स्मृति ठाकुर बोलीं— पहले चंदे में हेराफेरी, अब चढ़ावे पर सवाल; सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कराने की मांग

गरियाबंद (गंगा प्रकाश)। राम मंदिर निर्माण के लिए देशभर से जुटाए गए चंदे और मंदिर में प्राप्त चढ़ावे को लेकर कांग्रेस ने भाजपा, आरएसएस और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर गंभीर आरोप लगाते हुए पूरे प्रकरण की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र जांच की मांग की है। कांग्रेस कार्यकर्ता स्मृति ठाकुर ने आयोजित प्रेसवार्ता में कहा कि भगवान श्रीराम करोड़ों भारतीयों की आस्था, संस्कृति और नैतिक चेतना के प्रतीक हैं। ऐसे में उनके नाम पर जुटाई गई राशि के उपयोग और प्रबंधन को लेकर उठ रहे सवालों का स्पष्ट जवाब देश की जनता को मिलना चाहिए।

स्मृति ठाकुर ने कहा कि राम मंदिर निर्माण के लिए देश के गरीब, किसान, मजदूर, महिलाएं और आम श्रद्धालुओं ने अपनी मेहनत की कमाई, बचत और यहां तक कि आभूषण तक दान किए। उनका आरोप है कि भाजपा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और विश्व हिंदू परिषद ने वर्षों तक भगवान श्रीराम के नाम पर जनभावनाओं को जोड़कर व्यापक स्तर पर चंदा एकत्र किया और उसी आंदोलन के बल पर राजनीतिक लाभ प्राप्त किया। अब मंदिर निर्माण के बाद उसी धनराशि और मंदिर में प्राप्त चढ़ावे के संबंध में गंभीर प्रश्न सामने आ रहे हैं।

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उन्होंने आरोप लगाया कि पहले मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे में कथित हेराफेरी हुई और अब चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर भी अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। उनके अनुसार यह केवल आर्थिक अनियमितता का विषय नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास से जुड़ा मामला है।
प्रेसवार्ता के दौरान स्मृति ठाकुर ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्र के इस्तीफे कई गंभीर सवाल खड़े करते हैं। उन्होंने कहा कि यदि व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी थी तो शीर्ष स्तर पर बदलाव क्यों किए गए। उन्होंने ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी शीर्ष पदाधिकारियों की होती है।

उन्होंने मीडिया में प्रकाशित खबरों का उल्लेख करते हुए कहा कि ट्रस्ट से जुड़े कुछ अन्य पदाधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठे हैं। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई कर पूरे मामले को सीमित करने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि शीर्ष स्तर की जवाबदेही अब तक तय नहीं हुई है।

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स्मृति ठाकुर ने कहा कि एसआईटी द्वारा राम मंदिर के बड़े आयोजनों में हुए खर्च की भी जांच किए जाने की खबरें सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि प्राण-प्रतिष्ठा समारोह सहित विभिन्न आयोजनों में हुए व्यय और वित्तीय लेन-देन की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति देश के सामने आ सके।

केंद्र सरकार से पूछे कई सवाल

प्रेसवार्ता में उन्होंने केंद्र सरकार के समक्ष कई सवाल रखते हुए पूछा कि यदि ट्रस्ट का गठन केंद्र सरकार की देखरेख में हुआ था तो कथित अनियमितताओं की जवाबदेही कौन लेगा। यदि सब कुछ सही था तो शीर्ष पदाधिकारियों के इस्तीफे क्यों हुए। यदि कोई गड़बड़ी नहीं हुई तो स्वतंत्र जांच से परहेज क्यों किया जा रहा है। उन्होंने यह भी पूछा कि कार्रवाई केवल छोटे कर्मचारियों तक ही क्यों सीमित है और शीर्ष स्तर पर जवाबदेही कब तय होगी।

स्मृति ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस पूरे मामले पर अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए। उनका कहना था कि भगवान श्रीराम किसी एक दल की राजनीतिक पहचान नहीं, बल्कि पूरे देश की आस्था के केंद्र हैं। इसलिए श्रद्धालुओं द्वारा समर्पित प्रत्येक रुपये का हिसाब सार्वजनिक होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के नाम पर एकत्रित धन और मंदिर में प्राप्त चढ़ावे से जुड़े प्रत्येक आरोप की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। दोषी चाहे किसी भी पद पर हो, उसके विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। कांग्रेस ने पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र जांच कराने तथा दोषियों को बेनकाब कर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग दोहराई।

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