छुरा से बड़ी खबर : शिक्षा विभाग का आदेश हवा, राजस्व विभाग में शिक्षक–कर्मचारी का डेरा, अटैचमेंट पर सरकार का फेल सिस्टम!
छुरा (गंगा प्रकाश)। छुरा से बड़ी खबर :शिक्षा विभाग का आदेश हवाछ त्तीसगढ़ की भूपेश सरकार (सायं सरकार) ने साफ़ आदेश जारी कर दिया था कि किसी भी विभाग में अटैचमेंट की प्रथा खत्म की जाएगी, लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे एकदम उलट है। सरकार के आदेश को जिला प्रशासन ने जैसे “ठेंगा” दिखा दिया है। हालत ये है कि स्कूल शिक्षा विभाग के कर्मचारी और शिक्षक, राजस्व विभाग और अन्य दफ़्तरों में सालों से अटैचमेंट में जमे बैठे हैं, और वेतन स्कूल शिक्षा विभाग से उठा रहे हैं।

स्कूलों में शिक्षक नहीं, दफ़्तरों में फाइलें पलट रहे गुरूजी!
छुरा विकासखण्ड और आसपास के संकुलों में शिक्षक और कर्मचारियों की भारी कमी है। गांव–गांव के स्कूल बच्चों के लिए तड़प रहे हैं, लेकिन रिकॉर्ड में पद रिक्त नहीं दिख रहे। वजह ये है कि ये पदस्थ कर्मचारी–शिक्षक कार्यालयों में अटैचमेंट पर टिके हुए हैं।
रूवाड हायर सेकंडरी स्कूल के लिपिक देवलाल नेताम ने खुद बताया कि उनकी नियुक्ति स्कूल में हुई, लेकिन जिला कलेक्टर ने उन्हें राजस्व भू-अभिलेख शाखा में अटैच कर दिया। वेतन उनका अब भी ब्लॉक शिक्षा कार्यालय छुरा से ही निकल रहा है।
इसी तरह, उत्कृष्ट आत्मानंद हिंदी मिडियम हायर सेकंडरी स्कूल छुरा का जीवविज्ञान विषय का एकलौता शिक्षक बुद्धविलास सिंह पिछले तीन सालों से जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में प्रतिनियुक्ति पर जमे हैं। छात्रों की पढ़ाई भगवान भरोसे।
राजिम हायर सेकंडरी स्कूल की व्याख्याता पूजा मिश्रा, और सहायक ग्रेड-2 गजराज बंजारे (जो नवा रायपुर संचालकालय में टिके हुए हैं), भी अटैचमेंट की इस “सुविधा” का फायदा उठाकर वेतन अपने-अपने स्कूल से ले रहे हैं।
40–50 कर्मचारी अब भी अटैचमेंट में!
सूत्र बताते हैं कि केवल छुरा ब्लॉक में ही 40 से 50 शिक्षक–कर्मचारी आज भी अटैचमेंट में जमे हुए हैं। शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव के लिए यह सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है। एक तरफ आदिवासी अंचलों में शिक्षक की भारी कमी है, दूसरी तरफ कई शिक्षक भत्ता और एलाउंस तो “दुर्गम क्षेत्र” का ले रहे हैं लेकिन ड्यूटी आराम से शहर में कर रहे हैं।
युक्तियुक्तकरण भी बना मज़ाक
अधिकारियों ने युक्तियुक्तकरण (Rationalisation) के नाम पर उन शिक्षकों को इधर-उधर कर दिया, जो सीधे-साधे थे और मनपसंद जगह के लिए दबाव या जुगाड़ नहीं कर पाए। लेकिन जो लोग चापलूसी, चरणवंदना, पैसों का खेल और राजनीतिक पकड़ रखते हैं, उनके लिए युक्तियुक्तकरण का कोई मतलब ही नहीं निकला।
शिक्षा मंत्री के सामने चुनौती
सायं सरकार ने भले ही आदेश जारी कर दिया हो, लेकिन ज़मीनी स्तर पर अफसरशाही ने उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया है। गरियाबंद जिले में शिक्षा विभाग का अटैचमेंट सिस्टम खुल्लमखुल्ला चल रहा है। अब सवाल ये है कि नवेले शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव अफसरों की इस मनमानी पर अंकुश लगा पाएंगे या नहीं?
बच्चों की पढ़ाई दांव पर है, पद रिक्त दिखते नहीं, लेकिन हकीकत में स्कूल खाली हैं।
सरकार का आदेश “कागज़ी शेर” बन चुका है।
अफसरशाही और “प्रभावशाली शिक्षक” सिस्टम को ठेंगा दिखा रहे हैं।