंदिर पहुंचे और मूर्तियों की स्थिति देख सन्न रह गए। मंदिर के पुजारी और गांव के जिम्मेदार लोग तुरंत थाना राजिम पहुंचे और इस घटना की लिखित शिकायत दर्ज कराई।

मामला जैसे ही राजिम पुलिस के पास पहुंचा, थाना प्रभारी ने इसे गंभीरता से लिया। धार्मिक स्थल से जुड़ा मामला होने के कारण पुलिस ने बिना देर किए जांच शुरू की। मंदिर परिसर के आसपास पूछताछ की गई, संदिग्धों से जानकारी जुटाई गई, जिसके बाद पुलिस की निगाह गांव के ही दो व्यक्तियों – लीलाराम साहू (42) और कामता प्रसाद साहू (50) – पर जाकर टिक गई। दोनों आरोपी ग्राम देवरी स्कूलपारा के रहने वाले हैं।

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पुलिस टीम ने दोनों को हिरासत में लेकर सघन पूछताछ की। पूछताछ के दौरान जो खुलासा हुआ, उसने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया। दोनों आरोपियों ने कबूल किया कि उन्होंने ही मंदिर की सभी मूर्तियों पर खून से तिलक लगाया था। उनके अनुसार, “हमें कहीं से यह जानकारी मिली थी कि देवी-देवताओं पर खून का तिलक लगाने से घर में सुख-शांति, समृद्धि और धन-दौलत आती है। इसी अंधविश्वास में आकर हमने ऐसा किया।”

पुलिस के अनुसार, यह कृत्य भारतीय दंड संहिता की धारा 298 और BNS की धारा 3(5) के तहत अपराध की श्रेणी में आता है। आरोपियों के विरुद्ध मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। साथ ही, पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उनके खिलाफ पृथक से प्रतिबंधात्मक कार्यवाही भी की है।

गांव में व्याप्त भय और आक्रोश

घटना के बाद से गांव देवरी में भय, आक्रोश और आश्चर्य का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि यह मंदिर उनके गांव की आस्था का केंद्र है। “इस तरह की हरकत से गांव का माहौल खराब हो सकता था। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई कर आरोपियों को पकड़ा, इसके लिए हम प्रशासन के आभारी हैं,” मंदिर समिति के अध्यक्ष रामाधार ने कहा।

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वहीं, कुछ ग्रामीणों ने आरोपियों के इस कार्य को “अंधभक्ति की पराकाष्ठा और मूर्खता” बताया। उनके अनुसार, यह किसी भी दृष्टिकोण से धार्मिक कार्य नहीं बल्कि मूर्तियों का अपमान और समाज में गलत संदेश फैलाने वाला कृत्य है।

क्या है धारा 298

धारा 298 (IPC) के अनुसार, कोई भी व्यक्ति यदि किसी अन्य की धार्मिक भावना को ठेस पहुँचाने के उद्देश्य से कोई भी शब्द कहता है या कार्य करता है, तो उसके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जा सकता है। इस अपराध के लिए दंड स्वरूप कारावास या जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।

पुलिस की सख्ती और प्रशासन का संदेश

राजिम थाना प्रभारी ने बताया कि “मामला बेहद संवेदनशील था। धार्मिक भावनाओं से जुड़ा था, जिससे गांव में तनाव फैल सकता था। इसी को देखते हुए तत्काल आरोपियों को पकड़कर उनके खिलाफ कठोर कार्यवाही की गई है। समाज में किसी भी तरह का अंधविश्वास फैलाना अपराध की श्रेणी में आता है।”

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गरियाबंद पुलिस अधीक्षक ने भी स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि “धार्मिक आस्था का अपमान करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। अंधविश्वास के नाम पर किसी भी प्रकार की अवैज्ञानिक गतिविधि करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

सामाजिक कार्यकर्ताओं की राय

सामाजिक कार्यकर्ता का कहना है कि “यह घटना बताती है कि आज भी गांवों में अंधविश्वास किस कदर फैला हुआ है। शिक्षा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का प्रचार-प्रसार होना जरूरी है ताकि लोग ऐसे अपराध की ओर न बढ़ें। देवी-देवता पर खून चढ़ाना घोर अमानवीय और धार्मिक दृष्टि से भी अनुचित है।”

आगे की कार्रवाई

फिलहाल राजिम पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। मामले की विवेचना जारी है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस कार्य के लिए खून कहां से लाया गया, यह जानवर का था या अन्य स्रोत से। एफएसएल टीम को भी आवश्यकतानुसार बुलाया जाएगा ताकि सबूतों की पुष्टि हो सके।

गांव देवरी का यह मामला बताता है कि आस्था और अंधविश्वास के बीच की रेखा कितनी महीन है। एक ओर देवी-देवताओं के प्रति असीम श्रद्धा, तो दूसरी ओर तंत्र-मंत्र और अवैज्ञानिक मान्यताओं में उलझा समाज। गरियाबंद पुलिस की तत्परता ने एक बड़े विवाद और संभावित साम्प्रदायिक तनाव को टाल दिया, परंतु यह घटना समाज को यह सोचने पर विवश कर रही है कि आखिर कब तक लोग अंधविश्वास की बेड़ियों में जकड़े रहेंगे।


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