Malmas 2026 : नई दिल्ली, 1 जनवरी, 2026 – जैसे ही हम 2026 के नए वर्ष की दहलीज पर कदम रख रहे हैं, हिंदू पंचांग एक ऐसे असाधारण खगोलीय और ज्योतिषीय संयोग की ओर इशारा कर रहा है, जो सदियों में कभी-कभी ही देखने को मिलता है। आने वाला साल सामान्य 12 महीनों का न होकर, बल्कि 13 महीनों का होने वाला है! इस विशेष बदलाव का केंद्र बिंदु है ‘मलमास’ (Malmas), जिसे ‘अधिक मास’ या ‘पुरुषोत्तम मास’ के नाम से भी जाना जाता है।

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इस बार का मलमास इसलिए भी खास है क्योंकि इसकी अवधि लगभग दो महीने तक खिंच सकती है, जिससे न केवल मांगलिक कार्यों पर गहरा प्रभाव पड़ेगा, बल्कि व्रत-त्योहारों की तिथियों में भी महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिलेंगे। यह अवधि आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

क्यों आता है मलमास? खगोलीय गणित का रहस्य

हिंदू कैलेंडर सूर्य और चंद्रमा की गति पर आधारित है। सौर वर्ष (सूर्य द्वारा पृथ्वी का एक चक्कर) लगभग 365 दिन और 6 घंटे का होता है, जबकि चंद्र वर्ष (चंद्रमा द्वारा पृथ्वी का 12 चक्कर) लगभग 354 दिनों का होता है। इन दोनों के बीच प्रति वर्ष लगभग 11 दिनों का अंतर आता है। तीन वर्षों में यह अंतर बढ़कर लगभग एक चंद्र मास (29.5 दिन) के बराबर हो जाता है।

इस अंतर को समायोजित करने और सौर तथा चंद्र वर्ष के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए, हर तीसरे साल एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है। यही अतिरिक्त महीना अधिक मास या मलमास कहलाता है। जिस चंद्र मास में सूर्य की संक्रांति (राशि परिवर्तन) नहीं होती, वह महीना ‘शुद्ध’ न रहकर ‘मलिन’ या मलमास बन जाता है।

2026 में मलमास: ज्येष्ठ मास का दोहराव और तिथियां

ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, 2026 में ज्येष्ठ का महीना दो बार आएगा। इसका अर्थ है कि इस बार ज्येष्ठ मास की अवधि लगभग 60 दिनों की होगी, जो अपने आप में एक दुर्लभ घटना है।

  • मलमास प्रारंभ: 17 मई 2026 (रविवार)

  • मलमास समापन: 15 जून 2026 (सोमवार)

इस अवधि में, जब ज्येष्ठ का महीना दोहराया जाएगा, तो आध्यात्मिक कार्यों को छोड़कर अन्य सभी शुभ और मांगलिक कार्यों को वर्जित माना जाता है।

मलमास में क्या करें और क्या न करें: धार्मिक विधान

शास्त्रों में मलमास को भगवान विष्णु का महीना होने के कारण ‘पुरुषोत्तम मास’ भी कहा गया है। यह महीना तपस्या, दान और भक्ति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है, जबकि भौतिक सुखों से जुड़े कार्य इस दौरान वर्जित होते हैं।

क्या न करें (वर्जित कार्य):

मलमास को मलिन होने के कारण मांगलिक कार्यों के लिए अशुभ माना जाता है। इस अवधि में निम्नलिखित कार्यों से बचना चाहिए:

  • विवाह और सगाई: कोई भी विवाह संबंधी आयोजन या सगाई नहीं करनी चाहिए।

  • गृह प्रवेश: नए घर में प्रवेश या भूमि पूजन जैसे कार्य टाल दें।

  • मुंडन और नामकरण: बच्चों के संस्कार जैसे मुंडन या नामकरण नहीं किए जाते।

  • नया व्यवसाय या निवेश: नया व्यापार शुरू करना, संपत्ति खरीदना या कोई बड़ा निवेश करना शुभ नहीं माना जाता।

क्या करें (शुभ कार्य):

पुरुषोत्तम मास आध्यात्मिक उन्नति के लिए सर्वोत्तम माना गया है। इस दौरान किए गए कुछ कार्य विशेष फलदायी होते हैं:

  • दान-पुण्य: इस महीने में किया गया दान, विशेषकर मालपुए का दान, अक्षय फल देता है। वस्त्र, अन्न और धन का दान भी शुभ है।

  • भगवान विष्णु की पूजा: भगवान विष्णु की भक्ति, श्रीहरि के मंत्रों का जाप (जैसे ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’), विष्णु सहस्रनाम का पाठ और श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण विशेष रूप से फलदायी होता है।

  • तीर्थ यात्रा और गंगा स्नान: पवित्र नदियों में स्नान, विशेष रूप से गंगा स्नान, और तीर्थ दर्शन से पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है।

  • व्रत और तपस्या: इस महीने में व्रत रखने और तपस्या करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।


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